Archive for category: विविध

जंगल की आवाज कौन सुनेगा ?

जंगल की आवाज कौन सुनेगा ?

0 अभिषेक रंजन / 2012/04/25 10:33 am

बड़ी तकलीफ होती है जब अपने पाँवों के नीचे की जमीन सुलगती है। लेकिन उनका क्या जिन्हें सुलगते आग के दर्द को दिन-रात झेलना पड़ता है। उनकी व्यथा कौन समझ

विचारधारा का संगम “कॉफी हाऊस”

विचारधारा का संगम “कॉफी हाऊस”

0 जनोक्ति डेस्क / 2012/04/19 3:53 pm

शाह आलम भाई के अनुभवों का फायदा मुझे पिछले करीब 10 महीने से मिल रहा है। वो मेरे सहकर्मी और सहयोगी भी हैं। आज जब कनॉट प्लेस में बिना किसी

हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद

0 गौरव शर्मा / 2012/04/08 9:38 pm

1936 में बर्लिन ओलपिंक में जब भारत ने जर्मनी को 8-1 से रौंद दिया तो इस खेल के चश्मदीद हिटलर ने ध्यानचंद के सामने जर्मन नागरिकता और जर्मन सेना में

जनमत : देश के लिए वोट करें

0 जनोक्ति डेस्क / 2012/04/03 2:28 pm

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सौर उर्जा से लैस होंगे भारत के दर्जन भर शहर

सौर उर्जा से लैस होंगे भारत के दर्जन भर शहर

0 जनोक्ति डेस्क / 2012/04/02 5:28 pm

उर्जा जरूरतों की मांग दिनों दिन बढती जा रही है और परम्परागत उर्जा स्रोतों के अवैध इस्तेमाल से स्थिति और भी विकट हो गयी है | इन सबके बीच नवीन

पटना में पेंटिंग प्रदर्शनी

पटना में पेंटिंग प्रदर्शनी

0 जयदीप शेखर / 2012/03/31 11:17 pm

पटना में 31st March to 2nd April 2012 तक मिनाक्षी झा बनर्जी की तस्वीरों की प्रदर्शनी ‘बासंती ‘ आयोजित की गयी है | देखिये कुछ मिनाक्षी की कुछ बेहतरीन पेंटिंग्स

भारत का दिल देखो ,एमपी में बढ़ी पर्यटकों की संख्या

0 जनोक्ति डेस्क / 2012/03/27 12:19 am

मध्य प्रदेश पर्यटन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। यहां पर्यटन स्थलों की भरमार है जिनके सौंदर्य एवं आकर्षण से करोड़ों की संख्या में पर्यटक खींचे चले आते हैं। खास

केन्द्रीय बजट और ग्रामीण भारत

केन्द्रीय बजट और ग्रामीण भारत

1 राजीव गुप्ता / 2012/03/25 12:30 am

पांच राज्यों के चुनावों में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन से सबक लेते हुए एवं रेल बजट से उत्पन्न हुए गर्म सियासी माहौल के बीच वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने यूपीए

नदी एकीकरण परियोजना का नफा-नुकसान

नदी एकीकरण परियोजना का नफा-नुकसान

1 जनोक्ति डेस्क / 2012/03/19 9:01 am

उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद एक बार फिर से नदियों के एकीकरण की योजना को लेकर बड़ी बहस छिड़ गयी है | एक ओर कुछ स्वार्थी तत्व हैं जो

एक आम आदमी द्वारा प्रस्तुत बजट!

एक आम आदमी द्वारा प्रस्तुत बजट!

0 जयदीप शेखर / 2012/03/17 9:11 am

वित्तमंत्री महोदय संसद में जो बजट पेश किया सो तो किया ही, यहाँ एक आम नागरिक की ओर से बजट का खाका प्रस्तुत किया जा रहा है- रुपये के ‘मूल्य’