जंगल की आवाज कौन सुनेगा ?
0बड़ी तकलीफ होती है जब अपने पाँवों के नीचे की जमीन सुलगती है। लेकिन उनका क्या जिन्हें सुलगते आग के दर्द को दिन-रात झेलना पड़ता है। उनकी व्यथा कौन समझ
यहां का नैसर्गिक सौंदर्य और आकर्षण बार-बार लुभाता है \ आर. के. रंजन बचपन से ही मेरा ऋषि दुर्वासा की भूमि दुर्वासानगर यानी भूरहा, गुरूआ, गया से लगाव रहा
( जसवंत सिंह, पूर्व विदेश मंत्री से राजीव गुप्ता की बातचीत पर आधारित ) भारत के लिए अग्नि - 5 जिसकी मारक क्षमता 5000 किमी. से ज्यादा है के सफल परीक्षण के साथ 19 अप्रैल 2012 का दिन ऐतिहासिक बन
नई दिल्ली | श्यामा फाउन्डेशन जिस तरह गरीब मरीजों के इलाज में लगा हुआ है, यह बहुत ही प्रशंसा के योग्य है, और हम सभी को इस काम में फाउन्डेशन के
बड़ी तकलीफ होती है जब अपने पाँवों के नीचे की जमीन सुलगती है। लेकिन उनका क्या जिन्हें सुलगते आग के दर्द को दिन-रात झेलना पड़ता है। उनकी व्यथा कौन समझ
शाह आलम भाई के अनुभवों का फायदा मुझे पिछले करीब 10 महीने से मिल रहा है। वो मेरे सहकर्मी और सहयोगी भी हैं। आज जब कनॉट प्लेस में बिना किसी
1936 में बर्लिन ओलपिंक में जब भारत ने जर्मनी को 8-1 से रौंद दिया तो इस खेल के चश्मदीद हिटलर ने ध्यानचंद के सामने जर्मन नागरिकता और जर्मन सेना में
उर्जा जरूरतों की मांग दिनों दिन बढती जा रही है और परम्परागत उर्जा स्रोतों के अवैध इस्तेमाल से स्थिति और भी विकट हो गयी है | इन सबके बीच नवीन
पटना में 31st March to 2nd April 2012 तक मिनाक्षी झा बनर्जी की तस्वीरों की प्रदर्शनी ‘बासंती ‘ आयोजित की गयी है | देखिये कुछ मिनाक्षी की कुछ बेहतरीन पेंटिंग्स
मध्य प्रदेश पर्यटन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। यहां पर्यटन स्थलों की भरमार है जिनके सौंदर्य एवं आकर्षण से करोड़ों की संख्या में पर्यटक खींचे चले आते हैं। खास
पांच राज्यों के चुनावों में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन से सबक लेते हुए एवं रेल बजट से उत्पन्न हुए गर्म सियासी माहौल के बीच वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने यूपीए
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद एक बार फिर से नदियों के एकीकरण की योजना को लेकर बड़ी बहस छिड़ गयी है | एक ओर कुछ स्वार्थी तत्व हैं जो
वित्तमंत्री महोदय संसद में जो बजट पेश किया सो तो किया ही, यहाँ एक आम नागरिक की ओर से बजट का खाका प्रस्तुत किया जा रहा है- रुपये के ‘मूल्य’