Archive for category: विविध

Rumi-Hidden Treasure

0 देवी नागरानी / 2011/04/02 10:47 pm

लौट कर सो न जाना शफ़क से पहले की ताज़गी हर राज़ को समेटे है वापस लौट कर सो न जाना ये प्रार्थना का समाँ है ये माँगने का समाँ

जुनून क्रिकेट का …..

जुनून क्रिकेट का …..

0 अनिकेत प्रियदर्शी / 2011/04/01 9:04 pm

रात के ग्यारह बज रहे थे और शोर इतना ज्यादा हो रहा था मानो पूरा भारत चिल्ला कर अपनी धडकनों को सामान्य करने का प्रयास कर रहा हो । इस

सुविधा और दुविधा के बीच लटके हम भारतीय

सुविधा और दुविधा के बीच लटके हम भारतीय

0 ब्रज किशोर सिंह / 2011/03/28 7:22 pm

इस ग्लोब पर निवास करने वाले किसी भी इन्सान ने कभी ख्वाबों-ख्यालों में भी नहीं सोंचा था कि पूरी दुनिया के लिए वैज्ञानिक व तकनीकी विकास का उदाहरण माना जानेवाला

कहाँ गया वो बचपन, छिन गया वो बचपन

कहाँ गया वो बचपन, छिन गया वो बचपन

1 श्याम एन रंगा / 2011/03/25 9:18 pm

इक्कड़ बिक्कड़ बम्बे बो, अस्सी नब्बे पूरा सौ ………पोसम्बा भाई पासेम्बा डाकिये ने क्या किया…….. ये वो शब्द है जो आजकल गली मौहल्लों में सुनने को नहीं मिलते हैं। इन

घी हमेशा टेढ़ी ऊँगली से ही निकलता है…..

घी हमेशा टेढ़ी ऊँगली से ही निकलता है…..

1 पूजा सिंह आदर्श / 2011/03/25 8:21 pm

जीवन एक सपूर्ण पाठशाला है…इस बात से हम और आप इंकार नहीं कर सकते क्योकि इस पाठशाला में हमें रोज कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। जिन्दगी आपको हर

बसंत पर ग्रहण का साया!

0 शारदा मोंगा / 2011/03/17 4:27 am

खुशियों का रंग लेके बसंत,  आया… बसंत आया यह शाश्वत कहानी, लगने लगी बेमानी, हुआ समय का फेरा, आतंकियों ने घेरा, कर अतिक्रमण, सीमा को दे चुनौती, सबल दानवता, मानवता

दृढ़ संकल्पों की सडक मंजिल की ओर,

0 शारदा मोंगा / 2011/03/16 2:41 pm

द्वंद विचारों के अनिर्णीत, दोराहों चौराहों पर शोर मचता जब घनघोर,  दृढ़ संकल्पों की सडक ही, भटकन से हमें बचा कर, पकड़ाती  मंजिल की डोर, ले जाती मंजिल की ओर. इस सडक की चाल कभी,  सीधी सी कभी टेढ़ी सी,    मुडती बलखाती कभी

एक बारात ऐसी भी: बिना दुल्हन का दूल्हा

एक बारात ऐसी भी: बिना दुल्हन का दूल्हा

0 श्याम एन रंगा / 2011/03/16 10:26 am

होली एक विशेष त्यौंहार है और होली पर विभिन्न प्रकार के विचित्र आयोजन भी किए जाते हैं। भारत में होली का त्यौंहार उल्लास, उमंग व परम्पराओं के निर्वहन के साथ

सदा आनंद रहे एहि द्वारे मोहन खेले होरी

सदा आनंद रहे एहि द्वारे मोहन खेले होरी

1 जनोक्ति डेस्क / 2011/03/16 9:33 am

: मनोरंजन सिंह (पिछली होली के समय उनके ब्लॉग पर प्रकाशित ) जुम्‍मन मियां हमारे गांव में गंगा जमुनी तहजीब के जीते जागते, चलते फिरते, बोलते चालते प्रतीक हैं। बाइस

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति लता राजू महस्की की पोल खुली

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति लता राजू महस्की की पोल खुली

0 ramkishor pawar / 2011/03/08 12:35 pm

जिस ढंग से बैतूल जिले की पहली महिला जिला पंचायत अध्यक्ष एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त श्रीमति लता राजू महस्की ने बीते पखवाड़े सम्पन्न हुई ,जिला पंचायत की बैठक में आर