जीवन की उमंग का प्रतीक ऋतुराज बसंत
1हमारी संस्कृति में पर्वों का विभाजन मौसम के अनुसार ही होता है। इन पर्वों पर हमारे मन में स्वतः ही उत्साह उत्पन्न हो जाता है। शरत् ऋतु के बाद ग्रीष्म
जहाँ तक मेरी जानकारी है- परमाणु बिजली संयंत्रों में ‘परमाणु ऊर्जा’ को ‘विद्युत ऊर्जा’ में नहीं बदला जाता; बल्कि ‘परमाणु ऊर्जा’ का उपयोग पानी को उबालने में किया जाता है,
जल ही जीवन है। जल जीवन का सार है। प्राणी कुछ समय के लिए भोजन के बिना तो रह सकता है लेकिन पानी के बिना नहीं। जल के बिना जीवन
KAKOLAT WATERFALL AT NAWADA IN BIHAR शीतांशु कुमार सहाय यह जलप्रपात नवादा ज़िला मुख्यालय से 35 किलोमीटर पूरब-दक्षिण गोविंदपुर प्रखंड में स्थित है. सात पर्वत श्रृंखलाओं से प्रवाहित ककोलत जलप्रपात
हमारी संस्कृति में पर्वों का विभाजन मौसम के अनुसार ही होता है। इन पर्वों पर हमारे मन में स्वतः ही उत्साह उत्पन्न हो जाता है। शरत् ऋतु के बाद ग्रीष्म
जहाँ तक मेरी जानकारी है- परमाणु बिजली संयंत्रों में ‘परमाणु ऊर्जा’ को ‘विद्युत ऊर्जा’ में नहीं बदला जाता; बल्कि ‘परमाणु ऊर्जा’ का उपयोग पानी को उबालने में किया जाता है,
जल ही जीवन है। जल जीवन का सार है। प्राणी कुछ समय के लिए भोजन के बिना तो रह सकता है लेकिन पानी के बिना नहीं। जल के बिना जीवन
KAKOLAT WATERFALL AT NAWADA IN BIHAR शीतांशु कुमार सहाय यह जलप्रपात नवादा ज़िला मुख्यालय से 35 किलोमीटर पूरब-दक्षिण गोविंदपुर प्रखंड में स्थित है. सात पर्वत श्रृंखलाओं से प्रवाहित ककोलत जलप्रपात
Author:सिराज केसर हरिद्वार की गंगा में खनन रोकने के लिए कई बार के लंबे अनशनों और जहर दिए जाने की वजह से मातृसदन के संत निगमानंद अब नहीं रहे। हरिद्वार
जंगलों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और लगातार बढ़ती जनसंख्या के अलावा बड़े पैमाने पर लग रहे उद्योगों से छत्तीसगढ़ का पर्यावरण असंतुलित होने लगा है। उद्योगों के कारण उपजाऊ भूमि सिमट रही है,
यह कहानी है देश के राष्ट्रीय पशु बाघ की। यह कहानी है बाघ की उस दहाड़ की, जो पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन यह दहाड़ अब रोमांचित
जीवनदायिनी यमुना 1670 किलोमीटर का विस्तार लिए यमुना नदी भारत में गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है | पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना जी पवित्रतम नदी होने के साथ-साथ
इस ग्लोब पर निवास करने वाले किसी भी इन्सान ने कभी ख्वाबों-ख्यालों में भी नहीं सोंचा था कि पूरी दुनिया के लिए वैज्ञानिक व तकनीकी विकास का उदाहरण माना जानेवाला
मई 1924 की बात है ! उस समय मेरे पिता जी साउथ इन्डिया कम्पनी में सर्वेयर के रुप में कार्यरत था ! यह कहानी उनकी जबानी ही सुनिए ! मैं