Archive for category: प्रकृति

जीवन की उमंग का प्रतीक ऋतुराज बसंत

जीवन की उमंग का प्रतीक ऋतुराज बसंत

1 श्याम एन रंगा / 2012/02/13 9:22 pm

हमारी संस्कृति में पर्वों का विभाजन मौसम के अनुसार ही होता है। इन पर्वों पर हमारे मन में स्वतः ही उत्साह उत्पन्न हो जाता है। शरत् ऋतु के बाद ग्रीष्म

परमाणु विद्युत संयंत्र बनाम छोटे विद्युत संयंत्र

परमाणु विद्युत संयंत्र बनाम छोटे विद्युत संयंत्र

1 जयदीप शेखर / 2012/01/11 6:30 pm

जहाँ तक मेरी जानकारी है- परमाणु बिजली संयंत्रों में ‘परमाणु ऊर्जा’ को ‘विद्युत ऊर्जा’ में नहीं बदला जाता; बल्कि ‘परमाणु ऊर्जा’ का उपयोग पानी को उबालने में किया जाता है,

गहराता जलसंकट अस्तित्व का सवाल

गहराता जलसंकट अस्तित्व का सवाल

0 श्याम एन रंगा / 2012/01/07 9:47 am

जल ही जीवन है। जल जीवन का सार है। प्राणी कुछ समय के लिए भोजन के बिना तो रह सकता है लेकिन पानी के बिना नहीं। जल के बिना जीवन

नवादा का ककोलत जलप्रपात प्रकृति का अनमोल तोहफा

नवादा का ककोलत जलप्रपात प्रकृति का अनमोल तोहफा

0 जनोक्ति डेस्क / 2011/07/07 9:45 pm

KAKOLAT WATERFALL AT NAWADA IN BIHAR शीतांशु कुमार सहाय यह जलप्रपात नवादा ज़िला मुख्यालय से 35 किलोमीटर पूरब-दक्षिण गोविंदपुर प्रखंड में स्थित है. सात पर्वत श्रृंखलाओं से प्रवाहित ककोलत जलप्रपात

गंगापुत्र निगमानंद का बलिदान अमर रहेगा !

गंगापुत्र निगमानंद का बलिदान अमर रहेगा !

2 जनोक्ति डेस्क / 2011/06/14 1:45 pm

Author:सिराज केसर हरिद्वार की गंगा में खनन रोकने के लिए कई बार के लंबे अनशनों और जहर दिए जाने की वजह से मातृसदन के संत निगमानंद अब नहीं रहे। हरिद्वार

कहीं राख का कटोरा न बन जाए छत्तीसगढ़ !

कहीं राख का कटोरा न बन जाए छत्तीसगढ़ !

0 rajendra rathore / 2011/06/05 9:15 am

जंगलों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और लगातार बढ़ती जनसंख्या के अलावा बड़े पैमाने पर लग रहे उद्योगों से छत्तीसगढ़ का पर्यावरण असंतुलित होने लगा है। उद्योगों के कारण उपजाऊ भूमि सिमट रही है,

जंगलों की शान बाघ कभी खत्म न होने पाए!

जंगलों की शान बाघ कभी खत्म न होने पाए!

0 रमेश भट्ट / 2011/05/25 10:58 am

यह कहानी है देश के राष्ट्रीय पशु बाघ की। यह कहानी है बाघ की उस दहाड़ की, जो पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन यह दहाड़ अब रोमांचित

यमुना प्रदुषण पर विशेष टास्क फ़ोर्स का गठन हो |

यमुना प्रदुषण पर विशेष टास्क फ़ोर्स का गठन हो |

1 जयराम "विप्लव" / 2011/04/24 12:25 pm

जीवनदायिनी यमुना 1670 किलोमीटर का विस्तार लिए यमुना नदी भारत में गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है | पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना जी पवित्रतम नदी होने के साथ-साथ

सुविधा और दुविधा के बीच लटके हम भारतीय

सुविधा और दुविधा के बीच लटके हम भारतीय

0 ब्रज किशोर सिंह / 2011/03/28 7:22 pm

इस ग्लोब पर निवास करने वाले किसी भी इन्सान ने कभी ख्वाबों-ख्यालों में भी नहीं सोंचा था कि पूरी दुनिया के लिए वैज्ञानिक व तकनीकी विकास का उदाहरण माना जानेवाला

जानवर भी सोचते हैं …

जानवर भी सोचते हैं …

4 R K KHURANA / 2010/12/01 1:01 pm

मई 1924 की बात है ! उस समय मेरे पिता जी साउथ इन्डिया कम्पनी में सर्वेयर के रुप में कार्यरत था ! यह कहानी उनकी जबानी ही सुनिए ! मैं