Archive for category: रोजी-रोटी

ग्रामीण भारत  के  आम जन और उनकी अभिलाषा

ग्रामीण भारत के आम जन और उनकी अभिलाषा

1 अरविन्द विद्रोही / 2011/12/16 7:42 pm

भारत  एक कृषि प्रधान देश है| भारत की बहुसंख्यक आबादी कृषि से ही जुडी है| आज भी भारत की बहुसंख्यक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भारत रूप से ग्रामीण जीवन से

कृषि ऋण में व्यापक सुधार की जरुरत

कृषि ऋण में व्यापक सुधार की जरुरत

0 रमेश भट्ट / 2011/12/08 8:47 pm

बजट 2011- 12 में सरकार ने  कृषि  ऋण का लक्ष्य 4.75 लाख करोड़ रखा है। यह पिछले साल के मुकाबले 1 लाख करोड़ ज्यादा है। ऋण खेती की एक बुनियादी

अर्थसत्ता में टूटा अमेरिका का गुरुर

अर्थसत्ता में टूटा अमेरिका का गुरुर

0 कुंदन पाण्डेय / 2011/10/01 12:02 pm

अमेरिका में 95 वर्षों के बाद शीर्ष वैश्विक क्रेडिट रेटिंग संस्था ‘स्टैंडर्ड एण्ड पुअर’ (एस एण्ड पी) ने अमेरिका की क्रेडिट (साख) रेटिंग ‘एएए’ से घटाकर ‘एए प्लस’ करके अमेरिकी गुरूर को

अमीर बनने के अचूक नुस्खे

अमीर बनने के अचूक नुस्खे

5 R K KHURANA / 2011/01/19 10:41 am

सभी पूछते हैं आप का हाल कैसा है, यदि आपके पास पैसा है ! आज के आर्थिक युग में प्रत्येक व्यक्ति पैसे के पीछे भाग रहा है ! पैसे के

खाद्य प्रसंस्करण में बड़े बदलाव की जरुरत

खाद्य प्रसंस्करण में बड़े बदलाव की जरुरत

0 रमेश भट्ट / 2010/11/20 5:18 pm

खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अब भी बड़ी संख्या में करों की उलझन बना हुआ है | खाद्य क्षेत्र में “कर ढांचे “को और अधिक तर्कसंगत बनाने की सख्त जरूरत

गरीबो को गरीबी रेखा के नीचे वाली सूची में स्वतः चयन का अधिकार मिले

गरीबो को गरीबी रेखा के नीचे वाली सूची में स्वतः चयन का अधिकार मिले

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/08/22 8:38 pm

प्रस्तावित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की मुख्य बात कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन वाली सरकार की चुनाव पूर्व घोषणा है गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों

महंगाई डायन

महंगाई डायन

0 अजय केशरी / 2010/08/03 1:23 pm

लूट..लूट..लूट॥ जंहा देखो वही मची है लूट । आज महंगाई बे-लगाम हो गई है, बाज़ार में मंडी में जहाँ देखो महंगाई चरम सीमा पर पहुँच गई है। इस महंगाई से

नाम गरीब का ,काम अमीर का .

नाम गरीब का ,काम अमीर का .

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/07/09 9:15 pm

वाह रे! सरकार, वाह रे! सरकारी तंत्र | सब के सब खून चूसने में लगे हैं | चूसते रहो | क्योंकि गरीब ही वह भगवान है जिसका खून उसके घर

कैसी सोंच वामपंथियों की

कैसी सोंच वामपंथियों की

0 अजय केशरी / 2010/05/27 7:17 pm

मै अजय केशरी, मेरा जन्म स्थान डुमराँव है जो की अब बक्सर जिला में पड़ता है पहले यह शाहाबाद जिला में पड़ता था, यहाँ के लोग अक्सर कमाने या मेहनत मजदूरी के

हाय हाय ये महंगाई

2 जनोक्ति डेस्क / 2009/11/26 9:47 am

इस बढ़ती हुई महंगाई ने सच में आम आदमी की कमर तोड कर रख दी . आज जमाखोखोरी ,कालाबाजारी और मुनाफाखोरी सिर्फ शब्द नहीं है, यह है व्यापार जगत की