<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज &#187; अंधेर नगरी</title>
	<atom:link href="http://www.janokti.com/category/%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%be/%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://www.janokti.com</link>
	<description>राज-समाज और जन की आवाज</description>
	<lastBuildDate>Sat, 31 Jul 2010 12:18:15 +0000</lastBuildDate>
	<language>en</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>http://wordpress.org/?v=3.0.1</generator>
<xhtml:meta xmlns:xhtml="http://www.w3.org/1999/xhtml" name="robots" content="noindex" />
		<item>
		<title>कामनवेल्थ गेम्स के निर्माण स्थलों पर बाल अधिकारों का उल्लंघन : क्राई</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/29/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/2010/07/29/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 29 Jul 2010 16:20:23 +0000</pubDate>
		<dc:creator>शिरीष खरे</dc:creator>
				<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[NREGS]]></category>
		<category><![CDATA[RTI]]></category>
		<category><![CDATA[accountability]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[controversy]]></category>
		<category><![CDATA[corruption]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[khushhal bharat]]></category>
		<category><![CDATA[market]]></category>
		<category><![CDATA[mid-day-meal]]></category>
		<category><![CDATA[naxalites]]></category>
		<category><![CDATA[people’s politics]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[social justice]]></category>
		<category><![CDATA[youth]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[बौद्धिक लोकतंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[भारतनामा]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतान्त्रिक भारत]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ग संघर्ष]]></category>
		<category><![CDATA[शासन प्रणाली]]></category>
		<category><![CDATA[संसद मार्ग]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5457</guid>
		<description><![CDATA[दिल्ली, 29 जुलाई 2010 : भारत में बाल अधिकारों के लिए सक्रिय संस्था क्राई ने कहा है कि कामनवेल्थ गेम्स के निर्माण स्थलों पर रहने वाले मजदूर परिवारों के बच्चे... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/07/29/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-medium wp-image-5463" title="comman wealth games 2010" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/comman-wealth-games-2010-300x161.jpg" alt="" width="300" height="161" />दिल्ली, 29 जुलाई 2010 : भारत में बाल अधिकारों के लिए सक्रिय संस्था क्राई ने कहा है कि कामनवेल्थ गेम्स के निर्माण स्थलों पर रहने वाले मजदूर परिवारों के बच्चे कई बुनियादी अधिकारों जैसे आवास, स्वच्छता, गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पानी, स्वास्थ्य और स्कूली शिक्षा से बेदखल हो गए हैं। क्राई ने अपने अवलोकन में पाया है कि निर्माण कार्यों से जुड़े मजदूर परिवारों के बच्चों को कई गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">यह अवलोकन ध्यानचंद्र नेशनल स्टेडियम, आरके खन्ना स्टेडियम, तालकटोरा स्टेडियम, निजामुद्दीन नाला, नेहरू रोड, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम का दौरा करके क्राई द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट और सिरी फोर्ट निर्माण स्थल से किये गए एक सेम्पल सर्वे के आधार पर किया गया है। क्राई की डायरेक्टर योगिता वर्मा कहती है कि ‘‘निर्माण कार्यो में लगे मजदूरों के बच्चे जिन अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, वहां हमने पाया कि उनके लिए न तो अच्छा भोजन है, न पीने का साफ पानी, न साफ-सफाई, न बारिश या धूप से बचने की सहूलियत, और न ही स्कूली शिक्षा या स्वास्थ्य जैसी बुनियादी अधिकार ही हैं।’’ उन्होंने आगे बताया कि ‘‘गरीबी के चलते बहुत सारे मजदूर परिवारों को अपनी-अपनी जगहों से पलायन करके दिल्ली के निर्माण स्थलों तक आना पड़ा है, नतीजन बड़ी संख्या में उनके बच्चे स्कूलों से ड्राप आउट हो गए हैं।’’</p>
<p style="text-align: justify;">हाइकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका के अनुसार, राष्ट्रमंडल खेलों के अलग-अलग निर्माण स्थलों में लगभग 4.15 लाख दिहाड़ी मजदूर काम कर रहे हैं। यहां मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम मजदूरी दी जा रही है। कुलमिलाकर, ऐसी तमाम गंभीर स्थितियों का सबसे ज्यादा खामियाजा मजदूरों के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">योगिता वर्मा के मुताबिक ‘‘बच्चों की तरफ हमारे कई संवैधानिक दायित्व हैं, कामनवेल्थ गेम्स को विश्वस्तरीय बनाने की कोशिश में इन संवैधानिक दायित्वों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है।’’</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्राई की मांग है कि :</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दिल्ली में जो कामनवेल्थ गेम्स की तैयारी चल रही है, उसमें भारत सरकार अपने देश के बच्चों के लिए संवैधानिक दायित्व और अंतराष्ट्रीय मानवीय अधिकार वचनबद्धताओं को सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रावधान बनाएं।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;"> निर्माण कार्यो से जुड़े मजदूरों और उनके बच्चों के लिए आवास, स्वच्छता, गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पानी, स्वास्थ्य और स्कूली शिक्षा जैसे बुनियादी अधिकार बहाल किये जाए।</p>
<p style="text-align: justify;"> शिक्षा के अधिकार कानून को लागू करने को लेकर सरकार अगर वाकई गंभीर है तो उसे स्कूल से होने वाली ड्राप-आउट की इस समस्या को रोकने की पहल करनी होगी। आंगनबाड़ी और मिड डे मिल जैसी योजनाओं को तत्काल प्रभाव में लाया जाए।</p>
<p style="text-align: justify;"> दिल्ली हाइकोर्ट के आदेश (11 फरवरी, 2010) अनुसार, सभी परिवारों का पुनर्वास नागरिक सुविधाओं के साथ किया जाए।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सिरी फोर्ट निर्माण स्थल से क्राई की सेम्पल स्टडी के निष्कर्ष :</strong></p>
<p style="text-align: justify;"> इस निर्माण स्थल के बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। (भारत में 6 से 14 साल तक के 80,43,889 बच्चे स्कूल से बाहर हैं।)</p>
<p style="text-align: justify;"> इस निर्माण स्थल में या इसके आसपास चाईल्डकेयर यानी बच्चे की देखभाल जैसे आंगनबाड़ी वगैरह की कोई सुविधा नहीं है।</p>
<p style="text-align: justify;"> यहां आवास की स्थितियां बहुत खराब हैं। आवासीय सामग्री के तौर पर टीन और प्लास्टिक की चादरों को उपयोग में लाया जा रहा है, जो कि सुरक्षा के लिहाज से कतई ठीक नहीं कही जा सकती हैं। आश्रय के नाम पर मजदूर परिवारों के हिस्से में 7X7 फीट की टीन की चादरों का घेरा है। परिवार में चाहे कितने भी लोग हों, उनके हिस्से में एक ही सकरा घेरा है।</p>
<p style="text-align: justify;"> यहां प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध नहीं है। शौचालय की सेवा भी लगभग न के बराबर हैं, कुछ जगहों पर मोबाइल शौचालय जरूर देखें गए हैं, जो कि साफ-सुथरे नहीं हैं।</p>
<p style="text-align: justify;"> यहां 96% मजदूर गरीबी रेखा से नीचे हैं। 36% मजदूरो को अपनी-अपनी जगहों से खेती की विफलताओं के चलते दिल्ली की ओर पलायन करना पड़ा है।</p>
<p style="text-align: justify;"> यहां 84% मजदूरों को 203 रूपए/प्रति दिन की न्यूनतम मजदूरी से भी कम मजदूरी दी जा रही है।</p>
<p style="text-align: justify;">निर्माण कार्यों से जुड़े यह मजदूर बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाके से दिल्ली आए हुए हैं। इनमें से ज्यादातर भूमिहीन मजदूर और सीमांत किसान हैं। कृषि क्षेत्र में आए संकट के चलते जिन परिवारों को पलायन करना पड़ा है, उनमें से ज्यादातर अनाज पैदा करने के लिए अप्रत्याशित वर्षा पर निर्भर रहते हैं। कई सालों से अपेक्षित वर्षा न होने से इनके सामने आजीविका का संकट गहराया है।  निर्माण कार्यों से जुड़े यह मजदूर जिन गांवों से आए हैं, उनके उन गांवों के मुकाबले दिल्ली के निर्माण स्थलों में काम करने और रहने की स्थितियां बेहद खराब हैं। यहां कानूनी सुरक्षा से लेकर मजदूरों और उनके बच्चों के अधिकारों तक का उल्लंघन खुलेआम चल रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/2010/07/29/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>देश के दीमक भ्रष्टाचारियों पर कड़ी कार्यवाही हो</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/29/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%95-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/2010/07/29/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%95-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 29 Jul 2010 15:19:42 +0000</pubDate>
		<dc:creator>अरविन्द विद्रोही</dc:creator>
				<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[AFSPA]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[NREGS]]></category>
		<category><![CDATA[RTI]]></category>
		<category><![CDATA[accountability]]></category>
		<category><![CDATA[anti terrorism]]></category>
		<category><![CDATA[bhajpa]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[class-struggle]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[controversy]]></category>
		<category><![CDATA[corruption]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[jayram viplav]]></category>
		<category><![CDATA[khushhal bharat]]></category>
		<category><![CDATA[maoist]]></category>
		<category><![CDATA[market]]></category>
		<category><![CDATA[marks]]></category>
		<category><![CDATA[mid-day-meal]]></category>
		<category><![CDATA[naxalites]]></category>
		<category><![CDATA[people's politics]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[social justice]]></category>
		<category><![CDATA[terrorism]]></category>
		<category><![CDATA[youth]]></category>
		<category><![CDATA[उग्रवाद]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[नक्सलवादी आंदोलन]]></category>
		<category><![CDATA[बौद्धिक लोकतंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[भारतनामा]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
		<category><![CDATA[माओवाद]]></category>
		<category><![CDATA[मार्क्स]]></category>
		<category><![CDATA[लाल झंडा]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतान्त्रिक भारत]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ग संघर्ष]]></category>
		<category><![CDATA[शासन प्रणाली]]></category>
		<category><![CDATA[संसद मार्ग]]></category>
		<category><![CDATA[सर्वहारा]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5441</guid>
		<description><![CDATA[ग्रामीण भारत ही असली भारत है। भारत की 80 प्रतिशत आबादी ग्रामीण अंचलों में निवास करती है तथा शेष 20 प्रतिशत आबादी भी अप्रत्यक्ष रूप से ग्राम्य जीवन से जुड़ी... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/07/29/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%95-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignleft size-medium wp-image-5444" title="black-money-and-corruption2" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/black-money-and-corruption2-300x213.jpg" alt="" width="300" height="213" />ग्रामीण भारत ही असली भारत है। भारत की 80 प्रतिशत आबादी ग्रामीण अंचलों में निवास करती है तथा शेष 20 प्रतिशत आबादी भी अप्रत्यक्ष रूप से ग्राम्य जीवन से जुड़ी है। कृषि आधारित भारत के ग्राम्य विकास की महती जिम्मेदारी केन्द्रीय ग्रामीण मंत्रालय एवं प्रदेश स्तर पर ग्राम्य विकास विभाग की है। एक लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना निचले पायदान पर खड़े नागरिक के हितों की रक्षा व पूर्ति से होती है। ग्रामीण भारत के निवासियों के अधिकारों पर खुलेआम, निर्लज्जतापूर्वक डाली जा रही डकैतियों को और अधिक बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए तमाम महत्वाकांक्षी योजनायें भारत सरकार-प्रदेश सरकार संचालित कर रहीं है ।इन योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की होती है।पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद ग्राम्य विकास विभाग में बड़ी धनराशि,ग्राम्य जीवन स्तर को उच्च स्तर पर लाने की क्रान्तिकारी योजना के तहत् आवंटित होनी प्रारम्भ हुई।यह इस धरा का दुर्भाग्य है कि यहां के खेतों की मेंड़े ही खेत को चरने लगी हैं। आज दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों में हमारा 5वां स्थान है और हमारे भ्रष्ट सरकारी कर्मियों-भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों को शर्म नहीं आ रही है।</p>
<p style="text-align: justify;">विकास कार्यों के लिए आवंटित धनराशि में बड़े पैमाने पर घोटाले की बात स्व0राजीव गाँधी -पूर्व प्रधानमंत्री से लेकर डा0 मनमोहन सिंह- प्रधानमंत्री, भारत सरकार, द्वारा स्वीकार की जा चुकी है। अभी बीते लोकसभा चुनावों में विकास के धन की लूट का मुद्दा प्रमुखता से कांग्रेस  पार्टी के राष्ट्रीय  महासचिव राहुल गाँधी ने उठाया। परिणाम स्वरूप भ्रष्टाचार से आजिज आ चुकी जनता ने जमकर कांग्रेस के प्रत्याशियों को आर्शिवाद रूपी मत देकर अपने विकास कार्यों की निगरानी के लिए,अपने हितों के रक्षार्थ अपना संसद रूपी चैकीदार चयनित करके जनहित के कार्यों को करने के लिए सर्वोच्च संस्था संसद भवन में भेजा है ।उ0प्र0 की मुखिया सुश्री मायावती ’अध्यक्ष‘बहुजन समाज पार्टी की छवि कानून व्यवस्था को नियंत्रित रखने में सफल प्रशासक के रूप में बरकरार है। मनरेगा तथा केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृत अन्य योजनाओं में उ0प्र0 सरकार की शिथिलता का आरोप कंाग्रेस के राहुल गांधी अक्सर लगाते रहते हैं। शायद इन्ही आरोपों को ईमानदारी पूर्वक संज्ञान में लेते हुए उ0प्र0सरकार की मुखिया सुश्री मायावती ने कड़े आदेशों को जारी किया है। विश्वस्त्र सूत्रों के अनुसार सर्वजन हिताय- सर्वजन सुखाय को चरितार्थ करने के लिए मायावती ने उच्च अधिकारियों को समस्त विभागों में शिकायतों,गडबड़ियों पर तत्काल प्रभावी कार्यवाही के आदेश दियें हैं। शासनादेशों का पालन न करने वालों को जो चेतावनी,प्रतिकूल प्रविष्टि व निलम्बन की कार्यवाही झेलनी पड़ रही है,वह उ0प्र0 की मुखिया सुश्री मायावती के भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम की हनक ही है। आज मनुष्य नैतिकता-सदाचरण की बातों को बकवास मानता है। यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि तमाम् धर्मस्थलों पर ये भ्रष्टाचारी-पापी माथा टेकने,अपने पाप धोने की लालसा में सबसे आगे खड़े रहते हैं। ये भ्रष्ट गण मनुष्य को ही नहीं,सर्वशक्तिमान को भी अपने मिथ्या आडम्बर से छलने का दुश्प्रयास करते रहते हैं। अपनी काली कमाई से धार्मिक स्थलों के निर्माण,धार्मिक आयोजनों में धनराशि व्यय करके ये भ्रष्टाचारी अपने को समाज में श्रेष्ठतम् रूप में स्थापित करते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">विकास के धन की लूट को रोकने के लिए इसे मुद्दा बना कर जितना अच्छा कार्य राहुल गाँधी ने किया और इसका फायदा भी कांग्रेस को मिला, अब विकास के धन की लूट करने वालों को चिन्हित कर दण्डित करने की कार्यवाही से उ0प्र0 सरकार की मुखिया सुश्री मायावती को भी निःसन्देह फायदा मिलेगा।आम जनता जन सुविधाओं की प्राप्ति के लिए भीख मांगती है और उसके हक की लूट करने वाले मौज करते हैं। प्रशासनिक दृढ़ता और शासन की स्पष्ट नीति से वर्तमान समय में भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारी-अधिकारी-जनप्रतिनिधि बौखला गयें हैं। कत्र्तव्य पालन करने में नाकाम &#8211; नाकारा व्यक्तियों का यह समूह नाना प्रकार के बहाने पेश कर रहा है। इनके भ्रमजाल व दबाव में आये बगैर प्रशासन-शासन को जनहित-राष्ट्हित के इस क्रान्तिकारी निर्णय को जारी रखना चाहिए। बेरोजगार,ईमानदार नवयुवकों की भारी संख्या इन भ्रष्ट कर्मियों के स्थान पर दायित्व निभाने के लिए तैयार खड़ी है।</p>
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/2010/07/29/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%95-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>1</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>पूरे गणतंत्र की मौत है जेठवा की मौत</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/26/%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%a0/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/2010/07/26/%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%a0/#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 26 Jul 2010 05:39:19 +0000</pubDate>
		<dc:creator>jai kumar jha</dc:creator>
				<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[AHMADABAD POLICE]]></category>
		<category><![CDATA[AMIT JETHWA]]></category>
		<category><![CDATA[LOW AND ORDER OF INDIA]]></category>
		<category><![CDATA[RTI ACTIVIST]]></category>
		<category><![CDATA[RTI LAW]]></category>
		<category><![CDATA[STATE GOVERNMENT OF GUJRAT]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5230</guid>
		<description><![CDATA[जब भी देश में एक इमानदार,सत्य,न्याय तथा देशभक्ति के साथ पारदर्शिता के लिए काम कर रहे किसी व्यक्ति को मारा जाता है तो वह उस व्यक्ति कि नहीं बल्कि पूरे... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/07/26/%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%a0/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-full wp-image-5237" title="amit jethwa rti activist" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/amit-jethwa-rti-activist.jpg" alt="" width="295" height="200" />जब भी देश में एक इमानदार,सत्य,न्याय तथा देशभक्ति के साथ पारदर्शिता के लिए काम कर रहे किसी व्यक्ति को मारा जाता है तो वह उस व्यक्ति कि नहीं बल्कि पूरे गणतंत्र,देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री कि मौत होती है |<br />
अहमदाबाद हाईकोर्ट के सामने शाम 8:30 से 8:45 के बीच दो मोटरसाइकिल सवारों के द्वारा गोली मारकर एकबार फिर एक सच्चे हिन्दुस्तानी तथा RTI कार्यकर्ता  अमित जेठवा को मार दिया गया | इस बार भी इस देशभक्त कि हत्या का आरोप देश के भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों पर है जो इसबार BJP से जुड़ा हुआ है और जिसके अवैध खनन के करतूतों को अमित जेठवा उजागर करने पे तुले हुए थे |</p>
<p style="text-align: justify;">निश्चय ही अमित जेठवा जैसे लोगो कि मौत इस देश के गणतंत्र ,राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कि मौत है | क्योंकि अमित जेठवा जैसे लोग इस देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से भी महत्वपूर्ण काम कर रहे होते हैं और ऐसे लोगो कि मौत पूरे देश के लिए शर्मनाक है | अमित जेठवा कि मौत पर देश के कर्ताधर्ता को दोषियों को पकरने के लिए वैसे ही हरकत में आना होगा जैसे किसी देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति कि मौत पर हरकत में आते हैं ,तब जाकर  ऐसे मौतों का सिलसिला रुकेगा |</p>
<p style="text-align: justify;">अमित जेठवा कि मौत से देश में पारदर्शिता व सूचना के अधिकार के कानून कि मौत एकबार फिर हुयी है | हमारा आग्रह इस देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से है कि अमित जेठवा के हत्यारे को तिन दिनों में पकड़कर सजा दी जाय या अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त को नौकरी से हटाया जाय क्योंकि इस तरह कि हत्या पुलिस अधिकारियों कि गंभीर लापरवाही से ही होते हैं और गणतंत्र रोता है  |</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/2010/07/26/%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%a0/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>महिला हॉकी कोच कौशिक के लिए अलग कानून</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/25/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%89%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%9a-%e0%a4%95%e0%a5%8c%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/2010/07/25/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%89%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%9a-%e0%a4%95%e0%a5%8c%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf/#comments</comments>
		<pubDate>Sun, 25 Jul 2010 05:37:17 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डा ० पुरुषोत्तम मीणा</dc:creator>
				<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[Hockey]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Hockey3]]></category>
		<category><![CDATA[controversy]]></category>
		<category><![CDATA[corruption]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[kaushik]]></category>
		<category><![CDATA[media]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[sex scandal]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[शासन प्रणाली]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5174</guid>
		<description><![CDATA[सवाल यह उठता है कि यदि यही आरोप महिला हॉकी टीम की खिलाडी ने हॉकी संघ के बाहर के किसी व्यक्ति पर लगाया होता, मसलन किसी दर्शक पर, क्या तब... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/07/25/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%89%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%9a-%e0%a4%95%e0%a5%8c%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong>सवाल यह उठता है कि यदि यही आरोप महिला हॉकी टीम की खिलाडी ने हॉकी संघ के बाहर के किसी व्यक्ति पर लगाया होता, मसलन किसी दर्शक पर, क्या तब भी हॉकी इण्डिया ऐसा ही करती?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">
<img class="alignright size-medium wp-image-5175" title="hockey sex scandal" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/hockey-sex-scandal-300x252.jpg" alt="" width="300" height="252" />भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 चीख चीख कर कहता है कि भारत में सभी लोगों को कानून के समझ समान समझा जायेगा और सभी लोगों को कानून का समान संरक्षण प्राप्त होगा। अनुच्छेद13 में यह भी कहा गया है कि यदि उक्त प्रावधान का उल्लंघन करने वाला या कम करने वाला कोई कानून सरकार द्वारा बनाया जाता है, तो ऐसा कानून उल्लंघन की सीमा तक शून्य माना जायेगा। इतने स्पष्ट और सख्त प्रावधान के बावजूद भी हमारे देश में लोगों से उनकी हैसियत के अनुसार अलग-अलग तरह से बर्ताव करने के लिये अलग-अलग प्रकार के कानून बनाये हुए हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">राष्ट्रीय महिला हॉकी टीम के कोच एमके कौशिक पर एक खिलाडी ने यौन उत्पीडन का आरोप लगया है, जिस पर कौशिक के विरुद्ध कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं करवाया गया है, बल्कि हॉकी इण्डिया ने इस मामले की जांच के लिए राजीव मेहता की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित कर दी है जिसमें पूर्व खिलाडी जफर इकबाल, अजीत पाल सिंह और सुदर्शन पाठक को भी शामिल किया गया है।</p>
<p style="text-align: justify;">सवाल यह उठता है कि यदि यही आरोप महिला हॉकी टीम की खिलाडी ने हॉकी संघ के बाहर के किसी व्यक्ति पर लगाया होता, मसलन किसी दर्शक पर, क्या तब भी हॉकी इण्डिया ऐसा ही करती? कर ही नहीं सकती थी, क्योंकि बाहरी किसी व्यक्ति के मामले में उसे जाँच करने का कोई हक नहीं है। यहाँ पर सवाल यह उठता है कि हॉकी इण्डिया को हॉकी से जुडे विवादों या मामलों की जाँच करने के लिये तो अपनी खेल विशेषज्ञता का उपयोग करना चाहिये, इस पर किसी को काई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन हॉकी के पूर्व खिलाडियों को आपराधिक मामलों की जाँच के लिये बनायी गयी समिति में शामिल करके उनसे उस अपराध के लिये जाँच करवाई जा रही है, जो भारतीय दण्ड संहिता में दण्डनीय अपराध है, यह किस कानून द्वारा स्वीकृत है?</p>
<p style="text-align: justify;">आश्चर्यजनक तो यह है कि देश के लोग चुपचाप मूक दर्शक बने बैठे हैं! क्या कौशिक के विरुद्ध भी भारतीय दण्ड संहिता के तहत आपराधिक मामला दर्ज नहीं होना चाहिये? यदि पुलिस द्वारा जाँच की जाती है, तो कौशिक की गिरफ्तारी भी सम्भव है, जबकि विभागीय जाँच में मामले को कुछ सुनवाईयों के बाद रफा दफा कर दिया जायेगा, जेसा कि हमेशा से होता आ रहा है। केवल हॉकी की ही बात नहीं है, प्रत्येक सरकारी विभाग में भी इसी प्रकार से उन सभी मामलों में जो आपराधिक प्रकृति के हैं और जिनमें भारतीय दण्ड संहिता के तहत कठोर कारावास की सजा का प्रावधान है, सभी को विभागीय जाँच के नाम पर आपसी गठजोड के जरिये रफा दफा कर दिया जाता है। विभाग की ओर से दबाव डालकर अधिकतर मामलों में तो शिकायतकर्ता को प्रकरण को वापस लेने के लिये ही विवश कर दिया जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 13 की सरेआम धज्जियाँ उडाई जा रही हैं। लोक सेवक जो जनता के नौकर हैं, लोक सेवक से लोक स्वामी बन बैठे हैं। सबसे बडा आश्चर्य तो यह है कि न्यायपालिका के अन्दर भी इस प्रकार के मामलों में आपराधिक मुकदमें दायर करने के बजाय, विभागीय जाँच का ही सहारा लिया जाता है। जिन लोगों को इस प्रकार की नाइंसाफी एवं भेदभाव से जरा भी पीडा हो रही हो, या जिन्हें अपने नौकरों की कारगुजारियों को रोकने की जरा सी भी इच्छा हो, उन्हें चाहिये कि इस प्रकार के मामलों को अपने राज्य के उच्च न्यायालय में या सर्वोच्च न्यायलय में याचिका दायर करके संविधान के (क्रमशः) अनुच्छे 226 एवं 32 के तहत चुनौती दें</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/2010/07/25/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%89%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%9a-%e0%a4%95%e0%a5%8c%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>1</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>यूपी के जेलों में बह रही भ्रष्टाचार की  गंगा</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/24/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%8d/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/2010/07/24/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%8d/#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 24 Jul 2010 13:17:10 +0000</pubDate>
		<dc:creator>रोहित गुप्ता</dc:creator>
				<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5132</guid>
		<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश को बारे में कोई कुछ जानता हो या ना जानता हो लेकिन हर किसी को इतना अवश्य ही मालूम है कि प्रदेश में की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/07/24/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%8d/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-full wp-image-5138" title="central jail" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/central-jail.jpg" alt="" width="300" height="355" />उत्तर प्रदेश को बारे में कोई कुछ जानता हो या ना जानता हो लेकिन हर किसी को इतना अवश्य ही मालूम है कि प्रदेश में की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचा अपराधियों के आगे पूरी तरह से पस्त हो चुका है। नियम कानून की धज्जियां उड़ाते अपराधियों को पकड़कर रखने के लिये बनाई गई जेलें भी अब भ्रष्टाचार के दलदल में धंस चुकी हैं। जेलों में पैर पसार चुके भ्रष्टाचार ने प्रशासनिक और पुलिसिया दोनो ही स्तरों पर खुद को इस कदर हावी कर लिया है कि डिप्टी जेलर द्वारा बार बार की जा रही निगरानी और दौरों के बावजूद यदा कदा किसी ना किसी जेल से कैदियों की फौज भागने में कामयाब हो ही जाती है।</p>
<p style="text-align: justify;">दो दिन पहले उत्तर प्रदेश के मेरठ जेल से फरार हुये 9 कैदियों ने प्रदेश में कानून का डंका पीट रहे हमारे सिपहसालारों के सभी दावों को जंमीदोज़ कर दिया। प्रदेश के इतिहास में एक साथ नौ कैदियों के भागने की घटना कभी नहीं हुई थी। लेकिन जेलों में बह रही भ्रष्टाचार की वैतरणी में नियम और कानून बुरी तरह डूब चुके हैं। इससे पहले 2002 में लखनऊ जिला जेल से 7 कैदी फरार हुये थे। दो महीने पहले लखनऊ की नई जेल से एक कैदी खिड़की तोड़ जेल के मुख्य द्वार तक पहुंच गया था। जिस घटना से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया था।</p>
<p style="text-align: justify;">कैदियों के भागने की घटनाओं की बड़ी वजह यह रही है कि हर बार जब भी इस तरह की घटनायें होती है उसके बाद संबधित जेल के जेलर के विरूद्ध कोई भी सख्त कार्यवाई नहीं होती है। कैदियों के बागने के बाद कुछ दिनों तक सिर्फ मामले की लीपापोती के प्रयास किये जाते हैं। जिसके बाद स्थिति फिर से पहले जैसी हो जाती है। हर रोज ही अखबारों में किसी ना किसी जेल में डाले गये छापे में हथियार व ऐशो-आराम के समान बरामद होने की खबरें दिखाई देती हैं। राज्य की सर्वाधिक भ्रष्ट जेलों में लखनऊ, मेरठ, गाजियाबाद, आगरा, अलीगढ़, बनारस, गोंडा, बुलंदशहर, सहारनपुर, जालौन, नैनी, गोरखपुर, सुल्तानपुर जैसी जिला जेल शामिल हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">मेरठ के डिप्टी जेलर डी के वाजपेयी इस मामले में कई बार आरोपों के घेरे में आ चुके हैं। इनके खिलाफ  बरेली, मुजफ्फरपुर जैसी कई जिला जेलों में किये गये घोटाले की जांच चल रही है। वाजपेयी पर जेल के राशन बेचने जैसे कृत्यों का भी आरोप है। इसके अलावा प्रदेश की जेलों में बंद बडे़-बड़े माफियाओं ने जेलों को अपनी शरणस्थली बना लिया है। इसी क्रम में लखनऊ जेल का नाम बी शामिल रहा है जहां के जेलर रिजवी बी दागदार छवि के जेलर रहे हैं। इनपर तमाम तरह के भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ जेल के राशन को काले तरीके से बेचे जाने का आरोप लग चुका है।</p>
<p style="text-align: justify;">सवाल यह है कि व्यवस्था के दावों को लात मारकर आखिर कैसे कैदी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे पाते हैं। जेल प्रशासन की मिली भगत के बिना इस तरह के मामले हो ही नही सकते। यदि व्यव्स्था वास्तव में सुदृढ़ होगी तभी सही मायने में कानून जीवित रह पायेगा अन्यथा जेलों में बढ़ रहे जंगलराज के आगे कानून के पास सिर्फ मुंह ताकने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/2010/07/24/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%8d/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>किसान विरोधी है भूमि अधिग्रहण अधिनियम</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/24/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf-%e0%a4%85/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/2010/07/24/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf-%e0%a4%85/#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 24 Jul 2010 03:40:32 +0000</pubDate>
		<dc:creator>अरविन्द विद्रोही</dc:creator>
				<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[class-struggle]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[naxalites]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[कृषि]]></category>
		<category><![CDATA[गरीबी]]></category>
		<category><![CDATA[नौकरशाही]]></category>
		<category><![CDATA[भूमि अधिग्रहण अधिनियम]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
		<category><![CDATA[मजदूर-किसान]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतान्त्रिक भारत]]></category>
		<category><![CDATA[सरकार]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5091</guid>
		<description><![CDATA[आजादी के 62 वर्षों बाद भी भारत का आम नागरिक,मजदूर-किसान अपने ही नेतृत्व तथा अपने ही द्वारा चुनी गई सरकारों के मनमाने पूर्ण रवैये का शिकार होकर बद से बदतर... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/07/24/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf-%e0%a4%85/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-full wp-image-5092" title="bhumi adhigrahan kanun , sez" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/bhumi-adhigrahan-kanun-sez.jpg" alt="" width="353" height="239" />आजादी के 62 वर्षों बाद भी भारत का आम नागरिक,मजदूर-किसान अपने ही नेतृत्व तथा अपने ही द्वारा चुनी गई सरकारों के मनमाने पूर्ण रवैये का शिकार होकर बद से बदतर स्थिति में जीने को विवश है।विकास की अंधाधुंध दौड़ में किसानों की भूमि को अधिग्रहीत करके उन्हें भूमिहीन बनाने व पूंजीवाद का शिकार बनाने में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है।राष्टपिता महात्मा गाँधी के सत्याग्रह आन्दोलन से ब्रितानिया हुकूमत की नींद हराम हो गई थी,क्रान्तिकारी विचारधारा के वाहकों ने भारत माता की गुलामी की बेडियां काटने में अपना सर्वस्व न्यौछावर किया।भारत-भूमि ब्रितानिया हुकूमत से,साम्राज्यवादी सोच से आजाद तो हो गई परन्तु अफसोस अंग्रेज परस्त काले-भूरे शासकों ने भारत के आम जनों का शोषण-उत्पीड़न बदस्तूर जारी रखा है।आम जन आज भी नौकरशाही के चक्रव्यूह में फंसा हुआ अपना दम तोड़ने को विवश है।भ्रष्टाचार को जीवन का अनिवार्य-आवश्यक अंग बना चुके तमाम नेताओं-नौकरशाहों ने जन विरोधी कृत्यों को करना बदस्तूर जारी रखा है। उ0प्र0 की राजधानी लखनउ से सटे जनपद बाराबंकी की तहसील फतेहपुर के पचघरा में उपमण्डी स्थल निर्माण के लिए किसानों की बेशकीमती उपजाउ कृषि भूमि का मनमाना अधिग्रहण आम जन विरोधी,किसान हित विरोधी सोच का ज्वलंत उदाहरण है।किसान जिस संगठन से जुडे रहे उसके नेतृत्व ने ही उनका साथ छोड़ दिया,उनके साथ विश्वासघात किया,प्रशासन के पैरोकार बनकर किसानों के धरने को बिना उनकी सहमति के खत्म करने की घोषणा कर दी।लेकिन किसान अब भी अपनी कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण के विरोध में सत्याग्रह कर रहे। है।।अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए पचघरा के किसानों ने अब अपने खेत पर धरना देते रहने के बजाए विभिन्न संगठनों से सम्पर्क कर के संघर्ष में सहयोग मांगा है।भूमि अधिग्रहण से पीड़ित किसान अब अपने गाँव ,खेत,खलिहान से अपने हक को वापस लेने के लिए निकल पड़े हैं।नेतृत्व के छल व नौकरशाही के मनमाने पूर्ण रवैये के शिकार पचघरा के पीड़ित किसानों के दिलों में गुबार भरा है।अपनी ही भूमि पर सरकारी कब्जे की आशंका से ये किसान आक्रोशित है।।इन बेबस,छल के शिकार किसानों के दिलो-दिमाग में आग सुलग रही है।किसानों के इस संघर्ष मे। जनपद के तमाम किसान नेताओं व संगठनों ने अपना समर्थन दे दिया है।पचघरा के किसानों के द्वारा लड़ी जा रही हक की लड़ाई जन-संघर्ष में बदलती जा रही है। युग दृष्टा सरदार भगत सिंह जिन मजदूरों-किसानों को भारत की,क्रान्ति की वास्तविक शक्ति मानते थे,जिनकी तरक्की से ही वो भारत की तरक्की की कल्पना करते थे,आज वो मजदूर-किसान अपने हक से वंचित हैं।विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए मनमाने पूर्ण तरीके से अन्नदाता की जमीनों का अधिग्रहण करके विकास के नाम पर गरीब किसानों की आजादी पर,उनके अधिकारों पर हमला बोलना जारी है।यह हमारा अपना दुर्भाग्य है कि जो कानून ब्रितानिया हुकूमत ने वर्ष 1894 में ‘‘भूमि अधिग्रहण अधिनियम,1894‘‘पारित किया था,वर्ष 1947 में आजादी मिलने के बाद भी भारत सरकार ने किसान हित विरोधी इसी भूमि अधिग्रहण अधिनियम,1894 को अंगीकार किया।भारत की ग्राम्य व्यवस्था को खस्ताहाल करने के घृणित उद्देश्य से बनाये गये इस भूमि अधिग्रहण अधिनियम,1894 में आजादी के बाद कुछ संशोधन भी किये गये परन्तु किसानों की भूमि का मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया वही बनी रही।ब्रितानिया हुकूमत का यह काला कानून आज भी अन्नदाता की छाती पर मूंग दरने का कार्य कर रहा है।मुआवजे के निर्धारण के तौर-तरीके,मापदण्ड़ तथा प्रशासनिक कार्यशैली अब तो ब्रितानिया हुकूमत को भी मात देने लगी है।किसान अपनी भूमि नहीं देना चाहते हैं तो भी सार्वजनिक उद्देश्य व विकास के नाम पर कृषि भूमि का अधिग्रहण लोकतन्त्र को भयावह राह पर ले जाने वाला साबित होगा।आज किसानों की भूमि तरक्की व विकास का वास्ता देकर हड़पने की साजिश को समझने की जरूरत है। कृषि योग्य उपजाउ भूमि पर उपमण्ड़ी स्थल निर्माण से विकास का दावा करने वालों को यह समझना होगा कि यदि किसानों की भूमि मनमाने तरीके से शासन सत्ता के बल व नेतृत्व द्वारा विश्वासघात के कारण ले ली जाती है,तो वर्तमान शासकीय व्यवस्था के खिलाफ इनके मन में जो बीज रोपित हो गया है,वो कालांतर में कितना बड़ा वट वृक्ष बनेगा।किसी तरह मेहनत मशक्कत करके,कड़ी दोपहरी में,भीषण सर्दी व बरसात में सपरिवार अपने परिवार व समाज का उदर-पोषण करने वाले इन गरीब,बेबस पचघरा के किसानों के जीवन स्तर को यदि सरकारें सुधार नहीं सकती तो इनसे इनकी अपनी भूमि जबरन अधिग्रहीत करने का हक भी सरकारों को नहीं है।पीड़ित किसानों ने अपना संगठन ‘‘पचघरा भूमि अधिग्रहण विरोधी मोर्चा‘‘ गठित करके अपने हक एवं जनअधिकारों की रक्षा का संकल्प ले लिया है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह का साफ कहना था कि,‘‘देश की तरक्की का रास्ता खेत व खलिहान से होकर गुजरता है।‘‘आज किसानों के खेत पर सरकारों की कुदृष्टि पड़ चुकी है।बंजर जमीन को कृषि योग्य बनाने के नाम पर लाखों नहीं करोंड़ों व्यय करने वाली सरकारें कंक्रीट के जंगल को तैयार करने के लिए कृषि भूमि का चयन करके जनता के पैसों की बर्बादी कर रहीं हैं।विकास के नाम पर बनने वाली इमारतों का निर्माण बंजर भूमि पर,सरकारी भूमि पर होना चाहिए।दबंगों व भूमाफियाओं के कब्जे की सरकारी जमीन पर कब्जा लेने में नाकाम प्रशासन अपनी सारी ताकत पूरे देश-समाज का उदर पोषण करने वाले अन्नदाता किसानों को धमकाने-लठियाने व ऐन केन प्रकारेण उनकी भूमि पर इमारतों को बनाने में लगा देता है।विकास के धन की लूट व बन्दरबाट के फेर में देश को ज्वालामुखी के मुहाने पर ले जाने का कार्य भ्रष्टाचार में लिप्त शासन के जिम्मेदारों द्वारा किया जा रहा है।सादगी की प्रतिमूर्ति,ईमानदारी के प्रतीक लाल बहादुर शास्त्री ने देश की सीमा पर तैनात जवान और मेहनतकश किसान के सम्मान में ही ‘‘जय जवान-जय किसान‘‘ का उदघोष किया था।औद्योगीकरण के भयावह खतरों को समझते हुए ही महात्मा गाँधी स्वदेशी,स्वावलम्बन व पुरातन ग्राम्य संरचना की स्थापना पर बल देते थे।डा0 राममनोहर लोहिया ने समाजवादी परिवर्तन को सफल बनाने के लिए जेल,वोट और फावड़ा,इन तीन संघर्षों पर विशेष बल दिया था।डा0 लोहिया की सोच जेल,वोट और फावड़े में फावड़े का मूल अर्थ समाज के आखिरी आदमी के चेहरे पर आत्मविश्वास की चमक पैदा करना है।समस्त संघर्ष के आक्रोश को रचनात्मक उत्सर्ग के लिए तत्पर रहने की इच्छा शक्ति पैदा करना अनिवार्य मानते थे-डा0 लोहिया। गाँधी के सच्चे अनुयायी डा0लोहिया तात्कालिक अन्याय का पुरजोर विरोध करते थे और चाहते थे कि उनके लोग भी करे।।आज पचघरा के इन संघर्षरत् किसानों के साथ हो रहे अन्याय,उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष की अगुआई करने यदि डा0लोहिया जीवित होते तो अब तक पहुँच गये होते।आज पचघरा के किसान डा0लोहिया के सिद्धान्त को मानते हुए अन्याय के खिलाफ प्रतिकार कर रहें हैं। लोहिया के लोगों को खामोशी तोड़कर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ संघर्ष करना चाहिए।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/2010/07/24/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf-%e0%a4%85/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>2</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>ये क्या हो रहा है ममता दीदी ?</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/22/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a5%80/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/2010/07/22/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a5%80/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 22 Jul 2010 14:55:50 +0000</pubDate>
		<dc:creator>पियूष कुमार द्विवेदी</dc:creator>
				<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[अंग्रेजी]]></category>
		<category><![CDATA[पं. बंगाल]]></category>
		<category><![CDATA[रेल दुर्घटना]]></category>
		<category><![CDATA[रेल मन्त्री، ममता बनर्जी]]></category>
		<category><![CDATA[रेल हादसों]]></category>
		<category><![CDATA[रेलवे संचालन]]></category>
		<category><![CDATA[रेलवे सुरक्षा]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5057</guid>
		<description><![CDATA[एक के बाद एक हो रहे रेल हादसों ने मन को व्यथित कर दिया है ! रेलमंत्री जी इस सवाल पर बिना कोइ जवाब दिए निकल जा रही हैं !... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/07/22/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a5%80/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignleft size-medium wp-image-5066" title="train accident" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/train-accident1-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" />एक के बाद एक हो रहे रेल हादसों ने मन को व्यथित कर दिया है ! रेलमंत्री जी इस सवाल पर बिना कोइ जवाब दिए निकल जा रही हैं ! अगर यही हाल रहा तो कुछ दिन में लोग ट्रेन से सफ़र करना छोड़ देंगे ! ये रेल हादसे कोइ इत्तेफाक नहीं हैं ! इन हादसों के पीछे बुनियादी कारण हैं &#8230;&#8230;जागरण में छपी एक खबर के अनुसार रेलवे विभाग ड्राईवरों कि कमी झेल रहा है ! रेलवे विभाग में ड्राईवरों के ७६००० पद स्वीकृत हैं लेकीन अभी अत्यावश्यक ६२३२० पदों से ही काम चलाया जा रहा है, १३६८० पद अभी भी खाली हैं ! बात सिर्फ ड्राईवरों तक ही हो तब न इनके अलावा रेलवे के अन्य  महकमो में भी रिक्त पदों की भरमार है ! रेलवे के १६ जोनो में इस समय कुल 1,68,१०९ कर्मचारियों के पद रिक्त हैं ! सर्वाधिक १९०१३ पद उत्तर रेलवेमें रिक्त हैं ! पूर्व मध्य रेलवे १७०४२ पदों का अभाव झेल रहा है ! पूर्व रेलवे में १२७३३ कर्मचारियों कि कमी है और पिछले साल दुर्घटनाओं का गढ़ रहे उत्तर मध् रेलवे ९०४५ कर्मचारी पद रिक्त हैं ! किसी भी विभाग की रीढ़ होते हैं उसके कर्मचारी, रेलवे जैसे विभाग के लिए तो विशेषकर जिसके ऊपर प्रतिदिन लाखों करोड़ों  लोगों को उनके स्थान से सही-सलामत उनकी मंजिल तक पहुँचाने कि जिम्मेदारी है ! ऐसे अत्यंत संवेदनशील विभाग के पास तो जरुरत से थोड़े ज्यादा ही कर्मचारी होने चाहिए जिससे हर कर्मचारी को पूरा आराम मिल सके और वो तरोताजा होके अपना काम करे रेलवे में ड्राईवरों के लिए नियम भी है कि जरुरत से ३०% अधीक ड्राईवर रखे जाएँ पर यहाँ तो आंकड़ा ही दूसरा है ! जिस {रेल} विभाग में कर्मचारियों कि यह दशा होगी वहां हादसे नहीं होंगे तो क्या होगा शायद यही कारण है कि माननीय रेलमंत्री जी हादसों के ऊपर सवाल पूछे जाने पर बिना कोइ जवाब दिए चली जाती हैं ! कोइ जवाब हो तब न दे जनता के सामने इस मामले में वो निरुत्तर हैं ! मगर इस तरह चुप्पी साधने से कुछ नहीं होने वाला उन्हें इस मामले में अपनी विफलता को स्वीकार करना चाहिए और इस समस्या का समाधान &#8230;&#8230;&#8230;.अन्यथा क्या अर्थ है रेलमंत्री के होने का</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/2010/07/22/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a5%80/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>रेल दुर्घटना का जिम्मेदार अंग्रेजी भी &#8230;</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/19/%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%98%e0%a4%9f%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a4%be/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/2010/07/19/%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%98%e0%a4%9f%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a4%be/#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 19 Jul 2010 16:24:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डा ० पुरुषोत्तम मीणा</dc:creator>
				<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[अंग्रेजी]]></category>
		<category><![CDATA[पं. बंगाल]]></category>
		<category><![CDATA[रेल दुर्घटना]]></category>
		<category><![CDATA[रेल मन्त्री، ममता बनर्जी]]></category>
		<category><![CDATA[रेलवे संचालन]]></category>
		<category><![CDATA[रेलवे सुरक्षा]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=4921</guid>
		<description><![CDATA[यह तभी सम्भव है, जब मंत्रीजी रेलवे सुरक्षा एवं रेलवे संचालन से जुडे प्रावधानों को अंग्रेजी में बनाकर, अंग्रेजी नहीं जानने वालों पर जबरन थोपने वाले असली गुनेहगारों को भी सजा... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/07/19/%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%98%e0%a4%9f%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a4%be/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<blockquote>
<p style="text-align: justify;"><span style="color: #0000ff;"><img class="alignright size-medium wp-image-4925" title="train accident" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/train-accident-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" />यह तभी सम्भव है, जब मंत्रीजी रेलवे सुरक्षा एवं रेलवे संचालन से जुडे प्रावधानों को अंग्रेजी में बनाकर, अंग्रेजी नहीं जानने वालों पर जबरन थोपने वाले असली गुनेहगारों को भी सजा देनी की हिम्मत जुटा पायें, अन्यथा होगा ये कि आप रेल दुर्घटना को बचाने के पुरस्कार में मृतकों के परिजनों को रेलवे में नौकरी देंगी और आगे चलकर अंग्रेजी कानूनों का उल्लंघन करने पर, ऐसी अनुकम्पा के आधार पर भर्ती हुए रेलकर्मियों को कोई रेल अधिकारी नौकरी से निकाल देगा। आजाद भारत में इससे बढकर शर्मनाक कुछ भी नहीं हो सकता। वाह क्या नियम हैं?</span></p>
</blockquote>
<p style="text-align: justify;">रेल दुर्घटना होने के बाद राजनैतिक पार्टियों की ओर से रेल मन्त्री ममता बनर्जी पर आरोप है कि उनको पं. बंगाल के मुख्यमन्त्री की कुर्सी पर बैठने की इतनी जल्दी है कि उन्हें रेल मन्त्रालय संभालने की फुर्सत ही नहीं है। ममता जी पूर्व में भी अटल जी के नेतृत्व वाली सरकार में रेल मंत्री रह चुकी हैं। इसलिए, यह तो नहीं माना जा सकता कि वे नयी हैं और उनको रेलवे दुर्घटनाएं क्यों होती हैं, इस बारे में जानकारी नहीं होगी। सधी बात यह है कि रेल मंत्री काले अंग्रेज अफसरों के चंगुल से बाहर निकल कर देखें, तो पता चलेगा कि रेलवे के हालात कितने खराब हैं और इन खराब हालातों के लिये कौन जिम्मेदार हैं? ममता जी! रेलवे मंत्रालय में बेशक आपने एक ईमानदार रेल मंत्री की छवि बनायी है, परन्तु आपके आसपास के वातानुकूलित कक्षों में विराजमान काले अंग्रेजों ने भारतीय रेल की कैसी दुर्दशा कर रखी है, जरा इस पर भी तो गौर कीजिये। आपको पता करना चाहिये कि रेलवे की दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी निर्धारित करने वाले उध रेल अधिकारी क्या कभी, किसी भी जांच में दुर्घटनाओं के लिये जिम्मेदार नहीं ठहराये जाते? आप पायेंगी कि भारतीय रेलवे के इतिहास में किसी अपवाद को छोड दिया जाये तो दुर्घटनाओं के सम्बन्ध में रेलवे के सारे के सारे अफसर दूध के धुले हैं। वे कभी भी ऐसा कुछ नहीं करते कि उनकी वजह से रेल दुर्घटना होती हों।</p>
<p style="text-align: justify;">रेल दुर्घटनाओं के लिये तो हर बार निचले स्तर के छोटे कर्मचारियों ही जिम्मेदार ठहराये जाते रहे हैं। इनमें भी प्वाइंट्‌समैन, कांटेवाला, कैबिन मैन, स्टेशन मास्टर, गार्ड, चालक, सह चालक आदि कम पढे लिखे और कम वेतन पाने वाले, किन्तु रात-दिन रेलवे की सेवा करने वाले लोग शामिल होते हैं। बेशक, इनमें से अनेक ग्रेजुएट भी होते हैं, लेकिन ग्रेजुएट होकर भी निचले स्तर पर ये लोग इसलिये नौकरी कर रहे होते हैं, क्योंकि उन्होंने किसी सरकारी स्कू ल में हिन्दी माध्यम से शिक्षा प्राप्त की हुई होती है और ग्रामीण परिवेश तथा गरीबी के चलते वे अंग्रेजी सीखने से वंचित रह जाते हैं, जिसके चलते संघ लोक सेवा आयोग में अनिवार्य अंग्रेजी विषय को उत्तीर्ण करना इनके लिये असम्भव होता है। ऐसे कर्मचारियों को रेलवे में, रेलवे संचालन से जुडे सारे के सारे नियम-कानून और प्रावधान केवल अंग्रेजी में पढ एवं समझकर लागू करने को बाध्य किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">जो लोग अंग्रेजी को ठीक से पढ नहीं सकते, उनके लिये यह सब असम्भव होता है, जिसके चलते अंग्रेजी में लिखे रेल परिचालन के प्रावधानों-नियमों का उल्लंघन होना स्वाभाविक है। जिसका दुखद दुष्परिणाम रेल दुर्घटना होता है।</p>
<p style="text-align: justify;">हर दुर्घटना की हर बार स्तरीय जांच होती है। जांच रिपोर्ट में दुर्घटना के कारणों एवं भविष्य में उनके निवारण के अनेक नये-नये तरीके सुझाये जाते हैं, परन्तु ये सारी की सारी रिपोर्ट केवल अंग्रेजी में ही बनाई जाती हैं, जिनके हिन्दी अनुवाद तक की आवश्यकता नहीं समझी जाती है, जबकि सुझाए जाने वाले सारे नियम-कानूनों और उपायों को निचले स्तर पर ही अंग्रेजी नहीं जानने वाले रेलकर्मियों को लागू करना होता है। ऐसे में इन जांच रिपोटोर्ं और रेल संरक्षा से जुडे नये-नये उपायों का तब तक कोई औचित्य नहीं है, जब तक कि रेल संचालन से जुडा हर एक नियम उस भाषा में नहीं बने, जिस भाषा को निचले स्तर का रेलकर्मी ठीक से पढने और समझने में सक्षम हो। बेशक वह भाषा गुजराती, मराठी, पंजाबी, तेलगू, कन्नड, हिन्दी या अन्य कोई सी भी क्षेत्रीय भाषा क्यों न हो। देश के लोगों की जानमाल की सुरक्षा से बढकर कुछ भी नहीं है।</p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन यह तभी सम्भव है, जब मंत्रीजी रेलवे संरक्षा एवं रेलवे संचालन से जुडे प्रावधानों को अंग्रेजी में बनाकर, अंग्रेजी नहीं जानने वालों पर जबरन थोपने वाले असली गुनेहगारों को भी सजा देनी की हिम्मत जुटा पायें, अन्यथा होगा ये कि आप रेल दुर्घटना को बचाने के पुरस्कार में मृतकों के परिजनों को रेलवे में नौकरी देंगी और आगे चलकर अंग्रेजी कानूनों का उल्लंघन करने पर, ऐसी अनुकम्पा के आधार पर भर्ती हुए रेलकर्मियों को कोई रेल अधिकारी नौकरी से निकाल देगा। आजाद भारत में इससे बढकर शर्मनाक कुछ भी नहीं हो सकता। वाह क्या नियम हैं?</p>
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/2010/07/19/%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%98%e0%a4%9f%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a4%be/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>4</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>बारिश में बह रहा कॉमन लोगों का वेल्थ</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/19/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%8b/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/2010/07/19/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%8b/#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 19 Jul 2010 13:59:44 +0000</pubDate>
		<dc:creator>विकास कुमार</dc:creator>
				<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली، गेम، तैयारी]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=4835</guid>
		<description><![CDATA[पिछले कुछ समय से दिल्ली को दुलहन की तरह सजाया जा रहा है &#124; अगामी गेम रूपी बारात के लिए साज.सज्जा का काम कछुआ चाल से ही सही लेकिन चल... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/07/19/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%8b/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-full wp-image-4914" title="2010-Commonwealth-Games" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/2010-Commonwealth-Games.png" alt="" width="257" height="353" />पिछले कुछ समय से दिल्ली को दुलहन की तरह सजाया जा रहा है | अगामी गेम रूपी बारात के लिए साज.सज्जा का काम कछुआ चाल से ही सही लेकिन चल तो रहा ही है | कितने सारे पैसे लग रहे हैं इन तैयारियों में इसका कोई ठीक.ठीक हिसाब नहीं है | वैसे भी काम के बीच में पैसे का हिसाब कौन रखे ? हिसाब.किताब तो आयोजन के बाद की चीज है | तब की तब देखी जाएगी , अभी तो पूरा सरकारी अमला काम करने में लगा है, कहीं से भी कोई कसर नहीं छोड़ी है !</p>
<p style="text-align: justify;">गरीब को गरीब ही रहने दिया |इन बेचारों ने भी गेम तक चुप ही रहना ठीक समझा है | बेघर को दिल्ली से ही बाहर कर दिया |  कुत्ते तक को दिल्ली से बाहर भेजने की योजना बन गई | पैसे को पानी की तरह बहाया जा रहा है | दिल्ली की आम कही जाने वाली जनता  भी इन तैयारियों में आने वाले खर्च के बोझ को चुप.चाप उठा रही है |</p>
<p style="text-align: justify;">इस बीच अफसरान लगातार अपनी बड़ी-बड़ी एसी गाडियों से इन तैयारियों का जायजा लेते रहते हैं  और सारी तैयारी वक्त से पहले पूरा कर लेने का भरोसा भी देते रहते हैं  |</p>
<p style="text-align: justify;">इस भरोसे को सुनते और पचाते हुए देश का मीडिया भी इस शादी में शामिल होन के लिए बेचैन सा होता दिख रहा है  | कुछ अखबारों ने बारातियों को सही होटल और सही बस रूट की जानकारी देने के लिए किताब भी छापनी शुरु कर दी है | टीवी वालों ने अपने.अपने चैनल पर शहनाई की सुरीली तान छेड़ दी और शेरा का एनिमेशन नचाना शुरु कर दिया है |</p>
<p style="text-align: justify;">हम यानि आम दिल्ली वाले भी सरी परेशानियों को पीछे धकेलते हुए बारात देखने के लिए तैयार होने लगे हैं और  कुछ लोगों ने तो अपने खर्च में कटौती कर के टिकट भी ले लिए हैं |</p>
<p style="text-align: justify;">आने वाले मेहमानों से आटो-टैक्सी ड्राइवरों को कैसे बतियाना चाहिए, कितना किराया लेना चाहिए , इसके लिए ट्रेंनिग भी शुरु हो गई | ये अलग बात है किए आज तक दिल्ली वालों से आटो-टैक्सी वालों को बतियाने का ढ़ंग नहीं सिखाया |  अभी कुछ दिन पहले तक सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था | सड़कें नई न होते हुए भी नईं लगने लगी थीं | लेकिन इस मौनसून की घंटे भर की बारिश ने सब किया धरा बेकार कर दिया |अब तक जितनी मेहनत हुई उस सब पर इस कलमुँही ने पानी बहा दिया| बुरा हो इस बारिश का जिसने हमारे मेहनती अफसर और ईमानदार नेताओं को मुहं छिपाने पर मजबूर कर दिया | ओले पड़े इस बारिश के सर जिसने दुलहन की तरह तैयार हो रही हमारी दिल्ली का सारा मेकअप कुछ ही घंटो में उतार दिया और नई नवेली दुलहन को विधवा जैसा बना दिया |</p>
<p style="text-align: justify;">अब जब ऐसा हो गया तो सब के सब सरकार, आफिसर और करमाड़ी साहब के पीछे पड़ गए| ये बेचारे भी क्या करें !  एक तो चारो तरफ इतना काम पसरा है, समय करीब आने से जल्दी से जल्दी काम खत्म करने का दबाव  है, सो अलग |  हो सकता है कि इसी जल्दीबाजी की वजह से ये लोग भूल गए होंगे कि जून के महीनें बारिश भी आनी है | बेशक ऐसा ही हुआ होगा अगर इन धुरंधरों को इस बात का तनिक भी आभास होता कि ऐसा कुछ होने वाला है तो वो पूरी दिल्ली के ऊपर एक &#8220;बारिश रक्षा कवच &#8220;जैसा कुछ बनावा देते |  अगर देश में नहीं बन पाता तो विदेश से मंगवा लेते फिर उस कवक्ष को विदेश से आए खास तरह के बांस की मदद से पूरी दिल्ली के ऊपर टांग दिया जाता| ठीक वैसे ही जैसे गांव में शादी के मौके पर तिरपाल या सामियाना ताना जाता है |</p>
<p style="text-align: justify;">फिर इसी कवच के अंदर ही सारी तैयारियां आराम.आराम से धीरे.धीरे सितंबर या फिर अकतुबर तक चलती रहतीं| गेम के दौरान भी यह कवच  वैसे के वैसे ही लगा रहता ताकि गेम के दौरान भी बारिश की एक  बूंद भी दिल्ली की जमीन पर नहीं गिरती !</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">खैर, जो हुआ सो हुआ, जो कुछ धुल गया टुट गया उसे दुबारा खड़ा कर लिया जाएगा ! हम मेहनती लोग हैं, जो ठान लेते हैं उसे किसी भी कीमत पर पूरा करते हैं,  सो इस गेम को भी पूरा होना ही पड़ेगा ! क्या होगा कुछ पैसे और खर्च करने होंगे ! थोड़ी सी ज्यादा मेहनत करनी होगी |  जब सरकारी खजाने का मुहं खुला हुआ है तो फिकर काहे का ?</p>
<p style="text-align: justify;">वैसे ये कवच वाला आईडिया वाकई दमदार है| इस बारे में आयोजन समीति को विचार करना चाहिए| हो सके तो आगे कि धुलाई और जग हंसाई से बचने के लिए हरकत में आते हुए इसका इंतजाम करवा कर जल्दी से जल्दी दिल्ली को कवर कर देना चाहिए |</p>
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/2010/07/19/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%8b/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>कुछ करो पवार साहब !</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/18/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%ac/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/2010/07/18/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%ac/#comments</comments>
		<pubDate>Sun, 18 Jul 2010 09:48:59 +0000</pubDate>
		<dc:creator>नवीन देवांगन</dc:creator>
				<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[class-struggle]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[naxalites]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[उड़ीसा]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[कृषि मंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[गरीबी]]></category>
		<category><![CDATA[गरीबी रेखा]]></category>
		<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[पश्चिम बंगाल]]></category>
		<category><![CDATA[बिहार]]></category>
		<category><![CDATA[भारत सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[भूख]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[रोटी]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदुस्तान]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=4848</guid>
		<description><![CDATA[हिंदुस्तान को किसी ज़माने में सोने की चिड़िया कहा जाता था ऐसा अक्सर हम बचपन से सुनते आए है और किताबों में भी पढ़ते आए है पर आज के हिंदुस्तान... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/07/18/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%ac/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong><img class="alignright size-medium wp-image-4857" title="india_slum_child_delhi" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/india_slum_child_delhi-292x300.jpg" alt="" width="292" height="300" />हिं</strong>दुस्तान को किसी ज़माने में सोने की चिड़िया कहा जाता था ऐसा अक्सर हम बचपन से सुनते आए है और किताबों में भी पढ़ते आए है पर आज के हिंदुस्तान का असली चेहरा पूरे विश्व के सामने है दो जून की रोटी के लिए रोज़ संघर्ष करने वालो की संख्या विश्व के किसी देश के मुकाबले हिंदुस्तान में सबसे अधिक है इसके आठ राज्यों में सबसे ज्यादा 42 करोड़ गरीब लोग बसते है, जहां किसी ज़माने में अपने लोगो को दो जून की रोटी दिलाने के लिए ख़ैरात के तौर पर अमेरिका से घटिया लाल गेहूं लिया जाता था वही आज अपने खून पसीने अपने ही देश में पैदा हुआ उम्दा गेहूं कुडे में पड़ा सड़ने रहा है और दूसरी ओर इसी की तलाश में गरीब लोग अपना घर द्वार छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर फुटपाथ पर नरकीय जीवन बिताने को मजबूर है पर हैरानी की बात ये है कि इसके बावजूद कृषि प्रधान देश के कृषि मंत्री जो आजकल क्रिकेट मंत्री के तौर पर ज्यादा जाने-पहचाने जाते है माननीय शरद पवार साहब को ये समस्या अभी भी क्रिकेट की समस्याओं के मुकाबले कमतर ही लगती है</p>
<p style="text-align: justify;">इससे बडी विडम्बना और क्या होगी कि कृषि प्रधान देश में हर साल 20 हजार टन गेहूं गोदामों मे रखा रखा ही सड़ जाता हो, ऐसा सरकारी तौर पर माना जाता है पर गैर सरकारी तौर पर माने तो ये आँकड़ा 1 लाख टन गेहूं से भी अधिक है ये आँकड़े उस समय हमें ज्यादा चिढ़ाते हुए नज़र आते है जब हमारे देश के 8 राज्यों के गरीब आफ्रिका के 26 देशो की ग़रीबों की तुलना में कही ज्यादा है,बिहार. झारखंड, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल में 42 करोड़ से ज्यादा लोग बसते है जबकि आफ्रिका के 26 सबसे गरीब देशो की तादाद महज 41 करोड़ ही है हमारे इन्हीं 8 राज्यों में भारत के आधे से ज्यादा और पुरी दुनिया के एक तिहाई से ज्यादा गरीब लोग रहते है ऐसे में देश की 37 फीसदी आबादी याने की तकरीबन 9 करोड़ परिवार ग़रीबी रेखा के नीचे याने बीपीएल योजना के तहत आते है इनमें से तकरीबन 2 करोड़ 50 लाख परिवार अत्यंत गरीब है जिन्हें जीवन यापन के लिए अन्त्तोदय योज़ना के तहत 2 रुपये किलो गेहूं और 3 रुपये किलों मे चावल सरकार मुहैया कराती है, इस सब के लिए सरकार द्वारा प्रतिवर्ष तकरीबन 1 करोड़ 70 लाख टन अनाज जारी किया जाता है ये उन खुदकिस्मत गरीबो के लिए है जिनका नाम सरकारी आंकड़ो में दर्ज है पर वे करोड़ो गरीब न तो जिनके पास कोई कार्ड है और न ही किसी फाइलों या योजनाओं में उनका नाम है वे आज भी इस बेतरतीब मंहगाई में अनाज खरीदकर खाने के लिए मज़बूर है पर सबसे बड़ा सवाल ये है कि वे इसे खरीदे तो खरीदे कैसे इसके लिए उनके पास पैसे ही नही है ।</p>
<p style="text-align: justify;"><img class="alignleft size-full wp-image-4858" title="rotting wheat" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/rotting-wheat.jpg" alt="" width="280" height="165" />दूसरी ओर देश के अनाज का भंडारण करने वाली सरकारी एजेंसियों और एफ सी आई के गोदामों में लाखों करोड़ो टन अनाज पड़ा सड़ रहा है एफ सी आई के अधिकारी इन्हें भंडारण की समस्या मानकर अपना पल्लू झाड़ने में लगे रहते है कृषि मंत्री पवार साहब की माने तो अभी स्थिति काबू में है देश में सिर्फ 0.3 प्रतिशत अनाज ही सड़ने की स्थिति में है पर ये आंकड़े अफसरों के द्वारा घालमेल कर फाईलों में बनाएं जाते है वस्तुस्थिती इसके काफी विपरीत है अफ़सर इस आंकड़े की कभी भी 0.5 से ज्यादा फाईलो में बढ़ने नही देते जिनके चलते उनपर किसी प्रकार की कार्यवाही हो सके,रही बात सड़े गले आनाजों की तो उन्हें फिर से बोरों में भरकर उन करोड़ो गरीब लोगो के लिए भेज दिया जाता है जो सरकारी रहमों करम पर अपने पेट की आग बुझाने के लिए मजबूर रहते है</p>
<p style="text-align: justify;">विश्वपटल पर सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनने के ख्वावों में डूबें देश का वर्तमान हालात क्या इसे कभी हकीक़त के धरातल पर ला पाएंगी । हिंदुस्तान एक कृषि प्रधान देश है यहा कि अर्थव्यवस्था पुरी तरह कृषि पर ही निर्भर रहती है ऐसे में सरकारी अव्यवस्थाओं के चलते देश के अन्नदाता के खून पसीने से उपजे अनाजों की इस हालात का रोना कौन रोऐंगा, निश्चित तौर पर परोक्ष रुप से इसका असर अन्नदाताओं पर अवश्य पड़ेगा। ग़रीबों का क्या वे तो सरकार के रहमों करम पर ही अपना जीवन यापन करने को मजबूर है और लगभग आगे भी रहेंगें । इसे विडम्बना नही तो और क्या कहेंगें की एक तरफ तो गोदामों में अनाजों के ढेर सड़ने को मज़बूर है और दूसरी ओर इन्हीं अनाजों के लिए टकटकी बांधे गरीब तिल-तिल भूखों मरने को विवश है</p>
<p style="text-align: justify;">हालात काबू में है और,प्लीज मीडिया इसे ज्यादा तूल न दे &#8230; ये बयान है खेत खलिहानो से दूर क्रिकेट के मैदान पर चियर्सगल्रर्स के ठुमकों का आंनद उठाने में ज्यादा मसगूल रहने वाले हमारें देश के कृषि मंत्री श्री शरद पवार साहब का । देश की कृषि नीति से ज्यादा क्रिकेट नीति की ओर इनका ज्यादा रुझान रहता है इनकी माने तो देश में हालात अभी काबू में है और स्थितीयां पहले से बेहतर हो रही है पर असली चेहरा तो देश की इन आठ राज्यों के किसी भी गांवो कस्बों मे जाकर आसानी से देखा जा सकता है जिन्हें आज भी आई पी एल से ज्यादा बी पी एल की सुविधाओं की ज़रुरत है ।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/2010/07/18/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%ac/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>1</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>
