कौटिल्य के बारे में मणिशंकर प्रसाद के विचार
2भारतीय राजनीतिक चिंतन के इतिहास में कौटिल्य एक ऐसा नाम है जिसके व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों में विलक्षणता है। कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’ कई संदर्भों में दुरूह होते हुए भी अर्थ-व्यवस्था,
• दिहाड़ी मजदूरों सहित हर श्रेणी के कामगार के मेहनताने की बढोतरी दर साल 1983-1993 की तुलना में 1993-94 से 2004-05 के बीच घटी है। # • साल 1983
• साल १९८३ से १९९३-९४ के बीच रोजगार में बढ़ोत्तरी की दर २.०३ फीसदी थी जो साल १९९३-९४ से २००४-०५ के बीच घटकर १.८५ फीसदी हो गई।# • साल
घाटे का सौदा जानकर तकरीबन २७ फीसदी किसान खेती करना नापसंद करते हैं। कुल किसानों में ४० फीसदी का मानना है कि विकल्प हो तो वे खेती छोड़कर कोई और
भारतीय राजनीतिक चिंतन के इतिहास में कौटिल्य एक ऐसा नाम है जिसके व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों में विलक्षणता है। कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’ कई संदर्भों में दुरूह होते हुए भी अर्थ-व्यवस्था,
इतिहास हमेशा विजेताओं का हुआ करता है या शासकों का, पराजित या शासितों का नहीं, क्योंकि इतिहास तो वही लिखवा सकते हैं, और लिखवाते हैं, जो सत्ता में होते हैं।
कृष्ण कुमार हिन्दू होने के मायने खोजने वक्त अपनी निजी नियति से घिर जाना बहुत आसान है। मेरी समझ में हिन्दू होने का कोई ऐसा अर्थ सोच सकना या बता
लेखक :धर्मनारायण शर्मा अति प्राचीनकाल से भारत में नीचे को ऊंचा उठाने का कार्य चलता हैं। मैं नीचा यह मनोविज्ञान व्यक्ति और जाति में हीनता का भाव निर्माण करता है।
देश के अन्य पत्रों में जिनकी सेवाएं मूल्यवान ही रही हैं वे हैं अलमोड़ा की शक्ति और उसकी लगातार अपने क्षेत्र की राष्ट्रीय सेवाएं बिहार के ‘देश’और ‘महावीर’आगरे का ‘आर्य
महाशयों, हमारे देश के समाचार पत्र संगठित नहीं हो रहे । श्रीयुत नटराजन के सभापितत्व में बम्बई में श्रीमान रामस्वामी शास्त्री के सभापतित्व में मद्रास में, ‘फारवर्ड’ के एक भूतपूर्व
देश के उपदेशक संपादक,सज्जनों एवं पत्रकार बंधुओं ! मेरी अपेक्षा ज्ञान-वद्ध वयोवृद्ध औत तपोवृद्ध व्यक्तियों के होते हुए, आपने मेरे जैसे अनुभवहीन व्यक्ति को, इस संस्था के सभापतित्व का गौरवपूर्ण