Archive for category: दस्तावेज़

कौटिल्य के बारे में मणिशंकर प्रसाद के विचार

कौटिल्य के बारे में मणिशंकर प्रसाद के विचार

2 जनोक्ति डेस्क / 2010/03/24 12:00 am

भारतीय राजनीतिक चिंतन के इतिहास में कौटिल्य एक ऐसा नाम है जिसके व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों में विलक्षणता है। कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’ कई संदर्भों में दुरूह होते हुए भी अर्थ-व्यवस्था,

झूठ नहीं बोलता इतिहास:जगदीश चंद्रिकेश

झूठ नहीं बोलता इतिहास:जगदीश चंद्रिकेश

2 जनोक्ति डेस्क / 2010/03/23 12:23 am

इतिहास हमेशा विजेताओं का हुआ करता है या शासकों का, पराजित या शासितों का नहीं, क्योंकि इतिहास तो वही लिखवा सकते हैं, और लिखवाते हैं, जो सत्ता में होते हैं।

हिन्दू मन की खोज

हिन्दू मन की खोज

2 जनोक्ति डेस्क / 2010/02/03 12:33 am

कृष्ण कुमार हिन्दू होने के मायने खोजने वक्त अपनी निजी नियति से घिर जाना बहुत आसान है। मेरी समझ में हिन्दू होने का कोई ऐसा अर्थ सोच सकना या बता

भारत में ‘अपग्रेडेशन ‘ की परम्परा

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/01/15 9:26 pm

लेखक :धर्मनारायण शर्मा अति प्राचीनकाल से भारत में नीचे को ऊंचा उठाने का कार्य चलता हैं। मैं नीचा यह मनोविज्ञान व्यक्ति और जाति में हीनता का भाव निर्माण करता है।

वर्तमान पत्र-अकारिता और माखनलाल चतुर्वेदी -3

0 जनोक्ति डेस्क / 2009/11/01 9:03 am

देश के अन्य पत्रों में जिनकी सेवाएं मूल्यवान ही रही हैं वे हैं अलमोड़ा की शक्ति और उसकी लगातार अपने क्षेत्र की राष्ट्रीय सेवाएं  बिहार के ‘देश’और ‘महावीर’आगरे का ‘आर्य

वर्तमान पत्र-अकारिता और माखनलाल चतुर्वेदी -2

0 जनोक्ति डेस्क / 2009/10/31 11:51 pm

महाशयों, हमारे देश के समाचार पत्र संगठित नहीं हो रहे । श्रीयुत नटराजन के सभापितत्व में बम्बई में श्रीमान रामस्वामी शास्त्री के सभापतित्व में मद्रास में, ‘फारवर्ड’ के एक भूतपूर्व

वर्तमान पत्र-अकारिता और माखनलाल चतुर्वेदी -1

वर्तमान पत्र-अकारिता और माखनलाल चतुर्वेदी -1

0 जनोक्ति डेस्क / 2009/10/29 8:34 am

देश के उपदेशक संपादक,सज्जनों एवं पत्रकार बंधुओं ! मेरी अपेक्षा ज्ञान-वद्ध वयोवृद्ध औत तपोवृद्ध व्यक्तियों के होते हुए, आपने मेरे जैसे अनुभवहीन व्यक्ति को, इस संस्था के सभापतित्व का गौरवपूर्ण