मजबूरी ही सही फांसी तो होगी अफजल को !
2अभी 27 जुलाई को गृह मंत्रालय ने संसद पर हमलों का दोषी अफजल गुरु की दया अर्जी की फाइल सात सालो के बाद राष्ट्रपति के पास भेजी .. मै ही
उत्तम सिंह (भारतीय स्टेट बैंक, लखनऊ) शहर-ए-लखनऊ से आप सबको सुबह का सलाम क़बूल हो। आज के अख़बार में एक ऐसी ख़बर पढ़ीजिसे आप सब के साथ बांटना चाहता हूँ। इस
ये क्या जिस घोषणा-पत्र यानी चुनावी वादों को फाड़ कर राहुल गाँधी हीरो बनने की कोशिश में थे वो सूची किसी दूसरी पार्टी की नहीं बल्कि खुद कांग्रेस उम्मीदवारों की
दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में दूसरे राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र फाडकर राहुल गाँधी ने वैचारिक दरिद्रता और विक्षिप्तता का प्रमाण प्रस्तुत किया है | लोकतंत्र में विपक्षी
अभी 27 जुलाई को गृह मंत्रालय ने संसद पर हमलों का दोषी अफजल गुरु की दया अर्जी की फाइल सात सालो के बाद राष्ट्रपति के पास भेजी .. मै ही
हमने जिस धरती पर जन्म लिया है वो हमारी धरती मां है जिसकी गोद में खेलते-कुदते हम कब बड़े हो जाते है, हमें इसका अनदाजा भी नहीं होता। अगर बात
सरकार ने नया भूमि अधिग्रहण बिल तैयार कर लिया है | ड्राफ्ट में साफ कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण का अधिकार निजी कंपनियों को नहीं होगा। भट्टा पारसौल और
वर्तमान समय भारतीय लोकतंत्र का संकर्मण काल कहा जा सकता है. लोकतंत्र की इस व्यवस्था ने देश को आकंठ भ्रष्टाचार , बेहद गरीबी , बेरोजगारी , मुक्त भोग विलासिता , भोंडे
भारतीय लोकतंत्र एक बड़े संक्रमणकाल से होकर गुजर है | एक ओर अरब देशों की जनता में तानाशाही को उखाड़ लोकतंत्र को बहाल करने की जिद है तो वहीँ भारतवर्ष
भारतीय लोकतंत्र एक बड़े संक्रमणकाल से होकर गुजर है | एक ओर अरब देशों की जनता में तानाशाही को उखाड़ लोकतंत्र को बहाल करने की जिद है तो वहीँ भारतवर्ष को तानाशाह की जरुरत है ,ऐसा कहने वालों की संख्या बढ़ रही है
कपिल सिब्बल कहते हैं कि “जनलोकपाल” एक “समानान्तर सत्ता व्यवस्था” बन जायेगा, जो कि लोकतन्त्र के लिए खतरा है। क्या कपिल सिब्बल सोनिया गाँधी के निजी क्लब “NAC” (नेशनल एडवायजरी
विजय पाटनी – लो फिर दाम बढ़ गए है , सुना है हमारे मनमोहन सिंह जी अर्थशास्त्री है , और वो व्यर्थ में कुछ करते नहीं है , सही है
आरती. सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने जो हलफनामा पेश किया है उससे लगता है कि दिल्ली पुलिस जनता को बेवकूफ ही समझती है तभी तो यह कह रही है कि
जयललिता ने कहा है – चिदंबरम धांधली के जरिए जीते. इसलिए उनका मंत्रिमंडल में रहना ठीक नहीं है. चिदंबरम 2009 में संसद के लिए कभी नहीं चुने गए. उन्होंने देश