आज आपके साथ कुछ पुरानी शानदार यादें बांटने का मन हो रहा है। मैं आज जब अपने दोस्त के घर गया तो उसके भतीजे ने टीवी के रिमोट से टीवी के विभिन्न कार्यक्रमोंको देखने लगा। मेरे दोस्त ने कहा कि यार जब हम छोटे थे तो टीवी का क्या क्रेज था ओर दोस्तों यहीं से शुरू हुआ मेरे यादों का सिलसिला। वो भी क्या जमाना था जब घर में टीवी होना बड़े गौरव की बात होती थी। मेरे शहर में टेलीविजन का आगमन 1983-84 में हुआ था। →आगे पढ़ें .. धन्य धन्य दूरदर्शन ….
आज आपके साथ कुछ पुरानी शानदार यादें बांटने का मन हो रहा है। मैं आज जब अपने दोस्त के घर गया तो उसके भतीजे ने टीवी के रिमोट से टीवी के विभिन्न कार्यक्रमोंको देखने लगा। मेरे दोस्त ने कहा कि यार जब हम छोटे थे तो टीवी का क्या क्रेज था ओर दोस्तों यहीं से शुरू हुआ मेरे यादों का सिलसिला। वो भी क्या जमाना था जब घर में टीवी होना बड़े गौरव की बात होती थी। मेरे शहर में टेलीविजन का आगमन 1983-84 में हुआ था। →आगे पढ़ें ..





अख़बारों में विज्ञान एक्सप्रेस ट्रेन को लेकर आ रही उत्साहपूर्ण ख़बरों ने मुझमें इतना जोश भर दिया कि कल मैं खुद को सोनपुर जाने से रोक नहीं पाया.मेरी ७० वर्षीया माँ जगरानी देवी भी मेरे साथ हो ली.हालांकि वह ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं है लेकिन उसके कुछ सीखने के जज्बे को देखते हुए मैं उसे साथ ले जाने से मना नहीं कर पाया.लेकिन जब हम सोनपुर स्टेशन पहुंचे तो पाया कि रेल प्रदर्शनी देखने के लिए लोगों
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