
ब्लॉग जगत में;
संसद चल रहा है,
एक प्रयास;
ब्लोगरों के दिल में,
पल रहा है |
आप भी;
सदस्य बन सकते हैं |
कुछ कांग्रेसी
और
कम्युनिष्ट,
कुछ भाजपायी ;
सपाई,बसपाई,
जो भी;
इनके द्वारा,
पल रहे हैं |
ओह !
माफ़ करना,
इनकी
विचारधारा में
चल रहे हैं |
वह;
सदस्य बन सकते हैं |
यहाँ ;
चुनाव नहीं लड़ना है ,
बस ;
मन – मष्तिष्क ,
खुला रखना है |
पार्टी या दल ,
चाहे;
समाप्त हो जाएँ ,
पर;
देश व समाज को;
संस्कृति व संस्कार को
जिन्दा रखना है |
अच्छा नेता वही है,
जो ;
भीड़ को
गलत दिशा से,
उस दिशा में ;
ले जाये,
जो ;सही है |


फिर तो आपकी संसद में सबसे काबिल सदस्य श्री दर्शन लाल, डॉ. मीना और दिवेदी जी ही है और सबसे घटिया हुए महक जो सबको गुमराह कर रहे है.
श्री शंकर दत्त जी आपने कविता तो बहुत सुन्दर लिखी है, लेकिन आपकी संसद इस कविता के लायक नहीं है, इस पर तो नासमझ लोगों ने कब्जा कर रखा है। महक सबको गुमराह कर रहा है, जो न तो स्वयं कानून, संसद, संविधान आदि के बारे में कुछ जानता है और न हीं अन्य सदस्यों को किसी सही बात को समझने देता है। संसद का सही मायने होता क्या है जानते हो-बसकी बात को पूरी निष्ठा से सुनना और जब आप गलत हों तो कटु से कटु शब्दों को भी सुनने एवं सहने को तैयार रहना। केवल वाग्जाल के आधार पर आप संसद नहीं चला सकते। संसद चलाने के लिये, सच्ची ईमानदारी और सब्जेक्ट का नॉलेज जरूरी है, जो आपकी संसद में आरक्षण पर हुई बहस को देखकर तो लगता है कि श्री दिनेशराय एवं श्री मीना के अलावा किसी की भी टिप्पणी में नजर नहीं आता। श्री दर्शन लाल भी बात तो ईमानदारी से कह रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उनके पास भी कानूनी जानकारी नहीं है। डॉ. मीना कानून के विद्वान जानकार लगते हैं, जिन्हें आप लोग सुनना नहीं चाहते। क्या इसी तरह से देश में समानता लागू करोगे? डॉ. मीना जैसे लोगों पर निजी आक्षेप लगाने के बजाय उनसे कुछ सीखो। एक वकील होने के नाते मैं आपको बतला दूँ कि इस देश में जाति एवं धर्म के आधार पर किसी को भी आरक्षण नहीं दिया जा रहा है और भारत के वर्तमान संविधान के चलते जो विश्व के श्रेष्ठ संविधानों में शामिल है, सवर्णों को आर्थिक आधार पर नौकरियों में आरक्षण मिलना लगभग नामुमकिन है।
जीतू गोयल
हाई कोर्ट एडवोकट।
@Jeetu Goyal
अरे प्रभु हम तो मान रहें हैं , हम सबसे बड़े गलत हैं आप सबसे बड़े सही हैं ,हमारी सबसे बड़ी गलती ये है की हम किसी गरीब की ,हजारों वरसों से दबे कूचले लोगों की मदद ये देखकर नहीं करना चाहते की उसकी जाती या धर्म क्या है , हमारी सबसे बड़ी गलती ये है की हम किसी को भी अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक ना मानकर उसे भारतीय मानना चाहते हैं ,और हमारी एक और सबसे बड़ी गलती आपको बताऊँ मैं , सत्य गौतम नाम का खुद को दलित कहने वाला व्यक्ति हमारे ब्लॉग पर आये और हमें अपशब्द कहे और बदले में हम उसे प्रेमपूर्ण निमंत्रण दें ब्लॉग का सदस्य बनने का तो ये भी हमारी सबसे बड़ी गलती है ,अलोक मोहन नाम के दलित ब्लॉगर को हम सभी की तरह सादर निमंत्रित करें ब्लॉग का सदस्य बनने के लिए और बदले में वो हम पर हँसे और हम सबको फ़ालतू लोग बताए तो ये भी हमारी ही गलती है
भगवन हम तो मान रहें हैं की हम गलतियों के पुतले हैं ,सही इंसान तो आप जैसे लोग हैं जो किसी गरीब की मदद करने से पहले ये देखना चाहते हैं की वो दलित है या सवर्ण ?,अगड़ा है या पिछड़ा ?,हिंदू है या मुसलमान ?
सच में प्रभु आप धन्य हैं , शत-२ प्रणाम है आपको
महक
जीतू जी, आपकी टिप्पणियां पढ़ कर बहुत अच्छा लगा. कुछ तो लोग हैं जिनके पास पूर्वाग्रहों से मुक्त समझ है. कोई तो हैं जिनकी कलम, करनी और बुद्धी बिकी नहीं हुई नहीं है. वरना ऐसा लगने लगा है कि भारत में केवल भारत के दुश्मनों का ही बोलबाला है, हर मंच पर.
कुकर्मियों, कुमार्गियों, कुसंस्कारियों और चरित्रहीनों को मीडिया नें मान-सम्मान देने, उन्हें माडल-आदर्श बनाकर पेश करने के प्रयासों से साफ़ नज़र आता है कि दाल में कुछ काला नहीं, सारी दल ही काली है. कुछ शक्तिशाली लोग,कोई शक्तिशाली ताकतें हैं जो जानबूझकर भारत को पतित, कमज़ोर बनाने के प्रयास में हैं. भारत के लोगों को असली मुद्दों से दूर ले जाने, बहकाने का सुनियोजित प्रयास है. हमें हमारे खिलाफ इस्तेमाल कर लेने की एक चालाकी से भरी कुटिल योजना अनेक आयामों में चल रही नज़र आती है.
हमें बेवकूफ और खोखला-कमज़ोर बनाने के लिए जो कुछ हमको दिखाया जा रहा है, सच उसके पीछे छुपा हुआ है. जो आप सरीखे पूर्वाग्रह रहित, इमानदार और बुधीमान हैं वे ही उस छुपे सच को देख-समझ पाते हैं व उसे उद्घाटित करते हैं. बड़ी मेहनत,बड़ी चालाकी बड़े खर्चे से बनी अपनी कुटिल योजनाओं का भेद खुलने से ये आसुरी लोग परेशान तो होंगे ही. तब आप सरीखों को, अपना भेद खोलने वालों को और समाज को जगानेवालों को अपना निशाना तो ये बनायेंगे ही बनायेंगे. एक जुट होकर झूठ और बेईमानी का बिगुल बजायेंगे जिसमें सच की आवाज़ दब जाए, पर कब तक ?
अब इनके डूबने के दिन निकट आगये हैं . तभी आजकल अपनी पूरी ताकत का साथ जुटे हुए हैं. पर इनकी समस्या ये है कि इनके विदेशी आका स्वयं अपनी करनियों से बर्बादी, समाप्ती की और तेज़ी से बढ़ रहे हैं . उनके साथ इनकी समाप्ती भी सुनिश्चित होती जा रही है. ऊपर से आप सरीखे इमानदार और बुद्धिमान इनके भेद खोलकर इन्हें बेनकाब कर रहे हैं.
## इनकी सबसे बड़ी ताकत है झूठ, सच को सामने नहीं आने देना. इनकी समाप्ती का मंत्र है ‘जनता के सामने सच को उजागर कर देना’ यही इस रावण की समाप्ती का अमोघ अस्त्र है.##
वही आप और आपसरीखे लोग ( जयराम विप्लव जी के ‘जनोक्ती’ जैसे प्रयास ) कर रहे हैं. मेरी शुभकामनाएं !