ब्लॉग हलचल|2010/05/10 10:28 am

रेलवे की जमीन पर कब्ज़ा

देशभर में फैली रेलवे की जमीन पर दो लाख से ज्यादा अवैध कब्जे हो चुके हैं। परंतु रेलवे ने खरबों रुपए की अपनी जमीन को इन अवैध कब्जों से मुक्त कराने की गंभीर कोशिश नहीं की और हर साल हजारों की संख्या में अतिक्रमण हो रहे हैं। रेलवे के पास कुल दस लाख 68 हजार एकड भूमि है, जिसमें एक लाख 13 हजार एकड भूमि खाली पडी है समिति का मानना है कि कतिपय समस्याओं के कारण रेलवे इतने बडे विशाल भू संसाधनों का इष्टतम उपयोग करने में असफल रहा है।समिति ने साथ ही अतिक्रमण हटाने के लिए संपदा अधिकारियों को अधिक शक्तियां प्रदान करने और उन्हें मजिस्ट्रेट का दर्जा देने के लिए कानून में संशोधन करने की आवश्यकता बताई है। साथ ही रेलवे के भूमि रिकार्डों के रखरखाव को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया है।इन मामलों का मूल कारण रेलवे की भूमि के समुचित सर्वेक्षण सत्यापन का अभाव, भूमि रिकार्ड की अनुपलब्धता, भूमि रिकार्ड का अनुचित रख रखाव और इस समस्या के प्रति उदासीनता रही है। रिपोर्ट में लिखा है कि रेलवे की भूमि पर से अतिक्रमण को हटाने के लिए संपदा अधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसके लिए जहां भी आवश्यक हो कानून में संशोधन कर संपदा अधिकारियों के प्राधिकार और उनकी शक्तियों में वृद्धि किए जाने की जरूरत है। समिति चाहती है कि रेलवे को अपनी खाली पडी भूमि से अधिक राजस्व पाने के लिए अपनी लाइसेंस की प्रणाली को मजबूत कर भूमि से संबंधित रिकार्डों के रखरखाव के बारे में अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है।

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