पाठकों को नमस्कार ! मैं नरेन्द्र निर्मल ” ब्लॉग-हलचल ” के साथ हाजिर हूँ | ” ब्लॉग-हलचल ” में हर रोज नव-पल्लवित चिट्ठाकारों की पोस्ट आपके सामने लेकर आता रहूँगा |
आज की पहली पोस्ट है मनीष की जिसमें उन्होंने ” सुट्टा धारिणी ” आधुनिक महिलाओ और लड़कियों के बारे में बताया है | वाकई देश २१ वी सदी में आ चुका है. और महिला शक्ति जागरूक हो चुकी है !
आज प्रोफ़ेसर वी त्रिपाठी जी अपने ब्लॉग चिट्ठा वार्ता में अपने पाठको को सेक्स की शिक्षा देने का प्रयास किया है. कब किस मूड में सम्भोग करना चाहिए या नहीं इसकी उचित समयावधि से सही स्थान तक पर विचार किया गया है. वाकई आज देश में सेक्स की शिक्षा बहुत ही आवश्यकता है.
हर किसी की मौत एक ना एक दिन अवश्य होगी ये सत्य है. किस सूरत में और कब होगी, उसका माध्यम क्या होगा. ये कहना किसी के बस में नहीं है. ऐसे ही मौत के आते जाते छनो से रूबरू करा रहे है, मनोज कुमार शाह अपने ब्लॉग manojkumarsah.jagranjunction.com पर.
क्या आज से १५ वर्ष पूर्व का बचपन और आज का बचपन जहा ५ किलो का बस्ता नन्ही सी जान के कंधे पर डाल दिया जाता है. और वो चुप-चाप अबोध की तरह इस बोझ को उठाये घर से स्कूल और स्कूल से घर ढ़ोने पर विवश होती है. इन्ही कुछ पहलुओ को छूती है. आशकारा फारूकी के ब्लॉग “घर की बीवी” के बचपन की दास्ताँ में.
जहाँ आज मोबाइल ने एक तरफ लोगो को सुविधा भोगी और आलस्य का साधन थमा दिया है. जिससे कई कम आसान हो गाए है. वही इसपर मिलने वाली फिजूल के एसएम्एस और टैलीकॉलिंग ने लोगो का जीना दूभर कर दिया है. इसी समस्या को दर्शाया है मनीषा ने अपने ब्लॉग हिंदी-ब्लॉग.कॉम में|
Author: नरेन्द्र निर्मल
नरेन्द्र निर्मल , जनोक्ति के कार्यकारी संपादक हैं . निर्मल मूलतः बोकारो (झारखण्ड) के निवासी है और वर्त्तमान में दिल्ली में पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं. गत पांच वर्षो से विभिन्न सामाजिक और काव्य मंचो पर उपस्थित रहे. निर्मल जी कवि और समाजसेवक के रूप में भी जाने जाते हैं. “वाई एम् सी ए ” से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर करने के बाद ‘ जन आवाज’ निर्माण संवाद ‘ जिन्दा लोग’ आदि पत्रिकाओं के साथ -साथ जयप्रकाश अंतर्राष्ट्रीय शोध संस्थान से भी जुड़े रहे हैं .
सुदर चर्चा के लिए आभार ! नये चिट्ठाकारों को जगह देने का यह प्रयास सरहनीय है | नियमित स्तम्भ जारी रखिये |
आशकारा फारूकी की पोस्ट काफी अच्छी लगी ! नरेन्द्र जी का धनयवाद \
WELL DONE
GOOD EFFORTS