ब्लॉग हलचल|2010/07/26 4:09 pm

“ब्लॉग-हलचल”कुछ विशेष चिट्ठो पर नजर

पाठकों को नमस्कार ! मैं नरेन्द्र निर्मल ” ब्लॉग-हलचल ” के साथ हाजिर हूँ | ” ब्लॉग-हलचल ” में हर रोज नव-पल्लवित चिट्ठाकारों की पोस्ट आपके सामने लेकर आता रहूँगा |

आज की पहली पोस्ट है मनीष की जिसमें उन्होंने ” सुट्टा धारिणी ” आधुनिक महिलाओ और लड़कियों के बारे में बताया है | वाकई देश २१ वी सदी में आ चुका है. और महिला शक्ति जागरूक हो चुकी है !

सुट्टा पीती लड़की….

आज प्रोफ़ेसर वी त्रिपाठी जी अपने ब्लॉग चिट्ठा वार्ता में अपने पाठको को सेक्स की शिक्षा देने का प्रयास किया है. कब किस मूड में सम्भोग करना चाहिए या नहीं इसकी उचित समयावधि से सही स्थान तक पर विचार किया गया है. वाकई आज देश में सेक्स की शिक्षा  बहुत ही आवश्यकता है.

चिट्ठाकारों का स्‍वांत: सुखाय हिन्‍दी सेवा बनाम स्खलन का रोग और सम्भोग

हर किसी की मौत एक ना एक दिन अवश्य होगी ये सत्य है. किस सूरत में और कब होगी, उसका माध्यम क्या होगा. ये कहना किसी के बस में नहीं है. ऐसे ही मौत के आते जाते छनो से रूबरू करा रहे है,  मनोज कुमार शाह अपने ब्लॉग manojkumarsah.jagranjunction.com पर.
क्या आज से १५ वर्ष पूर्व का बचपन और आज का बचपन जहा ५ किलो का बस्ता नन्ही सी जान के कंधे पर डाल दिया जाता है. और वो चुप-चाप अबोध की तरह इस बोझ को उठाये घर से स्कूल और स्कूल से घर ढ़ोने पर विवश होती है. इन्ही कुछ पहलुओ को छूती है. आशकारा फारूकी के ब्लॉग “घर की बीवी” के बचपन की दास्ताँ में.

बचपन

जहाँ आज मोबाइल ने एक तरफ लोगो को सुविधा भोगी और आलस्य का साधन थमा दिया है. जिससे कई कम आसान हो गाए है. वही इसपर मिलने वाली फिजूल के एसएम्एस और टैलीकॉलिंग ने लोगो का जीना दूभर कर दिया है. इसी समस्या को दर्शाया है मनीषा ने अपने ब्लॉग हिंदी-ब्लॉग.कॉम में|

एसएमएस विज्ञापनों ने परेशान कर रखा है

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3 Comments

  • सुदर चर्चा के लिए आभार ! नये चिट्ठाकारों को जगह देने का यह प्रयास सरहनीय है | नियमित स्तम्भ जारी रखिये |

  • आशकारा फारूकी की पोस्ट काफी अच्छी लगी ! नरेन्द्र जी का धनयवाद \

  • WELL DONE
    GOOD EFFORTS

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