अपने अज्ञातवास के अंतिम समय में अर्जुन ने विराटनगर,नेपाल के राजा की गायो के हरण कर चुके कौरवो से जिस जगह युद्ध कर रक्षा की वो जगह ही गो रक्षा पुर या गोरखपुर कहलाई. अर्जुन की तरह ही आज भी
अगर नियाये की कुर्सी पर बैठे जज साहिब और जो लोग(अफसर और कर्मचारी) इस केस को देख रहे हे अगर उन में जरा भी सरम होगी और पब्लिक की तरफ धियान होगा तो इस पर सोचेगे . और अगर सिर्फ पैसा देखेगे तो अपने जमीर को बेच कर उसी का साथ देगे जो गलत हे.
ye murtiya ahankaar main dubi hui ek mahila ki dastaan sunati hai jo,,sirf apne aap ko apne jaane ke baad amar banane ki koshish main lagi hui hai,,,, ye utaar pradesh ko rome banae main tuli hai…..
अगर नियाये की कुर्सी पर बैठे जज साहिब और जो लोग(अफसर और कर्मचारी) इस केस को देख रहे हे अगर उन में जरा भी सरम होगी और पब्लिक की तरफ धियान होगा तो इस पर सोचेगे . और अगर सिर्फ पैसा देखेगे तो अपने जमीर को बेच कर उसी का साथ देगे जो गलत हे.
People should decide the fate of such kind of arrogant politicians.
ye murtiya ahankaar main dubi hui ek mahila ki dastaan sunati hai jo,,sirf apne aap ko apne jaane ke baad amar banane ki koshish main lagi hui hai,,,, ye utaar pradesh ko rome banae main tuli hai…..