सन 74 से पांच बार देश की संसद के दोनों सदन राज्यसभा और लोकसभा में पहुँचने वाले सुब्रमण्यम स्वामी ‘वन मेन आर्मी’ कहे जाते हैं | छात्र जीवन से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून और संविधान के दायरे में रहकर
आश्चर्य होता है, बापू ने संसद के लिए बाँझ जैसा शब्द कैसे प्रयोग किया…सरोजिनी नायडू ने प्रतिरोध किया और बापू ने सदाशयता दिखाते हुए विनम्रतापूर्वक माफ़ी मांग ली…गाँधी सहिष्णुता के जीवंत प्रतीक है. ‘हिंद स्वराज’ में कही गयी कुछ बातें समय-प्रसंग में थोडी असहज लग सकतीं हैं पर उन्हें विमर्श से चुना जा सकता है, गाँधी ने अन्यत्र कहा है, ” मै अपने विचारों में रोज बदलाव कर लेने से गुरेज नहीं करता यदि मुझे सत्यता का भान हो ..”..ज्ञान तो निरंतरता का ही नाम है….पर ‘हिंद स्वराज’ की बढ़ती प्रासंगिकता से कोई इंकार नहीं किया जा सकता यह तो देश में पनप रही violence school of thought के जवाब में लिखी गयी थी ..तो आज भी हिंसा नए चरम पर है और हमें बापू के मार्गदर्शन की आवश्यकता है,,,,
I really appreciate your views . and also thank to janokti . go ahead world is waiting for your leadership .
आश्चर्य होता है, बापू ने संसद के लिए बाँझ जैसा शब्द कैसे प्रयोग किया…सरोजिनी नायडू ने प्रतिरोध किया और बापू ने सदाशयता दिखाते हुए विनम्रतापूर्वक माफ़ी मांग ली…गाँधी सहिष्णुता के जीवंत प्रतीक है. ‘हिंद स्वराज’ में कही गयी कुछ बातें समय-प्रसंग में थोडी असहज लग सकतीं हैं पर उन्हें विमर्श से चुना जा सकता है, गाँधी ने अन्यत्र कहा है, ” मै अपने विचारों में रोज बदलाव कर लेने से गुरेज नहीं करता यदि मुझे सत्यता का भान हो ..”..ज्ञान तो निरंतरता का ही नाम है….पर ‘हिंद स्वराज’ की बढ़ती प्रासंगिकता से कोई इंकार नहीं किया जा सकता यह तो देश में पनप रही violence school of thought के जवाब में लिखी गयी थी ..तो आज भी हिंसा नए चरम पर है और हमें बापू के मार्गदर्शन की आवश्यकता है,,,,
एक अच्छी पोस्ट..बधाई..