Author: कुमारेन्द्र
उ0प्र0 के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के जनपद जालौन में 1973 को जन्म। शिक्षा के रूप में डिग्रियाँ बटोरते हुए बी0एस-सी0 (गणित) के पश्चात अर्थशास्त्र, हिन्दी साहित्य और राजनीति विज्ञान में एम0ए0 और साथ ही हिन्दी साहित्य में (वृन्दावनलाल वर्मा के उपन्यासों में अभिव्यक्त सौन्दर्य का अनुशीलन) पी-एच0डी0 की उपाधि प्राप्त की। पत्रकारिता में विशेष रुचि होने के कारण पत्रकारिता एवं जनसंचार का स्नातकोत्तर डिप्लोमा भी हासिल किया।
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लेखन में बचपन से ही रुचि होने के कारण साहित्यिक यात्रा की शुरुआत वर्ष 1983 में ही कविता लेखन और उसके प्रकाशन के साथ प्रारम्भ हो गई थी। देश की लगभग सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में कहानियों, कविताओं, लेखों, शोध-आलेखों आदि का नियमित रूप से प्रकाशन होता रहता है।
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वर्तमान में पत्र-पत्रिकाओं के साथ ही इंटरनेट पर ब्लॉग के द्वारा एवं विभिन्न साइट के द्वारा भी लेखन में सक्रिय हैं।
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अद्यतन दस पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। इसमें एक कविता संग्रह, एक कहानी संग्रह के अतिरिक्त तीन पाठ्यक्रम सम्बन्धी, दो पर्यावरण सम्बन्धी, एक कन्या भ्रूण हत्या निवारण सम्बन्धी पुस्तक प्रमुख है।
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सामाजिक क्षेत्र में रुचि होने के कारण विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक संस्थाओं में भी सक्रिय भागीदारी। स्वयं द्वारा संचालित सामाजिक संस्था ‘दीपशिखा’ के प्रमुख कार्यकारी होने के साथ-साथ सूचना अधिकार का राष्ट्रीय अभियान के निदेशक, पी-एच0डी0 होल्डर्स एसोसिएशन के संयोजक तथा शोध संस्था ‘समाज अध्ययन केन्द्र’ के निदेशक पद का कार्यभार।
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अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक पत्रिका ‘स्पंदन’ तथा अन्तर्राष्ट्रीय रिसर्च जनरल ‘मेनीफेस्टो’ के सम्पादक।
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सम्प्रति गाँधी महाविद्यालय, उरई में हिन्दी विभाग में प्रवक्ता पद पर कार्यरत।
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सम्पर्क 09793973686
ई-मेल - dr.kumarendra@gmail.com
वेब पेज - रायटोक्रेट कुमारेन्द्र (http://kumarendra.blogspot.com)
- शब्दकार (http://shabdkar.blogspot.com)
good article…
जबकि शादी की और पार्टी के रूप में विभिन्न अवसरों पर एक सूट पहन, शिष्टाचार बहुत जरूरी हैं. लोगों को विश्वास है या नहीं, वहाँ एक तुम अपनी पीठ में देखने लड़की किया जाना चाहिए. यह हमेशा के अवसरों में हो रहा है. बस मत हो शर्मीले और अवसर पकड़ने के लिए. तुम्हें पता है. तुम यही अवसरों पर .. करना चाहिए:)
कुमारेंद्र जी आपके लेख तो बहुत पढे,बहुत अच्छा लगा. और अच्छा लग आपके बारे मे लता सेंगर से जान कर.मिलने की बहुत इच्छा है .हम लोग तो मुम्बई आकर अपनी ज़मीन से ही कट से गये है.