इतिहास, भारतनामा|Shortlink: 2010/07/28 9:23 am

अयोध्या का हाल और सवाल , कौन देगा जबाव ?

‘अयोध्या में मंदिर वहीं, मस्जिद नहीं, बाबरी ढांचा कहीं नहीं।’ ठीक है, ठीक है, इस देश के बहुसंख्यक लोग भी यही चाहते हैं कि राम-मंदिर बने लेकिन साहब किस-किस को है मेरी यानी ‘राम जन्म भूमि ‘ अर्थात अयोध्या की चिंता ? कभी मुगलों ने लूटा आज अपने ही लूट रहे हैं ! अब तो अपनी ही सरकार है मतलब भारतीयों की , जनप्रतिनिधि तो अपने ही हैं फ़िर भी विकास की मनमोहनी बयार यहाँ क्यों नहीं पहुंची ? ये तो छोडिये , जब मेरे नाम पर सत्ता तक पहुंचने वाले गद्दी पर बैठे तो गठबंधन की बेड़ियों में ऐसे जाकर जकड गये कि तब भी हमारा कुछ ना हुआ !

हिन्दू -हिंदुत्व -राम की धुन सुनता हूँ तो बहुत ही दुःख होता है अपनी इन कर्महीन और जुबांचालाऊ संतानों को देख कर ! एक ओर इसी जगत में मक्का और येरुशलम भी है और एक मैं भी हूँ ! मर्यादापुरुषोत्तम की नगरी की आज कोई मान-मर्यादा नहीं रह गयी है | राजनीति ने चौतरफा हमला कर मेरे वास्त्र तक छीन लिए हैं | एक ढांचा का बोझ कर लोग समझते हैं कि मुझ पर बड़ा उपकार किया है ! वाह रे ! भरतवंशियों क्या हाल कर दिया है मेरा वो भी एक वोट के लिए ! एक ने हिन्दू वोट के लिए मेरे नाम से आंदोलन किया लेकिन जब सत्तासीन हुई तो मेरा ध्यान तनिक भी ना आया ( मजबूरी चाहे कितनी भी हो लोग माँ -बाप को नहीं भूलते हैं ) दूसरे ने मुस्लिम वोट के लिए कभी मुझमें रूचि ना ली | हाँ , एक बार मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने के बाद हिन्दुओं की नाराजगी से बचने के लिए नेहरु के नाती ने विवादित ढांचे का ताला खोलने के लिए अपने कारिंदे जरुर भेजे थे | खैर , मैं अपनी हालत क्या बताऊं आजकल कोई टीवी चैनल वाला भी मेरे ऊपर कोई कार्यक्रम नहीं बनाता है और यदि बनाटा भी है तो पुराने फुटेज से काम चला लेता है | अरे , भाई ठीक है बाबरी मस्जिद टूटी लेकिन मैं तो अभी जिन्दा हूँ मेरी सुध तो लेते नहीं तुम लोग ! जिंदा भी हूँ कि आधुनिकता से पिछड़ता हुआ मर गया ? लेकिन तुम क्यों दिखाओ मेरी हालत तुम्हें कौन सी टी आर पी मिलने वाली है मेरी स्टोरी से ? लेकिन मैं भी चुप नहीं रहूँगा , सबको बताऊंगा अपने पिछड़ेपन की कहानी | सबको बताऊंगा कि अयोध्या केवल बाबरी मस्जिद और रामजन्मभूमि के उस विवादित ढांचे में नहीं बसी थी बल्कि उसके बाहर भी अयोध्या है और अब उसका हाल और सवाल सुनो …………….

खुली नालियों में मैला बहता रहता है। सडकों के किनारे लाखों श्रद्धालु सरयू-तट पर खुले में मल-मूत्र विसर्जित करते हैं। बिजली घंटों नहीं रहती। पेयजल प्रदूषित है। यदि साधु-संतों के मठ-मंदिर न हों, तो ठहरने का कोई स्थान शायद ही मिले। हर बडे काम के लिए,जिनमें स्वास्थ्य-सेवा भी शामिल है, लोगों को फैजाबाद जाना पडता है। 34 वर्ग किलोमीटर में बसे अयोध्या नगर (कस्बा) की जनसंख्या लगभग पचास हजार है। यहां जो पांच हजार मंदिर हैं,उनमें से दर्जनों स्थल राम जन्मभूमि होने का दावा करते हैं।

अयोध्या ही क्यों उपेक्षित है? कुछ लोग कहते हैं कि अयोध्या तो गौ-प्रदेश यानी काउ-बैल्ट के पिछडेपन की प्रतीक है, लेकिन फिर उसी क्षेत्र में स्थित मथुरा और काशी का विकास क्यों हो गया? क्या हम तंग-गलियों, बिजली-पानी, सडक-विहीन और कूडे-कचरे से मैली अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाएंगे या अयोध्या का वैसा विकास करेंगे ?

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