Articles By: डॉ. वेदप्रताप वैदिक

कौन है, दूध का धुला हुआ

1 2011/11/09 6:22 pm

भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू पता नहीं क्यों आजकल रोज़ ही बर्र के छत्ते में हाथ डाल देते हैं। उनके एक बयान से लगी आग अभी बुझती ही नहीं कि वे दूसरा आगभड़काऊ बयान दे डालते हैं। उन्होंने

मार्क्सवादियों का दोहरा शीर्षासन

मार्क्सवादियों का दोहरा शीर्षासन

0 2010/10/01 3:32 pm

यदि कार्ल मार्क्स अपनी कब्र से उठकर कभी भारत आ पहुंचें तो वे हक्के-बक्के रह जाएंगे| वे अपने भारतीय चेलों को चीनी चेलों से भी आगे-आगे दौड़ता हुआ पाएंगें| बंगाल के हमारे कामरेडों ने पहले देसी और विदेशी पूंजीपतियों के

पाकिस्तानी मोहरा बनते कश्मीरी

पाकिस्तानी मोहरा बनते कश्मीरी

0 2010/09/19 11:59 am

कश्मीर पर हुई सर्वदलीय बैठक को कई बागी नेताओं ने निर्थक घोषित कर दिया है। सैयद अली शाह गिलानी का कहना है असली मर्ज़ पर किसी ने उंगली ही नहीं रखी। सर्वदलीय बैठक में कश्मीर की ‘आजादी’ का कोई जि़क्र

ठीक-ठाक चल रहा है भारत !

ठीक-ठाक चल रहा है भारत !

1 2010/09/17 4:42 pm

[pullquote]देश में सब कुछ ठीक -ठाक चल रहा है | ठीक-ठाक का सही मतलब भारत में क्या होता है ये आप सभी जानते हैं | क्योंकि जब तक कोई कारगिल , संसद , मुंबई आदि पर हमले या भोपाल गैस

जाति मिटे तो गरीबी हटे

जाति मिटे तो गरीबी हटे

0 2010/08/08 11:14 am

जातीय गणना के इरादे को देश सफल चुनौती दे रहा है| जबसे ‘सबल भारत’ ने ‘मेरी जाति हिंदुस्तानी’ आंदोलन छेड़ा है, इसका समर्थन बढ़ता ही चला जा रहा है| देश के वरिष्ठतम नेता, न्यायाधीश, विधिशास्त्री, विद्वान, पत्रकार , समाजसेवी और

भूख की त्रासदी

भूख की त्रासदी

1 2010/07/10 10:43 am

क्या आपको पता है कि भारत में कितने लोग रोज़ भूखे पेट सोते हैं ? क्या आपको यह भी पता है कि दुनिया के सबसे ज्यादा गरीब लोग किस देश में रहते हैं ? आपको यह जानकर दुख होगा कि

पीएम कुछ बोले ,यही काफी है !

पीएम कुछ बोले ,यही काफी है !

0 2010/05/26 12:04 pm

अखबारों का क्या दोष है ? अगर डेढ़-दो घंटे की पत्रकार परिषद में आप कोई काम की बात नहीं बोलेंगे तो वही होगा, जो आज अखबारों ने किया है| अगर आप खबर नहीं देंगे तो वेअ-खबर को खबर बनाएंगे| इसीलिए

हिन्दुस्तानी को हिन्दुस्तानी रहने दो

हिन्दुस्तानी को हिन्दुस्तानी रहने दो

0 2010/05/13 3:15 pm

अगर हम दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को आरक्षण देते रहना चाहते हैं तो जन-गणना में जाति का हिसाब तो रखना ही होगा| उसके बिना सही आरक्षण की व्यवस्था कैसे बनेगी ? हॉं, यह हो सकता है कि जिन्हें आरक्षण नहीं