14 अगस्त, स्वाधीनता दिवस या….
015 अगस्त के कई समाचार पत्रों ने 14 अगस्त, 2010, शनिवार को सम्पन्न हुए कार्यक्रमों की चर्चा की है। कई स्थानों पर तिरंगा झंडा फहराया गया, जन-गण-मन गाया गया और स्वाधीनता सेनानियों को याद किया गया। यहां तक तो ठीक
15 अगस्त के कई समाचार पत्रों ने 14 अगस्त, 2010, शनिवार को सम्पन्न हुए कार्यक्रमों की चर्चा की है। कई स्थानों पर तिरंगा झंडा फहराया गया, जन-गण-मन गाया गया और स्वाधीनता सेनानियों को याद किया गया। यहां तक तो ठीक
किसी भी लोकतान्त्रिक देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होना ही चाहिए। फिर भी इस विषय पर बार-बार विवाद खड़े होते हैं। प्रायः लोग इसे राजनीति में घसीटकर इस या उस दल को कटघरे में खड़ा कर देते हैं। इस बारे
कश्मीर घाटी एक बार फिर सुलग रही है। उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती या अन्य सेकुलरों के अनुसार इसका कारण है सेना की ज्यादती। उनकी राय है कि सेना को यदि स्थायी रूप से हटा दें, तो घाटी में स्थायी शांति
” संघर्ष, मुठभेड़ और युद्ध “ सामान्य रूप से ये तीनों शब्द लगभग एक से लगते हैं; पर इनमें बड़ा अंतर है। ये अलग-अलग संदर्भ में प्रयोग होते हैं और इसीलिए इनके नियम भी अलग-अलग ही हैं। खेल के मैदान में
दिल्ली में होने वाले गुलाममंडल खेलों के उद्घाटन, समापन आदि के लिए बने जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम का नाम बिल्कुल ठीक रखा गया है, क्योंकि अंग्रेजों के जाने के बाद भारत में गुलाम परम्पराओं को जीवित रखने के सबसे बड़े