जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध !
पिछले दिनों उ0प्र0 शासन के एक मंत्री आजम खान को अमरीका के हवाई अड्डे पर जांच के लिए कुछ देर रोका गया। सुना है इससे पहले शाहरुख खान और पूर्व राष्ट्रपति डा0 कलाम के साथ भी ऐसा हो चुका है। आजम खान वहां उ0प्र0 के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ गये थे। दोनों समझ गये कि इस प्रकरण से उन्हें राजनीतिक लाभ हो सकता है। इसलिए उन्होंने यात्रा निरस्त कर दी और भारत आकर खूब शोर किया।
शाहरुख एक प्रसिद्ध →आगे पढ़ें ..





लोग समझते हैं कि नौकरी से अवकाश प्राप्त कर लेने के बाद व्यक्ति की मौज ही मौज है; पर इसमें कितनी मौज है और कितनी मौत, यह भुक्तभोगी ही जानता है। किसी ने ठीक ही कहा है कि ‘‘जाके पांव न पड़ी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई।’’ विश्वास न हो, तो शर्मा जी से पूछ लें।
हुआ यह कि पिछले दिनों हमारे मित्र शर्मा जी भी उस परम गति को प्राप्त हो गये, जिसे हर कर्मचारी एक न एक दिन प्राप्त करता ही है। चालीस साल तक जिस
व्यंग्य बाण : करूं क्या आस निरास भयी..
मुझे बड़ी आशा थी कि कम से कम इस बार तो दुनिया नष्ट हो ही जाएगी। कई दिन से समाचार पत्र छाप रहे थे कि माया कैलेंडर के अनुसार 21 दिसम्बर, 2012 पृथ्वी के जीवन का अंतिम दिन है। दूरदर्शन वाले भी यही कहानी सुना रहे थे; पर कुछ नहीं हुआ। जैसी दुनिया कल थी, वैसी ही आज है। बल्कि कल से कुछ बदतर ही है। वर्मा जी को ज्योतिष और कैलेंडरों पर कोई विश्वास नहीं है। इसलिए वे इस
श्रद्धांजलि लेख -
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पांचवें सरसंघचालक श्री कुप्.सी. सुदर्शन मूलतः तमिलनाडु और कर्नाटक की सीमा पर बसे कुप्पहल्ली (मैसूर) ग्राम के निवासी थे। कन्नड़ परम्परा में सबसे पहले गांव, फिर पिता और फिर अपना नाम बोलते हैं।
उनके पिता श्री सीतारामैया वन-विभाग की नौकरी के कारण अधिकांश समय मध्यप्रदेश में ही रहे और वहीं रायपुर (वर्तमान छत्तीसगढ़) में 18 जून, 1931 को श्री सुदर्शन
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