About विजय कुमार

राष्ट्र को समर्पित जीवन जीने वाले एक प्रखर विचारक और स्वतंत्र पत्रकार | आपसे इस मेल पते पर संपर्क किया जा सकता है | vj.kumar.1956@gmail.com

जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध !

पिछले दिनों उ0प्र0 शासन के एक मंत्री आजम खान को अमरीका के हवाई अड्डे पर जांच के लिए कुछ देर रोका गया। सुना है इससे पहले शाहरुख खान और पूर्व राष्ट्रपति डा0 कलाम के साथ भी ऐसा हो चुका है। आजम खान वहां उ0प्र0 के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ गये थे। दोनों समझ गये कि इस प्रकरण से उन्हें राजनीतिक लाभ हो सकता है। इसलिए उन्होंने यात्रा निरस्त कर दी और भारत आकर खूब शोर किया। शाहरुख एक प्रसिद्ध →आगे पढ़ें ..

यह राग नहीं, रोग दरबारी है !

लोग समझते हैं कि नौकरी से अवकाश प्राप्त कर लेने के बाद व्यक्ति की मौज ही मौज है; पर इसमें कितनी मौज है और कितनी मौत, यह भुक्तभोगी ही जानता है। किसी ने ठीक ही कहा है कि ‘‘जाके पांव न पड़ी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई।’’ विश्वास न हो, तो शर्मा जी से पूछ लें। हुआ यह कि पिछले दिनों हमारे मित्र शर्मा जी भी उस परम गति को प्राप्त हो गये, जिसे हर कर्मचारी एक न एक दिन प्राप्त करता ही है। चालीस साल तक जिस →आगे पढ़ें ..

वो जीते जो पहले मारे

युद्ध और मनोबल बात बहुत पुरानी है। एक राजा के दरबार में दूर देश से कोई पहलवान आया। उसने राजा से कहा कि यदि इस राज्य में कोई उससे तगड़ा पहलवान है, तो उसे हरा दे; अन्यथा उसे विजेता घोषित कर दिया जाए। राजा ने ढिंढोरा पिटवा दिया। तीसरे दिन एक मरियल शरीर वाले लुहार ने यह कहकर उसे हराने का दावा किया कि इसके लिए उसे एक महीने का समय चाहिए। तब तक पहलवान को अतिथिगृह में ठहरा दिया जाए। राजा ने ऐसा →आगे पढ़ें ..

जगदी का काढ़ा

बात लगभग 50 साल पुरानी है। हमारे मोहल्ले में एक ‘जगदी’ रहती थीं। उनका असली नाम क्या था, यह तो वही जानें; पर ‘जगत दादी’ से ‘जगदादी’ होते हुए यह जगदी तक पहुंच गया, और अब इसी नाम से उन्हें पूरा गांव जानता और पुकारता था। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, वे मोहल्ले में सबसे बुजुर्ग और अनुभवी महिला थीं। बच्चों की हारी-बीमारी तो वे उसका चेहरा देखकर ही समझ जाती थीं। उनके पास ऐसी सब बीमारियों के लिए रामबाण →आगे पढ़ें ..

अंकल कहि-कहि जायं

भारतीय नव वर्ष और अंग्रेजी न्यू ईयर में बड़ा भारी अंतर है। अंग्रेजी साल के आते समय भीषण सरदी से जनजीवन बेहाल रहता है। रजाई, कंबल और स्वेटर से बाहर निकलने का मन ही नहीं करता। धन्य है वह वैज्ञानिक, जिसने मोबाइल फोन का आविष्कार किया। उसकी कृपा से लोग रजाई में घुसे-घुसे ही एस.एम.एस. कर अपने मिलने वालों को बधाई पहुंचा देते हैं। फीकी बधाई देने का सबसे सस्ता और सरल उपाय अभी तक तो यही है। पर भारतीय →आगे पढ़ें ..
February 4, 2013

विवाद टाइम्स (व्यंग)

शर्मा जी खाली बैठे-बैठे अब ऊबने लगे थे। उनकी पत्नी भी चाहती थी कि वे किसी धंधे से लगकर दिन भर बाहर रहें, जिससे वे अपने पड़ोस की महिलाओं के साथ बैठकर बात कर सकें। दो-चार दिन ऐसा न होने पर उनके पेट में दर्द होने लगता था। इधर सेठ चंदूलाल चमचाकर एक नया अखबार निकालना चाहते थे। उनके पास कई तरह से कमाया हुआ बेहिसाब पैसा था। वे जानते थे कि मीडिया वालों पर कोई आसानी से हाथ नहीं डालता। इसलिए वे अखबार →आगे पढ़ें ..
February 3, 2013

लोकसभा चुनाव की बिसात तैयार

भारत में 2014 के लोकसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के बावजूद मुख्य दारोमदार कांग्रेस और भाजपा पर ही है। इसलिए इनकी हर गतिविधि पर देश-विदेश के राजनीतिक विश्लेषकों की गहरी नजर है। पिछले दिनों जयपुर में कांग्रेस का चिंतन शिविर हुआ। इसमें औपचारिक विषय जो भी हों; पर असली मुद्दे कांग्रेस विरोधी वातावरण से खिसकती जमीन, भ्रष्टाचार, अनिर्णय की स्थिति, कानून-व्यवस्था →आगे पढ़ें ..
January 26, 2013

संघ के प्रति ये दुराव क्यों ?

कुछ दिन पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिन्दे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के बारे में एक बेहूदा बयान दिया है। उनके अनुसार संघ और भाजपा के शिविरों में आतंकवाद का प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे पूर्व श्री चिदम्बरम् ने भी गृहमंत्री रहते हुए ‘भगवा आतंकवाद’ का शिगूफा छेड़ा था। राहुल बाबा को भी संघ और सिमी में कोई अंतर नजर नहीं आता।  इन राजनेताओं का चश्मा जाने किस देश और दुकान से बन →आगे पढ़ें ..

बीते साल ‘राष्ट्रीय गौरव’ का दिन 16 दिसम्बर बना ‘राष्ट्रीय कलंक’ का दिन

16 दिसम्बर को हम भारत भर में ‘विजय दिवस’ के रूप में मनाते हैं। 1971 में इसी दिन ढाका में हमारे वीर सैनिकों ने पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों को हथियार डालने पर मजबूर कर दिया था। पर राष्ट्रीय गौरव का यह दिन वर्ष 2012 में ‘राष्ट्रीय कलंक’ का दिन बन गया। देश की राजधानी दिल्ली में, पुलिस की नाक के नीचे, एक 23 वर्षीय युवती के साथ चलती बस में जो दुष्कर्म हुआ, वह इस वर्ष की क्रूरतम घटना है। हर वर्ष 16 दिसम्बर को →आगे पढ़ें ..
December 31, 2012

बयानवीर

किसी ने कहा है वीर भोग्या वसुंधरा। अर्थात वीर लोग ही इस धरती पर सत्ता सुख भोगते हैं। सत्ता के साथ सभी तरह की भौतिक सुख-सुविधाएं अपने आप ही आ जाती हैं।    कुरुक्षेत्र के मैदान में जब अर्जुन दोनों  ओर  अपने नाते-रिश्तेदारों को देखकर मोह से ग्रस्त हुआ, तो भगवान श्रीकृष्ण ने उसे गीता का उपदेश देते हुए यही कहा था कि यदि जीते तो पृथ्वी का राज्य भोगने का अवसर मिलेगा, और यदि वीरगति को प्राप्त हुए, →आगे पढ़ें ..
December 29, 2012

शिष्टाचार हमारी परम्परा है !

शर्मा जी के गुस्से की बात न पूछें। भगवान न करे कभी आपको ऐसे में उनके सामने जाने का मौका मिले। गुस्से में उनका चेहरा ऐसा लगता है मानो जून में हीटर जला दिया हो।  पर मैं उनका पुराना मित्र हूं, इसलिए मुझे ऐसे माहौल को झेलने का अभ्यास है; पर कभी-कभी बात इतनी गंभीर हो जाती है कि मुझे ठंड में भी पसीना आ जाता है।    बात अधिक पुरानी नहीं है। आपने भी अखबार और दूरदर्शन पर पढ़ा या सुना होगा। हमारे परम आदरणीय →आगे पढ़ें ..
December 25, 2012

लो जी बच गयी दुनिया !

व्यंग्य बाण :  करूं क्या आस निरास भयी.. मुझे बड़ी आशा थी कि कम से कम इस बार तो दुनिया नष्ट हो ही जाएगी। कई दिन से समाचार पत्र छाप रहे थे कि माया कैलेंडर के अनुसार 21 दिसम्बर, 2012 पृथ्वी के जीवन का अंतिम दिन है। दूरदर्शन वाले भी यही कहानी सुना रहे थे; पर कुछ नहीं हुआ। जैसी दुनिया कल थी, वैसी ही आज है। बल्कि कल से कुछ बदतर ही है।   वर्मा जी को ज्योतिष और कैलेंडरों पर कोई विश्वास नहीं है। इसलिए वे इस →आगे पढ़ें ..
December 9, 2012

व्यंग्य बाण: भाषण की दुकान

अंग्रेजी की एक कहावत के अनुसार खाली दिमाग शैतान का घर होता है। यह कहावत संभवतः बच्चों और युवाओं के लिए बनाई गयी होगी; पर शर्मा जी ने जब से अवकाश लिया है, तब से यह उन पर भी फिट बैठ रही है।  उनके इस खालीपन से सबसे अधिक परेशान शर्मानी मैडम हैं। चूंकि कभी-कभी शर्मा जी को सनक सवार हो जाती है और वे रसोई में घुसकर कुछ नये व्यंजन बनाने लगते हैं।  एक बार उनके दिमाग में आया कि करेले का हलुवा बनाया जाए। →आगे पढ़ें ..
November 15, 2012

पुस्तक का गर्भकाल

प्राणी शास्त्र के विद्यार्थियों को यह बताया जाता है कि किस प्राणी का गर्भकाल कितना होता है ? अंडे से जन्म लेने वाले प्राणियों का विकास मां के पेट के अंदर तथा फिर बाहर भी होता है। जो प्राणी सीधे मां के पेट से जन्मते हैं, उनमें से कोई छह मास गर्भ में रहता है, तो कोई सोलह मास। हो सकता है कोई भौतिकवादी इसे ईश्वर का अन्याय कहे; पर हम तो इसे उस जगत नियन्ता की माया कहकर चुप ही रहते हैं।   प्राणियों →आगे पढ़ें ..
October 19, 2012

हाथ मिलाएं, पर ध्यान से

लगता है कि अखबार वालों के पास छापने के लिए विषयों की कमी हो गयी है, इसलिए वे न जाने कहां-कहां से लाकर ऊल जलूल बातें त्यौहार के मौसम में पाठकों को परोस देते हैं। शर्मा जी कल बहुत दिन बाद मिले, तो मैंने उत्साहपूर्वक हाथ आगे बढ़ाते हुए उन्हें दीपावली की बधाई देनी चाही; पर उन्होंने हाथ मिलाने की बजाय मुझे अखबार की एक कतरन थमा दी। - शर्मा जी, मेरे पास इस समय चश्मा नहीं है। इसलिए आप ही बताइये →आगे पढ़ें ..
October 13, 2012

मौन मोहन सिंह का मौन भंग

शर्मा जी कल बहुत दिन बाद मिले, तो चेहरा ऐसा लग रहा था मानो साठ वाट के बल्ब में सौ वाट की चमक आ गयी हो। होठों पर हंसी शरद पूर्णिमा की स्वच्छ चांदनी की तरह चारों ओर छिटक रही थी। मन इतना गद्गदायमान हो रहा था, जैसे बराक ओबामा ने अमरीका में राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के बाद उन्हें उपराष्ट्रपति नियुक्त कर दिया हो। उनकी चाल ऐसी लग रही थी मानो एक पैर धरती पर, तो दूसरा मंगल ग्रह पर रख रहे हों।- क्या →आगे पढ़ें ..

पंचतत्व का सेवन करें , स्वस्थ रहें

सबसे पहले मैं ये स्पष्ट कर दूं कि मैं कोई चिकित्सक या खानपान विशेषज्ञ नहीं हूं। किस व्यक्ति को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इस बारे में भी मेरा कुछ अध्ययन नहीं है; पर भोजन और पंचतत्व के संबंध में बुजुर्गों से सुनी हुई कुछ बातें सबमें बांटना चाहता हूं।  पंचतत्व अर्थात पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। हमें अपने खानपान में प्रतिदिन इन पांचों तत्वों का भी सेवन करना चाहिए। ऐसा होने पर हम अधिकाधिक →आगे पढ़ें ..
September 22, 2012

हिन्दुद्रोही मौलाना मोहम्मद अली जौहर

गत 18 सितम्बर, 2012 को रामपुर (उ0प्र0) में मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर एक विश्वविद्यालय का उद्घाटन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया। इस अवसर पर उनके पिता श्री मुलायम सिंह तथा प्रदेश की लगभग पूरी सरकार वहां उपस्थित थी।  इस वि0वि0 के सर्वेसर्वा रामपुर से विधायक तथा प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आजम खां हैं। उन्होंने इसे अपना स्वप्नदर्शी प्रकल्प बताते हुए मो0 अली जौहर को महान देशभक्त →आगे पढ़ें ..
September 15, 2012

नवीन सोच के धनी : श्री कुप्.सी. सुदर्शन

श्रद्धांजलि लेख - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पांचवें सरसंघचालक श्री कुप्.सी. सुदर्शन मूलतः तमिलनाडु और कर्नाटक की सीमा पर बसे कुप्पहल्ली (मैसूर) ग्राम के निवासी थे। कन्नड़ परम्परा में सबसे पहले गांव, फिर पिता और फिर अपना नाम बोलते हैं। उनके पिता श्री सीतारामैया वन-विभाग की नौकरी के कारण अधिकांश समय मध्यप्रदेश में ही रहे और वहीं रायपुर (वर्तमान छत्तीसगढ़) में 18 जून, 1931 को श्री सुदर्शन →आगे पढ़ें ..
September 11, 2012

हिन्दी ओढ़ें, देवनागरी बिछाएं

व्यंग्य बाण पिछले दिनों किसी काम से शर्मा जी के घर गया, तो उनकी मेज पर चिट्ठियों और निमन्त्रण पत्रों का ढेर लगा था। उन्होंने मेरी ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया और पत्रों से उलझे रहे। - क्या बात है शर्मा जी, बड़े व्यस्त लग रहे हैं ? - हां भई, 14 सितम्बर आ रहा है न ? - इससे आपकी व्यस्तता का क्या संबंध है ? - तुम अनपढ़ आदमी इसे नहीं समझोगे। 14 सितम्बर हम हिन्दी वालों के लिए बड़े गर्व का दिन है। 1949 में इसी →आगे पढ़ें ..