About त्रिपुरारी कुमार

त्रिपुरारी कुमार , भागलपुर के जाने -माने पत्रकार हैं . १० वर्षों से पत्रकारिता -जगत में सक्रिय हैं .प्रभात खबर, हिन्दुस्तान , जैन टीवी ,इंडिया न्यूज़, और ए.एन.आई जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम किया . भागलपुर में ही लोकल चैनल "आपकी आवाज " का संपादन करते हुए नई उचाईयों पर ले गये . वर्तमान में "365 दिन " न्यूज़ चैनल में स्पेशल प्रोग्राम हेड के नाते अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं . .इनसे संपर्क करें : मोबाइल- 09334642020, ईमेल -tripurarinews@gmail.com

आरोप-प्रत्यारोप में अटका झारखण्ड

बुनियादी सुविधाओं से भी मरहूम झारखंड में किसी भी विभाग की स्थिति अच्छी नहीं है। कह सकते हैं कि अच्छी स्थिति ना तो यहां के लोग चाहते हैं और ना ही राजनेता। रह गई बात नौकरशाहों की तो उन्हें आम आदमी की बुनियादि जरूरतों से कोई खास वास्ता होता नहीं है इसलिए वे इस ओर उतना ही ध्यान देते हैं जितना उन्हें राजनेताओं द्वारा कहा जाता है। अगर वे अपना संपूर्ण दिमाग वाकई में विकास करने में लगा दें तो →आगे पढ़ें ..

पड़ोस में विकास की गंगा ,झारखण्ड है प्यासा

झारखंड जब बना तो यहां के लोगों का एक ही मकसद था कि अलग राज्य बनाकर विकास के पहिए में तेज गति दी जाय। पर शायद झारखंड के राजनेताओं का समय के साथ ही मिजाज भी बदल गया तभी तो राज्य आज फिर उसी पायदान पर खड़ा है जहां आज से दस साल पहले था। बिहार नाम ही ऐसा है जिसे लोग बड़े ही शौक से लेते हैं और इस नाम को लेने के बाद एक सूकून की प्राप्ती होती है। ये अलग बात है कि बिहार और विहार ये दो शब्द हैं और दोनों के →आगे पढ़ें ..

नक्सलियों के आय के प्रमुख स्रोत

निशा दास की रिपोर्ट रांची से झारखंड में नक्सल समस्या एक जटिल समस्या बनी हुई है। लंबे समय से इस जंजाल से निकलने का यहां के राजनेताओं के साथ -साथ नौकरशाहों ने भी प्रयास किया ,पर अबतक कोई खास सफलता इसमें उन्हें नहीं मिल पाई है। आईए एक नजर डालते हैं नक्सलियों के आय के मुख्य श्रोतों पर। नक्सलियों के दिन प्रतिदिन मजबूती से उभरने का सबसे बड़ा कारण है यहां के राजनेताओं के साथ -साथ नौकरशाहों →आगे पढ़ें ..

झारखंड में ट्रांस्फर -पोस्टींग का खेल

झारखंड में जब -जब नई सरकार बनीं तब-तब अधिकारियों के ट्रांस्फर -पोस्टींग का खेल चरम पर रहा। यहां के हुक्मरानों ने अधिकारियों को अपने मन मर्जी से ही चलाया। उनके उपर अपनी मनमानी का डंडा चलाया। उनके बेसकीमती दिमाग का इस्तेमाल अगर किया तो सिर्फ भ्रष्टाचार के मामले में विकास के मामले में ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया। झारखंड की भी गजब की फितरत रही है। इसका इतिहास ही रहा है इसने देश के मानचित्र पर →आगे पढ़ें ..

चुनाव और चुनौती

चुनाव में दो तरह की चुनौती होती हैं एक तो जनता को रिझाने की और दूसरी बिखरते कुनबे को समेटने की। नेता और दल सही मायनों में वही कहलाता है जो इन चुनौतियों के झंझावत को झेलकर सत्ता दिला दें। बिहार में इन दिनों ये नजारा आराम से देखा जा सकता है। हर तरफ चुनावी चैपाल है और चैपाल पर चुनावी पंडितों का जमावड़ा। नेता कुनबे को समेंट कर रख नहीं पा रहे और मतदाताओं को रिझाने की बात कर रहे हैं। अब साधू के →आगे पढ़ें ..

झारखंड में फ़िर से बनेगी सरकार ?

झारखंड में सरकार बनाने का फंडा जारी है। भाजपा ,झामुमो और आजसू की गठजोड़ से बनी सरकार गिरने के बाद एक बार फिर सरकार बनाने की मुहिम पूरे जोर पर है। झारखंड विधानसभा ने इन दस सालों में सात मुख्यमंत्री देख लिए हैं। इस बार जब भी सरकार बनेगी तो वो आठवां मुख्यमंत्री देखेगी । सूबे के विधानसभा की भी क्या तकदीर है जब से विधानसभा का निर्माण हुआ है तब से लेकर आज तक राजनीतिक झंझावतों को ही झेल रही है। →आगे पढ़ें ..

जिधर मिले मलाई , उधर के हैं भाई !

बिहार में विधान सभा चुनाव की घोषणा हो गई है। इसे देख कर कुछ दिनों से बिहार में हर दिन राजनीति में कुछ-न-कुछ हो रहा है। वोट की राजनीति करने के लिए यहां के नेता कुछ भी करने को तैयार हैं। इसी क्रम में नीतीश सरकार में पूर्व आबकारी मंत्री रहे जमशेद ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया। एक नजर बिहार की वर्तमान राजनीति पर। कहते हैं राजनीति में सभी एक ही थैली के चट्टे -बट्टे होते हैं। कब ,कैसे और किधर पाला →आगे पढ़ें ..

चुनाव नजदीक तो नेता नजदीक

चुनाव नजदीक तो  नेता नजदीक। जी हां हम बात कर रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा जारी रिपोर्ट कार्ड की। उन्होंने अपने कार्यकाल में किये कामों की रिपोर्ट कार्ड जारी की है। बिहार में चुनाव अक्टूबर,नवंबर में होना तय है। इसको लेकर सभी राजनीतिक दलों के नेता अपने-अपने तरीके से जनता को लुभाने का प्रयास करना शुरू कर दिये हैं। ये बात अलग है कि चुनाव के समय में उनका रिपोर्ट कार्ड →आगे पढ़ें ..

पत्थरों पर है मानव का भरोसा

यूँ तो रत्नों की परंपरा आदिकाल से ही चली आ रही है। दुनियां में जितने भी युग आए ,चाहे वो सत्युग हो द्वापर हो या फिर कलियुग। युग-युगांतर से रत्नों की महत्ता आज भी बरकरार है। समय के साथ सबकुछ बदला, अगर नहीं बदली ,तो वो है रत्नों की मांग। आईए जानते हैं रत्नों के कौन-कौन से प्रकार होते हैं। रत्नों की शुरुआत करते हैं माणिक्य से। माणिक्य का रंग लाल होता है,वैसे ये गुलाबी,काला,और नीले रंग में भी पाया →आगे पढ़ें ..

सीएम संग पीएम बोले

नक्सली हिंसा से निपटने की ताजा रणनीति के तहत केन्द्र सरकार ने नक्सल प्रभावित राज्यों के सीएम ( मुख्यमंत्रियों) के साथ प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के साथ एक बैठक आयोजित की। इस बैठक में सभी नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित गृह मंत्री पी चिदंबरम ने भी अपने सुझाव को शामिल किया। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों और →आगे पढ़ें ..

नए राज्यों की मांग और कुछ सवाल

आखिर में जनता को क्या हुआ फायदा ? जनता की गाढी कमाई को क्यों किया बर्बाद ? आखिर में फिर नए राज्यों की मांग क्यों ? नए राज्यों के निर्माण से आखिर किसको हुआ फायदा ? तेलंगाना को अलग राज्य बनाने की मांग ने और भी कई राज्यों के नेताओं को एक बडा मुददा दे दिया है। जिधर देखो उधर हीं अलग राज्य की मांग का नारा। आखिर में और कितने अलग राज्य बनेंगे ? इन दिनों तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के लिये →आगे पढ़ें ..