आरोप-प्रत्यारोप में अटका झारखण्ड
0बुनियादी सुविधाओं से भी मरहूम झारखंड में किसी भी विभाग की स्थिति अच्छी नहीं है। कह सकते हैं कि अच्छी स्थिति ना तो यहां के लोग चाहते हैं और ना ही राजनेता। रह गई बात नौकरशाहों की तो उन्हें आम
बुनियादी सुविधाओं से भी मरहूम झारखंड में किसी भी विभाग की स्थिति अच्छी नहीं है। कह सकते हैं कि अच्छी स्थिति ना तो यहां के लोग चाहते हैं और ना ही राजनेता। रह गई बात नौकरशाहों की तो उन्हें आम
झारखंड जब बना तो यहां के लोगों का एक ही मकसद था कि अलग राज्य बनाकर विकास के पहिए में तेज गति दी जाय। पर शायद झारखंड के राजनेताओं का समय के साथ ही मिजाज भी बदल गया तभी तो
निशा दास की रिपोर्ट रांची से झारखंड में नक्सल समस्या एक जटिल समस्या बनी हुई है। लंबे समय से इस जंजाल से निकलने का यहां के राजनेताओं के साथ -साथ नौकरशाहों ने भी प्रयास किया ,पर अबतक कोई खास सफलता इसमें
झारखंड में जब -जब नई सरकार बनीं तब-तब अधिकारियों के ट्रांस्फर -पोस्टींग का खेल चरम पर रहा। यहां के हुक्मरानों ने अधिकारियों को अपने मन मर्जी से ही चलाया। उनके उपर अपनी मनमानी का डंडा चलाया। उनके बेसकीमती दिमाग का
चुनाव में दो तरह की चुनौती होती हैं एक तो जनता को रिझाने की और दूसरी बिखरते कुनबे को समेटने की। नेता और दल सही मायनों में वही कहलाता है जो इन चुनौतियों के झंझावत को झेलकर सत्ता दिला दें।
झारखंड में सरकार बनाने का फंडा जारी है। भाजपा ,झामुमो और आजसू की गठजोड़ से बनी सरकार गिरने के बाद एक बार फिर सरकार बनाने की मुहिम पूरे जोर पर है। झारखंड विधानसभा ने इन दस सालों में सात मुख्यमंत्री
बिहार में विधान सभा चुनाव की घोषणा हो गई है। इसे देख कर कुछ दिनों से बिहार में हर दिन राजनीति में कुछ-न-कुछ हो रहा है। वोट की राजनीति करने के लिए यहां के नेता कुछ भी करने को तैयार
चुनाव नजदीक तो नेता नजदीक। जी हां हम बात कर रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा जारी रिपोर्ट कार्ड की। उन्होंने अपने कार्यकाल में किये कामों की रिपोर्ट कार्ड जारी की है। बिहार में चुनाव अक्टूबर,नवंबर में होना
यूँ तो रत्नों की परंपरा आदिकाल से ही चली आ रही है। दुनियां में जितने भी युग आए ,चाहे वो सत्युग हो द्वापर हो या फिर कलियुग। युग-युगांतर से रत्नों की महत्ता आज भी बरकरार है। समय के साथ सबकुछ
नक्सली हिंसा से निपटने की ताजा रणनीति के तहत केन्द्र सरकार ने नक्सल प्रभावित राज्यों के सीएम ( मुख्यमंत्रियों) के साथ प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के साथ एक बैठक आयोजित की। इस बैठक में सभी नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों