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2012/02/12 12:37 pm
आप अंग्रेजी, हिंदी या किसी क्षेत्रीय भाषा का अखबार उठाइए आपको उनमें वैलेनटाइन डे छाया मिलेगा। उनमें इससे संबंधित जितने फीचर नहीं होंगे, उनसे कहीं ज्यादा उन वस्तुओं के विज्ञापन होंगे जिनमें प्रेमी-प्रेमिकाओं को इस बात के लिए लुभाया-ललचाया जा
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2011/10/13 11:31 am
-राजेश त्रिपाठी बुधवार की शाम तीन युवक प्रशांत भूषण के सुप्रीम कोर्ट के पास स्थित चैंबर में प्रवेश करते हैं और उन पर अचानक हमला कर देते हैं। उन पर थप्पड़-घूंसे बरसाये जाते हैं, कुर्सी से खींच कर जमीन पर
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2011/10/10 12:04 pm
-राजेश त्रिपाठी जब अन्ना ने भ्रष्टाचार और घूसतंत्र के खिलाफ अहिंसक जन-प्रतिरोध का धर्मयुद्ध छेड़ा था, सारा देश तन-मन-धन से उनके साथ जुट गया था। उनमें लोगों को दूसरा गांधी नजर आने लगा था। वैसे यह सच है कि कोई
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2011/09/22 12:35 pm
-राजेश त्रिपाठी गरीबी रेखा के बारे में सरकार के पुराने आंकड़ों पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद संप्रग सरकार ने गरीबी रेखा के निर्धारण के लिए जो नया पैमाना पेश किया है, वह न सिर्फ सरकार की अदूरदर्शिता, अविवेक
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2011/08/27 11:23 am
माननीय सांसदो, दलीय स्वार्थ से ऊपर उठ कर सोचो- राजेश त्रिपाठी देश आज इतिहास के उस संधिकाल से गुजर रहा है, जहां एक ओर जनतंत्र अपनी पूरी ताकत से भ्रष्टाचार के खिलाफ अहिंसक संघर्ष छेड़ चुका है और दूसरी ओर सत्ता
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2011/08/25 9:26 am
-राजेश त्रिपाठी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना है कि वे बहुत दुखी हैं क्योंकि लोग उनकी सरकार को देश की अब तक की सबसे भ्रष्ट सरकार कह रहे हैं। मनमोहन जी धन्यवाद और आभार। यह खुशी और राहत की बात
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2011/08/24 11:45 pm
राजेश त्रिपाठी अन्ना आपसे करबद्ध प्रार्थना है अपने देश के इस अदने से इनसान के कहने पर भगवान के लिए अनशन तोड़ दीजिए। आपके जज्बे को प्रणाम, उस अक्षय ऊर्जा को प्रणाम जो नौ दिन बाद भी आपको जवां मर्दों
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2011/08/19 12:00 pm
आखिरकार सरकार को अन्नाग्रह के आगे झुकना ही पड़ा। उसे अन्ना की मांगें माननी ही पड़ीं। यह एक व्यक्ति विशेष की विजय नहीं बल्कि जनशक्ति की विजय है। वह जनशक्ति जिसके आगे बड़ी-बड़ी शक्तियां नत मस्तक होने को बाध्य होती
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2011/06/17 10:51 am
राजेश त्रिपाठी भारत की जीवनरेखा पावन सुरसरि जिन्हें हम श्रद्धा से गंगा मैया कह कर पुकारते हैं की रक्षा के लिए 115 दिनों से अनशनरत स्वामी निगमानंद की सोमवार 13 जून को कोमा की अवस्था में हुई मौत अपने पीछे
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2011/04/06 10:46 pm
दूसरे गांधी के नाम से प्रसिद्ध अन्ना हजारे 5 अप्रैल से दिल्ली के जंतर-मंतर में आमरण अनशन के लिए बैठ गये हैं। देश की राजनीति में एड़ी से चोटी तक व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ यह उनका धर्मयुद्ध है जिसमें उनको