सरकार यानी सबसे बड़ा गुंडा…
1लेखक – शिवेंद्र सिंह चौहान बेटे के साथ पोगो चैनल पर तकेशीज़ कासल देख रहा था। राक्षस जैसा दिखने वाला एक आदमी मरियल लेकिन खुद को फन्ने खां समझने वाले कंटेस्टेंट्स को कीचड़ में लथाड़ रहा था। अचानक ध्यान आया कि आईपीएल
लेखक – शिवेंद्र सिंह चौहान बेटे के साथ पोगो चैनल पर तकेशीज़ कासल देख रहा था। राक्षस जैसा दिखने वाला एक आदमी मरियल लेकिन खुद को फन्ने खां समझने वाले कंटेस्टेंट्स को कीचड़ में लथाड़ रहा था। अचानक ध्यान आया कि आईपीएल
अभी पिछले दिनों एनबीटी डॉट कॉम ने अपने पाठकों को जिन खबरों से अप्रैल फूल बनाया, उनमें एक खबर थी – मोदी होंगे बीजेपी के पीएम कैंडिडेट। खबर भले ही फेक थी, लेकिन उस पर कॉमेंट्स एकदम असली आए। और
लेखा-जोखा ले रही हैं प्रियंका सिंह : एक सदाचारी और हिम्मती शख्स अपनी आत्मा की आवाज को साफ-साफ सुन सकता है। लेकिन किसी भी बुरे आदमी में यह गुण गायब होता है। उसकी चेतना की संवेदनशीलता भ्रष्टाचार या बुरे कामों
अभी हाल की दो घटनाओं ने भारतीय राजनीति के विरोधाभासों को एक बार फिर रेखाकित कर दिया। तमाम आशंकाओं को निर्मूल सिद्ध करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी एक चिट्ठी (समन नहीं) की पावती के बाद न केवल विशेष
यह लज्जास्पद ही नहीं, बल्कि घृणास्पद भी है कि देश का नेतृत्व कर रही कांग्रेस देश-दुनिया की समस्याओं से जूझने की बजाय यह सुनिश्चित करने में लगी हुई है कि हिंदी फिल्मों के अप्रतिम अभिनेता अमिताभ बच्चन और उनके परिवार
आजकल दिल्ली में जो कुछ भी हो रहा है, कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए ही। चाहे वह शीला दीक्षित के कान में दर्द हो या फिर आपकी गली के नुक्कड़ का चौड़ीकरण। सरकार ने गेम्स के आयोजन के लिए पैसा जुटाने के
अभी 26/11 के मुख्य षड्यंत्रकारियों में से एक डेविड कोलमैन हेडली से पूछताछ में भारत सरकार की असफलता की स्याही सूखी भी नहीं थी कि रेल मंत्रालय के उस विज्ञापन की चर्चा उभरकर आई, जिसमें दिल्ली को पाकिस्तान में दिखाया
कभी-कभी पी. चिदंबरम भारत के गृह मंत्री कम, अमेरिका के वकील ज्यादा लगते हैं। वैसे शायद वे भारत के एकमात्र ऐसे राजनीतिज्ञ हैं, जो अपनी बात को टो-टूक शब्दों में कहते हैं। वे अपनी कही बात में निहितार्थ, गूढार्थ और
साल भर भी नहीं हुआ जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त इसी विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में कुख्यात मानवाधिकारवादी तीस्ता सीतलवाड को गुजरात के बारे में भयानक हत्याओं और उत्पीड़न की झूठी कहानियां गढ़ने, झूठे गवाहों की फौज तैयार
महाराष्ट्र की संवेदनहीन सरकारी राजनीति पर मानवाधिकार आयोग ने अपनी एक अनुशंसा के जरिए कड़ी चोट मारी है। उत्तर भारतीयों के खिलाफ पिछले साल चली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) की मुहिम में बिहार मूल के दो नागरिकों की मृत्यु पर