गोधरा के शहीदों को नमन
027 फरवरी 2002. ‘आधुनिक’ भारत के इतिहास का एक और काला दिन. इसी दिन इस ‘स्वतंत्र’ और “धर्मनिरपेक्ष” देश मेंसुबह 7:43 बजे गुजरात के गोधरा स्टेशन परइसी देश के 58 नागरिकों (23 पुरुषों, 15 महिलाओं और 20 बच्चों) को साबरमती
27 फरवरी 2002. ‘आधुनिक’ भारत के इतिहास का एक और काला दिन. इसी दिन इस ‘स्वतंत्र’ और “धर्मनिरपेक्ष” देश मेंसुबह 7:43 बजे गुजरात के गोधरा स्टेशन परइसी देश के 58 नागरिकों (23 पुरुषों, 15 महिलाओं और 20 बच्चों) को साबरमती
,खबर है कि ड्रग्स बेचने के आरोप में कलइरानमें 11 लोगों को फांसी दे दी गई.वहीं दूसरी ओरआज से ठीक तीन वर्षों पूर्व 26 नवंबर 2011 को मुंबई हमले में मारे गए सैकड़ोंनिरपराध नागरिकों का हत्यारा भारत में आज भी
हाल ही में उप्र में बहुजन समाज पार्टी की सरकार द्वारा पारित राज्य के चार भागों में बाँटने का एकतरफा प्रस्ताव विधानसभा में पारित किए जाने के बाद राज्यों के पुनर्गठन और छोटे राज्यों के लाभ-हानि को लेकर एक बार
हाल ही में, जापान में भूकंप और सुनामी के बाद जो हुआ, क्या वह हमारे लिये एक चेतावनी नहीं है? स्वयं को आधुनिक कहने वाली वर्तमान सभ्यता का हमेशा से ये विचार रहा है कि मनुष्य प्रकृति का स्वामी है।
दीपावली का उल्लेख हो और दीपों की बात न हो, ये संभव नहीं है। अमावस की रात में आने वाली दीपावली को ये छोटे-छोटे दीप ही रोशन करते हैं और हमें प्रेरणा देते हैं कि जिस तरह एक छोटा-सा दीपक अँधेरे को दूर कर देता है, उसी तरह हमारा एक छोटा प्रयास भी एक दिन कोई बड़ा परिवर्तन ला सकता है। बस! मन में उत्साह और अपने संकल्प की पूर्ति के लिये लगन होनी चाहिये। दीपावली के इस अवसर पर दीपों की बात निकली, तो मुझे चाणक्य के जीवन का एक प्रसंग आ रहा है।