मेरे सुभाष को संजीवनी पिला दे…..
0आज फिर से नींव दरक रही है, हाथों से हमारी आजादी सरक रही है, घटा की तरह कोई हमपे छ रहा है, हा देव! क्या फिर से अंधकार आ रहा है? इस अँधेरे के अवसान को अन्लपुन्ज दिला दे, या
आज फिर से नींव दरक रही है, हाथों से हमारी आजादी सरक रही है, घटा की तरह कोई हमपे छ रहा है, हा देव! क्या फिर से अंधकार आ रहा है? इस अँधेरे के अवसान को अन्लपुन्ज दिला दे, या
परम-पूज्य क्रन्तिकारी शहीद भगत सिंह को सुभाष की भेंट…….. १)आखिर क्यूँ हुवा तू बलिदान भगत सिंह? सस्ती थी क्या इतनी तेरी जन भगत सिंह जिस देश के खातिर तू हो गया कुर्बान खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह……..
हिंदी करे अब किसपे भरोसा , जहाँ से भी थी आस वहां से मिली धोखा. बेटे भी अब करते हैं बेवफाई, गाली की भाषा में देते हैं सफाई. पहली दफा उसने किया गाँधी पे विश्वास, वो करने लगा ‘हिन्दुस्तानी’ का
नमन शहीदों तुमको शत-शत राष्ट्र हितों की रक्षा को प्राण कर दिए तुमने अर्पित नमन शहीदों तुमको शत-शत जब रोया भारत का कण-कण मातृभूमि की बलिवेदी पर कर दिया समर्पित तुमने जीवन जब किया शत्रु ने वज्रघात असहनीय पीड़ा का
बचा रहे इस देह में , स्वाभिमान का अंश . रखो बचाकर इसीलिए , निज भाषा का दंश .. कथा-कहानी ,लोरियां ,थपकी, लाड-दुलार. अपनी भाषा के सिवा और कहाँ ये प्यार.. निज भाषा ,निज देश पर’ रहा जिन्हें अभिमान. गए