Articles By: श्याम एन रंगा श्याम एन रंगा

जाति की राजनीति में दबते अपराध

जाति की राजनीति में दबते अपराध

2 2012/04/12 4:07 pm

जातिगत राजनीति वर्तमान में भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस देश में जाति के नाम पर राजनैतिक पार्टियां  टिकट वितरण करती है, जाति के नाम पर वोट मांगे जाते हैं और जाति के नाम पर

जीवन की उमंग का प्रतीक ऋतुराज बसंत

जीवन की उमंग का प्रतीक ऋतुराज बसंत

1 2012/02/13 9:22 pm

हमारी संस्कृति में पर्वों का विभाजन मौसम के अनुसार ही होता है। इन पर्वों पर हमारे मन में स्वतः ही उत्साह उत्पन्न हो जाता है। शरत् ऋतु के बाद ग्रीष्म व उसके बाद बरसात उसके बाद पुनः सर्दी का यह

गहराता जलसंकट अस्तित्व का सवाल

गहराता जलसंकट अस्तित्व का सवाल

0 2012/01/07 9:47 am

जल ही जीवन है। जल जीवन का सार है। प्राणी कुछ समय के लिए भोजन के बिना तो रह सकता है लेकिन पानी के बिना नहीं। जल के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। अतः जल

भगवान धनवंतरी व यम पूजन का दिन धनतेरस

भगवान धनवंतरी व यम पूजन का दिन धनतेरस

0 2011/10/24 2:14 pm

आज धनतेरस हैं। 5 दिन के दिपोत्सव का आगाज धनतेरस से ही होता है। हिन्दू पंचाग के अनुसार कार्तिक बदी तेरस को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। आज का दिन आयुर्वेद के अधिष्ठाता भगवान धनवंतरी का जन्मदिन है

अन्ना का आंदोलन और संविधान

अन्ना का आंदोलन और संविधान

1 2011/08/16 9:35 pm

पूरे देश  में अभी अन्ना के आंदोलन की गूँज  है। जिसे देखो वो अन्ना के समर्थन में नारे लगाता दिखाई दे रहा है। जनाब ये लोकतंत्र है यहाँ जनता का राज है सो आंदोलन होना और उसमें लोगों का जुड़ना

गुरू पूर्णिमा पर लगा परम्परागत अखाड़ा

गुरू पूर्णिमा पर लगा परम्परागत अखाड़ा

0 2011/07/16 11:45 am

गुरू पूर्णिमा के पावन पर्व पर स्थानीय मारूति व्यायाम मंदिर के अखाड़े में परम्परागत अखाड़े का आयोजन किया गया। इसमें शहर के कईं पहलवानों ने दांव पेच आजमाए और परम्परागत कुश्ती के दंगल का आयोजन किया गया। इस मौके पर

भावनात्मक क्रिकेट: एक दृष्टिकोण

भावनात्मक क्रिकेट: एक दृष्टिकोण

0 2011/04/03 12:15 pm

भारत ने विश्वकप क्रिकेट का फाइनल मुकाबला जीत लिया है, इस बात की हमें बहुत खुशी  है कि भारत ने आखिर एक खेल में तो अपना परचम फहराया और विश्व  में सर्वश्रेश्ठ होने की बात साबित की। मगर मैं अभी जो

कहाँ गया वो बचपन, छिन गया वो बचपन

कहाँ गया वो बचपन, छिन गया वो बचपन

1 2011/03/25 9:18 pm

इक्कड़ बिक्कड़ बम्बे बो, अस्सी नब्बे पूरा सौ ………पोसम्बा भाई पासेम्बा डाकिये ने क्या किया…….. ये वो शब्द है जो आजकल गली मौहल्लों में सुनने को नहीं मिलते हैं। इन शब्दों के साथ बच्चों का बचपन निकलता था और बच्चे

एक बारात ऐसी भी: बिना दुल्हन का दूल्हा

एक बारात ऐसी भी: बिना दुल्हन का दूल्हा

0 2011/03/16 10:26 am

होली एक विशेष त्यौंहार है और होली पर विभिन्न प्रकार के विचित्र आयोजन भी किए जाते हैं। भारत में होली का त्यौंहार उल्लास, उमंग व परम्पराओं के निर्वहन के साथ मनाया जाता है।जहाँ ब्रज की लट्ठमार होली प्रसिद्ध है वहीं

टूटते परिवार दरकते रिश्ते

टूटते परिवार दरकते रिश्ते

1 2011/03/08 1:28 pm

एक समय था जब लोग समूह में और परिवार में रहना पसंद करते थे। जिसका जितना बड़ा परिवार होता वो उतना ही सम्पन्न और सौभाग्यशाली माना जाता था और जिस परिवार में मेल मिलाप होता था और सम्पन्नता होती थी