Articles By: शंकर दत्त फुलारा

छिनाल बुढ़िया की स्तिथि कांग्रेस की

छिनाल बुढ़िया की स्तिथि कांग्रेस की

3 2010/06/16 2:12 pm

एक बहुत चालाक औरत थी। चरित्रहीन मां-बाप की संतान। इसलिए पैतृक गुण बचपन से ही उसमें विद्यमान थे । वह भी अपने मां-बाप से ज्यादा दुश्चरित्र हो गयी। साथ ही चालाक इतनी, कि; ‘उसकी चरित्रहीनता को समझने – जानने के

कभी गरीब आदमी का साक्षात्कार लिया क्या

कभी गरीब आदमी का साक्षात्कार लिया क्या

3 2010/06/11 11:32 am

आज तक कई साक्षात्कार पढ़-देख चुका। बड़े से बड़े पत्रकार द्वारा; छोटे से छोटे पत्रकार द्वारा लिए गए। बड़े से बड़े व्यक्तित्व का इंटरव्यू। पर एक आदमी का इंटरव्यू मैंने आज तक नहीं देखा। और वो है “गरीब आदमी” इसका

जाति बदलने का सुनहरा अवसर “जातिगत जनगणना”

जाति बदलने का सुनहरा अवसर “जातिगत जनगणना”

1 2010/05/29 6:36 pm

जिन लोगों को अपनी जाति से संतुष्टि नहीं है, ‘क्योंकि जिन्हें छोटी जाति कहा जाता है वह बड़ी जाति में आना चाहते हैं; और जो बड़ी जाति के कहे जाते हैं वह आरक्षण के लाभ के लिए छोटी जाति की

देशभक्ति में परहेज नहीं फ़िर बाबा रामदेव से क्यों : ब्लॉग जगत

देशभक्ति में परहेज नहीं फ़िर बाबा रामदेव से क्यों : ब्लॉग जगत

2 2010/05/27 7:46 pm

मैं बहुत से ब्लॉग देखता हूँ जो देशभक्ति से परिपूर्ण होते हैं| और न केवल देश-समाज-संस्कृति-संस्कारों के उत्थान में लगे हुए हैं; अपितु सभी से इसमें सहयोग क़ी अपेक्षा करते हैं और आह्वान भी करते हैं| इन सबके लिए मैं

आधुनिकता बनाम पौराणिकता

आधुनिकता बनाम पौराणिकता

2 2010/05/26 10:55 am

आज वैज्ञानिक जो भी शोध कर रहे हैं और उसके निष्कर्षों पर पहुँच रहे हैं, ‘वह सब हमारे पौराणिक शास्त्रों में पहले से ही वर्णित है’। पर; क्योंकि आज आसुरी प्रव्रत्ति की प्रबलता के वशिभूत हुए ; ‘हम; या हमारे