Articles By: शैलेन्द्र चौहान

कविता / वनबाजार

कविता / वनबाजार

1 2010/09/28 4:26 pm

बीच जंगल में छिपी हुई झील आसमान में परिचित परिचित पक्षियों की उड़ान छोटे बड़े वृक्ष विभिन्न जाति प्रजाति के है कितना सुंदर वन क्यों न रह जाऊं यहीं ? सायकल पर गुजरते ग्रामवासी बतकही करते सड़क, बिजली, न अस्पताल

प्राकृतिक आपदाएं और प्रबन्धन

प्राकृतिक आपदाएं और प्रबन्धन

2 2010/09/28 7:18 am

१७ अगस्त २०१० को हमेशा शांत रहने वाला व बर्फीले रेगिस्तान के नाम से जाना जाने वाला लेह क्षेत्र, उसके आस पास के गांवों में बादल फटने की त्रासदी ने भयंकर कहर ढाया है । लेह, जम्मू कश्मीर राज्य का

कुछ टूट गया है(कश्मीर समस्या)

कुछ टूट गया है(कश्मीर समस्या)

0 2010/09/28 6:54 am

नव उदारवाद के नाम पर चलाई जा रही नीतियों से लोगों में कितना असंतोष है। लोग अपनी ही चीजों से बेदखल किए जा रहे हैं। विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों से स्थानीय समुदायों की बेदखली हो रही है। भूमंडलीकरण