Articles By: संजय कुमार

‘हिन्द स्वराज’ के बहाने विचार-मंथन

‘हिन्द स्वराज’ के बहाने विचार-मंथन

0 2012/01/21 11:55 am

रंगकर्मी राजेश कुमार के नाटक ’हिन्द स्वराज’ की प्रस्तुति 30 जनवरी, 2012 को वाल्मीकि रंगशाला, उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ में | गाँधी के जीवन वृत, परस्पर संबंध व किसी घटना पर केन्द्रित अनेकों फ़िल्में, उपन्यास, नाटक रचे गये हैं पर कहानी को सुनाने व दिखाने की अपेक्षा विचारों को दिखाने का प्रयास पहली बार

“रंगवार्ता “ के नए अंक में रंगमंच पर स्त्री छवियां

“रंगवार्ता “ के नए अंक में रंगमंच पर स्त्री छवियां

0 2012/01/01 10:30 pm

संजय कुमार रंगमंच की अपनी दुनिया होती है। सामाजिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक सहित हर मानवीय पहलूओं की अभिव्यक्ति को अभिनेता, अपने भाव-भंगिमा से रंगमंच पर जीवंत बनाने की पुरजोर कोशिश करता है। रंगमंच एक ऐसा मंच होता है, जहां सच्चाई को

सोशल नेटवर्किंग साईट पर अभिव्यक्ति और अपसंस्कृति

सोशल नेटवर्किंग साईट पर अभिव्यक्ति और अपसंस्कृति

0 2011/12/08 8:24 pm

सोशल नेटवर्किंग पर लगाम कसने की खबर से कोहराम मचा हुआ है। राजनीतिक व सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। केन्द्रीय दूर संचार और सूचना टेक्नोलॉजी मंत्री कपिल सिब्बल ने जब यह कहा कि उनका मंत्रालय इंटरनेट में लोगों की

पत्रकारिता के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण पुस्तक ‘‘रेडियो पत्रकारिता’’

पत्रकारिता के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण पुस्तक ‘‘रेडियो पत्रकारिता’’

0 2011/11/08 8:53 pm

पत्रकारिता का ताना-बाना आज पूरी तरह बदल गया है। रोज नये-नये तकनीक और पहलू, पत्रकारिता को एक अलग पहचान दिलाने में लगे हैं। सूचना तकनीक के विकास और विस्तार में पत्रकारिता के क्षेत्र इलेक्ट्रानिक मीडिया को दिनों-दिन विस्तार दे रहा है।

निजी से बुरा नहीं सरकारी मीडिया

निजी से बुरा नहीं सरकारी मीडिया

0 2011/07/30 9:45 pm

सरकारी मीडिया को गरियाने का पुराना रिवाज रहा है। गाहे-बगाहे सरकारी मीडिया को गरियाने वाले लोग भले ही किसी न किसी रूप में सरकारी मीडिया से फायदा उठाते रहते हैं। वर्षों से सरकारी मीडिया के कार्यकलाप को लेकर खिंचाई होती

सबक दे गया ‘न्यूज आफ द वर्ल्ड ‘ का बंद होना

सबक दे गया ‘न्यूज आफ द वर्ल्ड ‘ का बंद होना

0 2011/07/11 3:50 pm

ब्रिटेन का सबसे ज्यादा प्रसारित साप्ताहिक टेबलेट अखबार ‘‘न्यूज आॅफ द वर्ल्ड’’ का अंतिम अंक 10 जुलाई 2011 को निकला और अपने अपने अंतिम संस्करण के मुख्य पृष्ठ पर ‘थैंक्यू एण्ड गुड बाय’ की घोषणा के साथ ही मीडिया जगत

तेवर खोती उर्दू मीडिया

तेवर खोती उर्दू मीडिया

0 2011/05/19 2:29 pm

यों तो देश के चर्चित उर्दू अखबरों में आठ राज्यों से छप रहा ‘रोजनामा’ हैदराबाद से ‘सियासत’ और ‘मुंसिफ’, मुंबई का ‘इंकलाब’, दिल्ली से ‘हिन्दुस्तान एक्सप्रैस ’ व ‘मिलाप’, कनाटर्क से ‘दावत’ और पटना से ‘कौमी तन्जीम’ सहित अन्य उर्दू

बिहार में ठहराव की स्थिति में दलित आंदोलन व साहित्य

0 2011/04/15 11:44 pm

बिहार में महाराष्ट्र की तरह दलित आंदोलन तो नहीं दिखता है, लेकिन यहां की जमीन, दलित उत्पीड़न-जुल्म-सितम और दलित चेतना-अवचेतना से भरी पड़ी है। देशा के अन्य भागों की तरह बिहार के दलित अभी भी हाशिए पर हैं। दलित आंदोलन

खेल के बहाने मीडिया की जय हो!

खेल के बहाने मीडिया की जय हो!

1 2011/04/07 8:30 pm

एक बार फिर मीडिया की जय हुई है ! विश्व कप क्रिकेट में भारत ने कब्जा जमाकर तहलका मचाया । भारत ने 28 साल बाद विश्व कप क्रिकेट को कब्जा कर जश्न का माहौल बनाया दिया। इस जश्न में भारत

मधुबनी पेंटिंग  की याद दिलाता “अंग प्रदेश की लोक कला मंजूषा”

मधुबनी पेंटिंग की याद दिलाता “अंग प्रदेश की लोक कला मंजूषा”

0 2011/02/12 10:24 pm

मधुबनी पेंटिंग की तरह अंग प्रदेश की लोक कला मंजूषा काफी चर्चित है। मंजूषा कला को लेकर चंद्रप्रकाश “जगप्रिय” के संपादन में “मअंग प्रदेश की लोक कला मंजूषा” की सध: प्रकाशित पुस्तक आयी है। मंजूषा कला को मुख्यधारा में लाने