ज़ख्म तो ज़ख्म होता है
0सहज और आत्मीय होने के लिए ज़ख्म की क्या ज़रूरत जिस्म पे लगे चाहे दिल पे लगे, ज़ख्म तो ज़ख्म होता है दर्द जरुर होता है. उसकी फ़ितरत से आप बाबस्ता हो फिर क्यों हादसों को शक्ल देते हो ?
सहज और आत्मीय होने के लिए ज़ख्म की क्या ज़रूरत जिस्म पे लगे चाहे दिल पे लगे, ज़ख्म तो ज़ख्म होता है दर्द जरुर होता है. उसकी फ़ितरत से आप बाबस्ता हो फिर क्यों हादसों को शक्ल देते हो ?
गूंध के नर्म आटे में प्याज के चंद टुकड़े मैंने खुश्बू वाली दो रोटियां बनाई है इक तेरे लिए बनाई है इक अपने लिए बनाई है हाँ!साथ बैठ के खाने को ये दो रोटियां बनाई है दोस्तों ! ज़िन्दगी में
पसरे सन्नाटे को चीरती खाई से निकली वो बिलखती चीख ये ज़िन्दगी भीख में ना मांगी थी तो दान में क्यूँ दे दी ? गरेढ़िये ने ना सुनी होती वो चीख तो चील कौवों की खुराक थी वो ज़िंदा जिस्म