Articles By: राजेश कश्यप

‘सृष्टि सृजक‘ महर्षि कश्यप का पौराणिक स्वरूप

‘सृष्टि सृजक‘ महर्षि कश्यप का पौराणिक स्वरूप

0 2012/05/21 4:34 pm

24 मई/जयन्ति विशेष हमारे लगभग सभी पौराणिक ग्रन्थों में सृष्टि की रचना का बखूबी उल्लेख मिलता है। पौराणिक ग्रन्थ ‘सुख सागर’ में श्री शुकदेव मुनि जी पाण्डव वंशज एवं प्रतापी राजा परीक्षित को सृष्टि की रचना के बारे में विस्तार

जननी तेरी जय है !

जननी तेरी जय है !

0 2012/05/12 7:53 pm

13 मई/मातृ-दिवस विशेष –   राजेश कश्यप ‘‘माँ !’’ यह वो अलौकिक शब्द है, जिसके स्मरण मात्र से ही रोम-रोम पुलकित हो उठता है, हृदय में भावनाओं का अनहद ज्वार स्वतः उमड़ पड़ता है और मनोःमस्तिष्क स्मृतियों के अथाह समुद्र

श्रमिक के सरोकारों और क्रांति को समर्पित है ‘मजदूर दिवस

श्रमिक के सरोकारों और क्रांति को समर्पित है ‘मजदूर दिवस

0 2012/04/30 3:10 pm

1 मई/अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस विशेष १ मई अर्थात अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस। यह दिवस विशेषकर मजदूरों के लिए अपनी एकता प्रदर्शित करने का दिन माना जाता है। मजदूर लोग अपने अधिकारों एवं उनकी रक्षा को लेकर प्रदर्शन करते हैं। अगर आज

मजदूर: मंजिल अभी है कोसों दूर !

मजदूर: मंजिल अभी है कोसों दूर !

0 2012/04/30 2:59 pm

1 मई / अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर विशेष   आज २१वीं सदी में भी मजदूरों का शोषण बदस्तूर जारी है। शताब्दियों से संघर्षरत मजदूर वर्ग अपने सम्मान और हक से कोसों दूर है। इतने लंबे अनवरत संघर्ष के बावजूद स्थिति

चुनावी हार और जीत के मूल सबक

चुनावी हार और जीत के मूल सबक

1 2012/03/06 9:40 pm

पाँच राज्यों के चुनावी परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि जो भी नेता अथवा पार्टी आम आदमी की भावनाओं की कद्र नहीं करती, उसकी ऐसी ही परिणति होती है। ये चुनाव परिणाम खासकर कांग्रेस पार्टी के लिए गहन

वैश्विक संस्कृति में रची बसी होली

वैश्विक संस्कृति में रची बसी होली

0 2012/03/01 9:42 pm

फाल्गुन मास की पूर्णिमा को रंगो का त्यौहार होली सबके लिए खुशियों व उमंगो की झोली भरकर लाता है। इस पर्व पर प्रेम और प्यार की बयार और प्रकृति का श्रृंगार देखते ही बनता है। यूं तो हमारा देश त्यौहारों

क्रांतिकारियों के सरताज: चन्द्रशेखर आजाद

क्रांतिकारियों के सरताज: चन्द्रशेखर आजाद

1 2012/02/25 9:43 pm

चन्द्रशेखर बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। उच्च शिक्षा के लिए वे काशी जाना चाहते थे। लेकिन, इकलौती संतान होने के कारण माता-पिता ने उन्हें काशी जाने से साफ मना कर दिया। धुन के पक्के चन्द्रशेखर ने चुपचाप काशी

‘ढ़ाई आखर प्रेम के’ (वेलेंटाइन डे विशेष)

‘ढ़ाई आखर प्रेम के’ (वेलेंटाइन डे विशेष)

1 2012/02/12 8:39 am

14 फरवरी / ‘वेलेंटाइन डे’ विशेष ढ़ाई आखर प्रेम के…. -राजेश कश्यप   ‘प्रेम’ ! दिल की कितनी अथाह गहरी भावनाओं को झंकृत करता है, यह शब्द। इस शब्द के उच्चारण मात्र से ही दिल के तार मधुर झंकार करने