Articles By: प्रकाश पंकज

भारत बनाम भ्रष्टाचार: जन की गुहार जन-लोकपाल

भारत बनाम भ्रष्टाचार: जन की गुहार जन-लोकपाल

2 2011/06/26 9:41 pm

एक चतुर नार, करे शत-प्रहार, मुँह फाड़-फाड़, डँसे बार-बार । जन चीत्कार करे बार-बार, मचे हाहाकार, आह! अत्याचार । ये दण्डप्रहार के बहाने हजार, ये लोकाचार का बलात्कार, यहाँ भ्रष्टाचार! वहाँ भ्रष्टाचार! अँधी सरकार! चहुँ अँधकार! भारत बीमार, रोग दुर्निवार । 

“बाल-मजदूरी”.. किसका अभिशाप? किसका वरदान?

“बाल-मजदूरी”.. किसका अभिशाप? किसका वरदान?

1 2010/11/14 7:40 pm

बाल-मजदूरी”.. किसका अभिशाप? किसका वरदान? गजब के घटिया कानून है देश के: एक समृद्ध परिवार का बच्चा जिसकी परवरिश बड़े अच्छे ढंग से हो रही है, अपने स्कूल और पढाई छोड़ कर टी.वी. सीरिअल या फिल्म में काम करता है

दिनकर जी के जन्म दिवस पर एक कवितान्जली

दिनकर जी के जन्म दिवस पर एक कवितान्जली

1 2010/09/23 1:53 pm

राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर मेरी और से एक कवितान्जली : “ईश्वर के काव्यदूत “ ओ ईश्वर के काव्यदूत तुम फिर से मही पर आओ, मानवता फिर सुप्त हो चली आकार उसे

मैं एक पेड़ हूँ ….

मैं एक पेड़ हूँ ….

1 2010/09/20 5:09 pm

मैं एक पेड़ हूँ जो खड़ा है एक वातानुकूलन यंत्र  (A.C) के वायु निकास के सामने, ऐसा लोग कहते हैं पर सच तो यह है की उस वायु निकास वाले डब्बे को मेरे सामने रखा गया है जो आग की

झूठी है यह “अमन की आशा”, फिर काँटों भरी एक चमन की आशा

झूठी है यह “अमन की आशा”, फिर काँटों भरी एक चमन की आशा

0 2010/07/19 12:01 pm

अमन-अमन हम रटते आये, घाव पुराने भरते आये , झूठी पेश दलीलों पर , शत्रु को मित्र समझते आये । झूठी है यह “अमन की आशा”, फिर काँटों भरी एक चमन की आशा, अमन-चैन के मिथ्या-भ्रम में , शीश के