Articles By: पवन कुमार अरविंद

23 सालों बाद भी अपने घरों से विस्थापित है कश्मीरी हिन्दू

23 सालों बाद भी अपने घरों से विस्थापित है कश्मीरी हिन्दू

1 2012/01/19 11:12 am

23वें निष्कासन दिवस (19 जनवरी) पर विशेष 26 जनवरी को भारत अपना 62वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है लेकिन विडम्बना है कि कश्मीर के हिन्दू आज भी अपने घरों से दूर हैं और विस्थापित जीवन जीने को मजबूर हैं।

राष्ट्र निर्माण में संन्यासियों का योगदान

राष्ट्र निर्माण में संन्यासियों का योगदान

0 2011/11/21 3:55 pm

पुस्तक समीक्षा पवन कुमार अरविंद इस धरा पर भारत ही एक ऐसा देश है जिसका नेतृत्व राजसत्ता ने कभी नहीं किया। हमारा समाज सदैव धर्म के आधार पर ही टिका रहा। राजाओं के युद्ध चलते रहते थे। कोई क्षेत्र कभी

नक्सली ही हैं विनायक सेन

नक्सली ही हैं विनायक सेन

2 2011/10/11 9:23 pm

मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. विनायक सेन नक्सली ही हैं। उनको निकट से जानने वाले के लिए इसमें कोई किंतु-परंतु की बात ही नहीं है। भले ही इस देश की सर्वोच्च अदालत ने पिछले दिनों उनको जमानत पर

कुरसी तू बड़भागिनी

कुरसी तू बड़भागिनी

0 2011/09/17 10:59 pm

व्यंग्य की विधा साहित्य में कुछ विशेष प्रकार की है। जैसे क्रिकेट में सफल गेंदबाज वही है, जिसकी गेंद की गति, दिशा और उछाल का बल्लेबाज को अंतिम समय तक अनुमान न हो पाये। सफल फिल्म और उपन्यास भी वही

‘अलगाववाद का पुलिंदा’ होगी पडगांवकर की रिपोर्ट !

‘अलगाववाद का पुलिंदा’ होगी पडगांवकर की रिपोर्ट !

1 2011/08/12 10:22 am

कश्मीर मसले पर केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त त्रि-सदस्यीय वार्ताकार दल के प्रमुख दिलीप पडगांवकर का अफजल गुरू के संदर्भ में दिया गया बयान देश-विरोधी तो है ही; साथ ही आतंकियों के मनोबल को बढ़ाने वाला भी है। उनका बयान प्रत्येक

कश्मीर मुद्दे पर उजागर हुआ पाक का अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र

कश्मीर मुद्दे पर उजागर हुआ पाक का अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र

0 2011/07/28 9:21 pm

कश्मीरी अलगाववादी नेता डॉ. गुलाम नबी फई की गिरफ्तारी के बाद से पाकिस्तान भले ही यह कहता रहा हो कि अमेरिका ने फई की गिरफ्तारी इस्लामाबाद को बदनाम करने के उद्देश्य से की है तथा फई से उसका व उसकी

लोकतांत्रिक अनशन की मर्यादा

लोकतांत्रिक अनशन की मर्यादा

0 2011/06/27 8:31 pm

लोकपाल को लेकर अन्ना हजारे को इतनी बेचैनी क्यों है? जो लोकपाल इन भ्रष्ट नेताओं के कारण पिछले 43 वर्षों से कानून का रूप नहीं ले सका है, क्या वह उनकी जिद से मात्र एक या दो सप्ताह में ही

गैर-लोकतांत्रिक है सुरक्षा परिषद का ‘वीटो’ अधिकार

गैर-लोकतांत्रिक है सुरक्षा परिषद का ‘वीटो’ अधिकार

0 2011/05/21 2:19 pm

सत्ता के संचालन की लोकतांत्रिक प्रणाली; इस सृष्टि की सर्वोच्च शासन व्यवस्था मानी गई है। क्योंकि अब तक शासन के संचालन की जितनी भी पद्धतियां ज्ञात हैं उनमें लोकतांत्रिक प्रणाली सर्वाधिक मानवीय होने के कारण सर्वोत्कृष्ट है। यह एक ऐसा

राहुल गांधी का हवा-हवाई ‘दिग्विजयी दावा’

राहुल गांधी का हवा-हवाई ‘दिग्विजयी दावा’

1 2011/05/20 8:05 pm

सचिव वैद्य, गुरु तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस। राजधर्म तनु तीनि कर होईं बेगहिं नास॥   अर्थात-‘जिस राजा के सचिव, वैद्य और गुरू राजा के भयवश या उसे खुश रखने के लिए उसके सम्मुख उसके मन की और चिकनी-चुपड़ी

भ्रष्टाचार मिटाना अकेले अन्ना से संभव नहीं क्योंकि यह सर्वव्यापी है |

भ्रष्टाचार मिटाना अकेले अन्ना से संभव नहीं क्योंकि यह सर्वव्यापी है |

5 2011/04/27 7:54 pm

भ्रष्टाचार के उन्मूलन के लिए अकेला बेचारा बूढ़ा अन्ना क्या कर सकेगा। क्योंकि यह भ्रष्टाचार अत्र, तत्र, अन्यत्र और सर्वत्र विराजमान है, यानी दसों दिशाओं में व्याप्त है। इसका दायरा बहुत व्यापक है। यह केवल नेताओं तक ही सीमित नहीं