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	<title>JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज &#187; दीपाली पाण्डेय</title>
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	<description>Daily news analysis , Hindi samachar ,Hindi magazine,Hindi website,a6V3sbK3z0d4m7JTOT6OQOVo1jQ</description>
	<lastBuildDate>Mon, 06 Feb 2012 20:00:01 +0000</lastBuildDate>
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		<title>महिलाओं को लेकर सोच नहीं बदली है</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Feb 2012 07:55:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दीपाली पाण्डेय</dc:creator>
				<category><![CDATA[नारी]]></category>

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		<description><![CDATA[_आज समाज कितना ही आधुनिक क्यों न हो गया हो &#124; पर महिलाओं को लेकर उनकी सोच में जरा भी बदलाव देखने को नहीं मिला हैं &#124; एक लड़का यदि अपने घर से बाहर  निकलता हैं तो उसके लिए समाज ]]></description>
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<div id=":7l" style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/women_mahilaye_women-in-india.jpg"><img class="alignleft size-medium wp-image-26182" title="women_mahilaye_women in india" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/women_mahilaye_women-in-india-300x273.jpg" alt="महिलाओं को लेकर सोच नहीं बदली है"width="300" height="273" /></a><span id="__caret">_</span>आज समाज कितना ही आधुनिक क्यों न हो गया हो | पर महिलाओं को लेकर उनकी सोच में जरा भी बदलाव देखने को नहीं मिला हैं | एक लड़का यदि अपने घर से बाहर  निकलता हैं तो उसके लिए समाज के पास पूछने के लिए कभी कोई सवाल नहीं रहता ,वहीँ यदि लड़की अपने घर से कहीं निकल जाये तो सवालों की टोकरी उसके सामने रख दी जाती हैं | आज ऐसे ढेरों उदाहरण मिलेंगे जहां एक महिला ने अपने दम पर न सिर्फ खुद को स्थापित किया है बल्कि अपने बच्चों के पालन पोषण में भी कोई कमी नहीं रखी है। फिर चाहे वो कोई सेलिब्रिटी हो या आम महिला हर जगह हर मोर्चे पर महिलाओं ने अपना परचम लहराया है वे भी अकेले अपने दम पर। फिर चाहे ये अकेलापन परिस्थितिवश हो या महिला ने खुद अकेले रहने का चुनाव किया हो। कई बार आधुनिक सोच वाली इन महिलाओं पर स्वार्थी और खुदगर्ज होने का आरोप लगाया जाता है जो सरासर गलत है।<br />
आधुनिक महिला न सिर्फ बाहर जाकर काम करती है बल्कि ऑफिस व दूसरे कामों से इतर वह खुद के लिए भी वक्त निकालती हैं। अब उनको अकेलापन सालता नहीं है बल्कि वह इसे पसंद करती हैं और अपने दम पर अपने बच्चों का और अपने पर आश्रित लोगों का भरण पोषण कर सकती है वह भी खुशी के साथ। वक्त के साथ महिलाओं ने भी जीवन जीने का नया ढंग सीख लिया है। महिलाएं अब सिर्फ परिवार के लिए जीने में विश्वास नहीं रखतीं बल्कि आज की महिला के पास अपने लिए जीने की चाह है और खुद के साथ वक्त बिताने की ख्वाहिश भी। इसका सबसे बड़ा कारण है कि वह खुद को त्याग की मूर्ति समझने के बजाय एक इंसान समझने लगी हैं।<br />
आधुनिक महिला न सिर्फ बाहर जाकर काम करती है बल्कि ऑफिस व दूसरे कामों से इतर वह खुद के लिए भी वक्त निकालती हैं। अब उनको अकेलापन सालता नहीं है बल्कि वह इसे पसंद करती हैं और अपने दम पर अपने बच्चों का और अपने पर आश्रित लोगों का भरण पोषण कर सकती है वह भी खुशी के साथ। वक्त के साथ महिलाओं ने भी जीवन जीने का नया ढंग सीख लिया है। महिलाएं अब सिर्फ परिवार के लिए जीने में विश्वास नहीं रखतीं बल्कि आज की महिला के पास अपने लिए जीने की चाह है और खुद के साथ वक्त बिताने की ख्वाहिश भी। इसका सबसे बड़ा कारण है कि वह खुद को त्याग की मूर्ति समझने के बजाय एक इंसान समझने लगी हैं।<br />
सबसे बड़ा और अहम् सवाल यह हैं की नारी के लिए सुख कहाँ ? एक और पहलू हैं जो विचार करने लायक हैं की सवालों से नाता तो महिला का कभी खत्म नहीं हूआ हैं | सवालों का जवाब देते-देते वह अपनी जिंदगी का गुजरा करती हैं | घर से बाहर निकल भी जाती हैं तो सड़क पर चलते-चलते ढेरों सवाल उसके मन में गोते लगा रहे होते हैं की अगले पल उसके साथ कहीं कोई अनहोनी तो नहीं होने वाली हैं |<br />
जब भी महिला शोषण की बात उभरती हैं ,तो मन में कई सवाल कर उभर कर सामने आते हैं&#8230;&#8230;&#8230;  क्या है ये अनजाना भय ? निश्चित रूप से यह केवल उसके नारी होने का भय है जो हर समय उसे असुरक्षित होने का अहसास दिलाता रहता है। आलम यह है क़ी आज नारी घर क़ी चारदीवारी में भी अपनी अस्मिता बचने में अक्षम है। प्रारंभ में सात्विक संदेशो द्वारा समाज को सही मार्गदर्शन देने का आधार था , लेकिन धीरे &#8211; धीरे उसका भी व्यवसायीकरण हो गया और झूठी लोकप्रियता भुनाने वह समाज के पथप्रेरक के रूप में कम और पथभ्रमित करने के माध्यम के रूप में अधिक नज़र आने लगा। शुरुआत हम छोटे परदे से करते है, जहा लगभग हर खेत्र  मे मानवीय संबंधो के आदर्श रूप को नकारते हुए नारी को एक ऐसी &#8221; वस्तु &#8221; के रूप में लोगो  के सामने परोसा जाता है, जंहा वह केवल एक भोग्या मात्र ही दिखाई जाती है।&nbsp;</p>
<p>सिर्फ़ मान लेने मात्र से कुछ नही होगा महिलाओं को सोचना होगा कि वो भी पुरूषो से कम नही। “आखिर कब मजबूत होगीं महिलाये” … आज के समाज में महिलाओ पर अत्याचार इतने बढ चुके कि जब तक महिलायें स्वयं पूणं रूप से मजबूत नही होगीं तब तक उनके उपर हो रहें अत्याचारो को रोक पाना बहुत मुसकिल सा लगता है। यहां मजबूत होने का अर्थ उपरी तौर से मजबूत होने से मजबूत होना ही नहीं बल्कि सोच से भी मजबूत होना है। मै समझती  हु कि अगर कोइ महिला या लडकी सोच से मजबूत होगी तो वो ऊपरी मतलब शरीरिक और आन्तरिक रूप से पूरी तरह मजबूत बन पायेगीं।यहा तक कि शिक्षा के क्षेत्र में भी ओरतो को कमजोर समझा गया है। मै मानती  हु कि महिलायें हर क्षेत्र में आगे बढ रही है पर एक सच्चाई ये भी है कि अभी भी आदमी महिलाओ को हर क्षेत्र में कमजोर समझता आ रहा है। ये ऐसी दीमक लगी हुइ सोच को अभी भी दिमाग के किसी न किसी कोने में लेकर घूम रहा है। आज के युवा वर्ग की सोच में पहले के मुताबिक काफ़ी बदलाव देखा गया है| लेकिन युवा इस सोच को ऊपरी तोर से या एक दिखावे के रूप में बेशख निकाल पाया हो पर अभी भी इस दिमक लगी हुई सोच से आज का आदमी या युवा अपने अपको पूरी तरह से दूर नही कर पाया है। इसका अन्दाजा हम आये दिन महिलाओ के शोषणं की खबरो से ही लगा सकते है।<br />
समाज में हो रहे महिलाओं व बच्चों के शोषण को रोकने के लिए जनता के बीच के व्यक्तियों की एक टीम गठित की गयी है। जो इन अपराधों को रोकने में पुलिस की मदद करेंगी। कहा कि छोटी छोटी घटनाओं की रोकथाम के लिए भी इनकी मदद ली जायेगी।  आज नारी ऊँचे से ऊँचे ओहदे या प्रोफेशन में कार्यरत क्यों ना हो वह सदैव एक अनजाने भय से ग्रसित रहती है ?</p>
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		<title>नए भूमि अधिग्रहण बिल पर उठते सवाल</title>
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		<pubDate>Thu, 28 Jul 2011 02:44:07 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दीपाली पाण्डेय</dc:creator>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[दो-टूक]]></category>
		<category><![CDATA[नया भूमि अधिग्रहण बिल]]></category>
		<category><![CDATA[नोएडा एक्सटेंशन]]></category>
		<category><![CDATA[भूमि अधिग्रहण बिल]]></category>

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		<description><![CDATA[सरकार ने नया भूमि अधिग्रहण बिल तैयार कर लिया है &#124; ड्राफ्ट में साफ कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण का अधिकार निजी कंपनियों को नहीं होगा। भट्टा पारसौल और अब नोएडा एक्सटेंशन में मचे बवाल के मद्देनजर ड्राफ्ट में ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-18078" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/%e0%a4%a8%e0%a4%8f-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%a3-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%89%e0%a4%a0/attachment/farmers-05201109/"><img class="alignleft size-full wp-image-18078" title="farmers-05201109" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/farmers-05201109.jpg" alt="" width="280" height="280" /></a>सरकार ने नया भूमि अधिग्रहण बिल तैयार कर लिया है | ड्राफ्ट में साफ कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण का अधिकार निजी कंपनियों को नहीं होगा। भट्टा पारसौल और अब नोएडा एक्सटेंशन में मचे बवाल के मद्देनजर ड्राफ्ट में भूमि अधिग्रहण के लिए कई शर्त रखी गई हैं।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="text-decoration: underline;">ड्राफ्ट के मुताबिक निजी कंपनियां सीधे किसानों से जमीन नहीं खरीद पाएंगी।</span></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="text-decoration: underline;">अधिग्रहण का अधिकार राज्य सरकार के पास होगा, लेकिन रक्षा और आपदा प्रबंधन को छोड़ कर</span></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="text-decoration: underline;">इसके अलावा पुनर्वास और पुनर्स्थापना कानून को भी इसी बिल में जोड़ दिया गया है |</span></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="text-decoration: underline;">जिसकी जमीन अधिग्रहण में जाएगी उसे सरकारी भाव का 6 गुना मुआवजे के तौर पर दिया जाएगा।</span></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="text-decoration: underline;">सरकारी भाव जमीन की रजिस्टर्ड सेल प्राइस से तय किया जाएगा</span></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="text-decoration: underline;">भूमि मालिक को अगले 20 साल तक 2000 रुपए महीने के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा</span></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="text-decoration: underline;">पुनर्वास कॉलोनी में आधारभूत सुविधाएं पहले के मुकाबले कहीं अच्छी होंगी</span></strong></p>
<p style="text-align: justify;">ये कुछ ऐसी शर्ते हैं जो बीते बुधवार सरकार ने तय की</p>
<p style="text-align: justify;">सवाल है कि क्या सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से देश भर के उन किसानों को न्याय मिलने की उम्मीद बँधेगी जो अपनी ज़मीनें बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं?</p>
<p style="text-align: justify;">दूसरी ओर कुछ लोग ये भी मानते हैं कि ऐसे वर्तमान में मुआवजे की दर कुछ बढ़ा दी गई है, परन्तु इस महंगाई के युग में वह रकम कितने दिन काम आती है!</p>
<p style="text-align: justify;">यदि उपरोक्त सुझाव को कानून में स्थान नहीं दिया गया तो किसानों का असंतोष बढ़ता रहेगा और वह किसी के लिये भी लाभकारी नहीं होगा।</p>
<p style="text-align: justify;">वहीँ इसमें कोई दो राय नहीं देश को विकास की जरूरत है, विकास के अंतर्गत सड़कों, बांधों आदि का निर्माण होना शेष है। आने वाले पांच वर्षो में शहरी और ग्रामीण भारत में सड़कों का जाल बिछाया जाएगा। छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में विपुल खनिज संपदा है, अत: विराट पैमाने पर किसानों से जमीनें ली जाएंगी। इससे असंतोष तो पैदा होगा ही, पर जिस तरह नए भूमि अधिग्रहणमें शर्ते रखी गयी हैं उस से कहीं ऐसा प्रतीत होता नजर नहीं आ रहा की जहाँ किसानो का पक्ष मजबूत होता दिख रहा हो</p>
<p style="text-align: justify;">इस विषय पर आपकी क्या राय हैं हमे मेल करें :-</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
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		<title>&#8216;जूतेबाज़ों&#8217; का गुस्सा बिलकुल जायज़ है</title>
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		<pubDate>Mon, 06 Jun 2011 16:42:34 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दीपाली पाण्डेय</dc:creator>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[संसद मार्ग]]></category>
		<category><![CDATA[काला धन]]></category>
		<category><![CDATA[जूता जनार्दन द्विवेदी पर तान दिया]]></category>
		<category><![CDATA[जूता लोकतांत्रिक]]></category>
		<category><![CDATA[बुश पर जूता उछाला]]></category>
		<category><![CDATA[रामदेव के आंदोलन]]></category>

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		<description><![CDATA[ऐसा लग रहा जैसे विरोध में जूता चलाना एक नया चलन बनता जा रहा है &#124; जूते मारने का प्रचलन  बाबर के समय से चलता आ रहा हैं &#124; जंग के मैदान में तंबूं गड़े हुए थे। शाम होने की ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-16692" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b2/attachment/janardhan-300x200/"><img class="alignleft size-full wp-image-16692" title="Janardhan-300x200" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/Janardhan-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" /></a>ऐसा लग रहा जैसे विरोध में जूता चलाना एक नया चलन बनता जा रहा है | जूते  मारने का प्रचलन  बाबर के समय से चलता आ रहा हैं | जंग के मैदान में तंबूं  गड़े हुए थे। शाम होने की वजह से जंग रुक गई थी। दो सिपाही अपने तंबू के  सामने एक-दूसरे पर जूता उछालने का खेल खेल रहे थे। एक सिपाही का फेंका हुआ  जूता उधर से गुजर रहे एक आदमी को लग गया। उसने पलटकर देखा, मुस्कुराया और  आगे बढ़ गया। उसकी शक्ल देखते ही दोनों सिपाहियों की जान सूख गई। उन्हें  पूरी उम्मीद हो गई कि अब सर कलम होगा। दरअसल वह आदमी मुगल शहंशाह बाबर था,  जो शाम की नमाज अदा करने बड़े तंबू की तरफ जा रहा था।</p>
<p>कई सदियां गुजर गई हैं और जूता लोकतांत्रिक हो गया है। अब जूता किसी पर  गलती से नहीं बल्कि जानबूझकर आज के शहंशाहों की तरफ उछाले जा रहे हैं। वर्ष  2008 बग़दाद में  मुंतजर-अल-जैदी द्वारा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज  डब्ल्यू. बुश पर जूता उछाला गया तो जैदी ने खूब वाहवाही बटोरी थी ,उसके बाद  धीरे-धीरे चीनी राजनीति भी इसका शिकार हूई और अब भारत में भी इसका चलन  बढता जा रहा हैं  ।भारत में जूते-चप्पल की संस्कृति विदेशों से आयातित है ।  अब तक सुरेश कलमाड़ी ने मोरार जी देसाई की कार पर अस्सी के दशक में जूता  फेंका था | वहीँ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गृहमंत्री पी० चिदंबरम, भाजपा  के पीएम इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी, कांग्रेस नेता नवीन जिंदल, कर्नाटक के  मुख्यमंत्री और चुनाव प्रचार कर रहे अभिनेता जीतेन्द्र के साथ ऐसी घटनाएँ  हो चुकी हैं | 13 फ़रवरी 2009 को दिल्ली यूनिवर्सिटी में अरुंधती राय पर  जूता फेंका गया था | &#8221; यूथ यूनिटी फॉर वाइब्रेंट एक्शन &#8221; ने कश्मीर मुद्दे  पर अरुंधती की बयानबाजी को आड़े हाथों लेते हुए उस पर चप्पल फेंका था जिसे  एक लाख रूपये में जंतर मंतर पर नीलाम भी किया गया था |</p>
<p>जूते फेंकने की इस घटना ने अब शाश्‍वत चिंता की शक्ल अख्तियार कर ली है |  ये लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है, कह कर कृपया इसे नजरअंदाज न करें। जो आज  के नेता कर रहे हैं, वह भी लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। जब देश का हर आठवां  लोक सभा प्रत्याशी करोड़पति हो और ७७ फीसदी अवाम यानी ८३.५ करोड़ लोगों की  हर दिन की कमाई बीस रुपये हो, आधी आबादी साफ पानी और इलाज के लिए तरस रही  हो, जब लोगों को इंसाफ मिलना बंद हो जाए तो निःसहाय अवाम ऐसे ही किसी  रास्ते को चुनती है। और अब जूता खाने वालों में जनार्दन द्वेदी भी भारतीय  हस्तियों में शरीक हो गए हैं , <strong>सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी  महासचिव जनार्दन द्विवेदी पर एक शख्स ने जूता तान दिया।  प्रेस कॉनफ्रेंस  के दौरान उसने द्विवेदी से बाबा काला धन के मसले पर रामदेव के आंदोलन के  संबंध में कोई सवाल किया, जिसे द्विवेदी ने टाल दिया। इस बात का विरोध करने  के लिए उसने जूता जनार्दन द्विवेदी पर तान दिया</strong></p>
<p>हम सभी इस बात से वाकिफ हैं की लोकतंत्र में अपने आक्रोश की अभिव्यक्ति  देने का सभी को हक़ हैं ,अपनी बात की ज्यादा से ज्यादा लोगो में प्रचारित  करना और एक ही दिन में हीरो बनने के लिए पत्रकार अपनी कलम से मेहनत करने के  बजाए जूतों का सहारा लेने लग गए हैं |  &#8216;जूतेबाज़ों&#8217; का गुस्सा बिलकुल  जायज़ है। इस व्यवस्था से भी और इस राजनीतिक दशा से भी। ये भी सच है कि  पिछले 60 सालों में हर पार्टी ने इस देश को कई तरह से ठगा है, लेकिन इसके  लिये जिस पर जूता चलना चाहिये क्या ये वही लोग हैं? क्या जूते का निशाना  सही लोगों पर है?अब पब्लिक झूठे वादे सुनने को तैयार नहीं है। ये घटनाएं  जाहिर करती हैं कि अब अवाम को नेताओं पर यकीन नहीं है और न उनके लिए मन में  कोई इज्जत बची है। इसके लिए पब्लिक नहीं नेता जिम्मेदार हैं। याद करें कि  सांसद पर आतंकी हमले की घटना के बारे में सुनने के बाद लोगों की सहज  प्रक्रिया थी, कोई नेता नहीं मरा।<br />
जूता प्रतिरोध का प्रतीक बनता जा रहा है। अगर ये नेता नहीं बदले तो ऐसे  विरोध जोर पकड़ेंगे। निरीज जनता के पास शायद इससे सहज और कोई तरीका नहीं  बचा है। सत्ता के कान तो शहीद भगत सिंह के समय में ही बहरे हो गए थे। लाचार  जनता की आवाज इन नेताओं तक जब नहीं पहुंच रही हैं, लेकिन जूता जरूर पहुंच  रहा है और अपनी पूरी बात आसानी से रख रहा है। ये दिखता भी है और डराता भी  है।</p>
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		<title>DOWNLOAD Satya Sai Baba&#8217;s spritual books (सत्य साईं की  किताबें )</title>
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		<pubDate>Sat, 02 Apr 2011 11:01:22 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दीपाली पाण्डेय</dc:creator>
				<category><![CDATA[डाउनलोड]]></category>
		<category><![CDATA[DOWNLOAD Satya Sai Baba's spritual books]]></category>
		<category><![CDATA[सत्य साईं की किताबें]]></category>

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		<description><![CDATA[http://www.saibaba.ws/download/vahinis/Bhagavatha_Vahini.pdf http://www.saibaba.ws/download/vahinis/Dharma_Vahini.pdf http://www.saibaba.ws/download/vahinis/Dhyana_Vahini.pdf http://www.saibaba.ws/download/vahinis/Jnana_Vahini.pdf http://www.saibaba.ws/download/vahinis/Prashanthi_Vahini.pdf http://www.saibaba.ws/download/vahinis/Prema_Vahini.pdf http://www.saibaba.ws/download/vahinis/Upanishad_Vahini.pdf http://www.saibaba.ws/download/vahinis/Vidya_Vahini.pdf]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://www.saibaba.ws/download/vahinis/Bhagavatha_Vahini.pdf">http://www.saibaba.ws/download/vahinis/Bhagavatha_Vahini.pdf</a></p>
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		<title>हू किल्ड जेसिका ?</title>
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		<pubDate>Fri, 07 Jan 2011 15:34:31 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दीपाली पाण्डेय</dc:creator>
				<category><![CDATA[साहित्य-सिनेमा]]></category>

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		<description><![CDATA[नो वन किल्ड जेस्सिका आज से 7 जनवरी को पर्दे पर नजर आएँगी &#124;राज कुमार गुप्ता के निर्देशन में बनी ये फिल्म को लोगो ने काफी सराहा , ये फिल्म मूलत :११ साल पुराने चरित्र जेसिका लाल हत्याकांड पर आधारित ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-12209" href="http://www.janokti.com/art-literature-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d/attachment/jessica-2/"><img class="alignleft size-full wp-image-12209" title="jessica" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/jessica1.jpeg" alt="" width="180" height="280" /></a>नो वन किल्ड जेस्सिका आज से 7 जनवरी को पर्दे पर नजर आएँगी  |राज कुमार गुप्ता के निर्देशन में बनी ये फिल्म को लोगो ने काफी सराहा , ये फिल्म मूलत :११ साल पुराने चरित्र जेसिका लाल हत्याकांड पर आधारित कहानी है | जिसे राज कुमार गुप्ता ने बडे ही सहज ढंग से पर्दे पर उतरा है |,  लेकिन  इस  हत्यकांड  से  जुड़े  लोगों  के  बेहद  ऊंचे  हाई  प्रोफाइल  के  चलते  यह  मामला  कई  सालों  तक  मीडिया  की  सुर्खियों  में  रहा। फिल्म में रानी मुखर्जी और विद्या बालन की भूमिका में है |</p>
<p style="text-align: justify;">निर्देशक राजकुमार गुप्ता की फिल्म ‘नो वन किल्ड जेसिका’मॉडल जेसिका लाल की हत्या और उसकी बहन सबरीना की लंबी कानूनी लड़ाई पर आधारित है। कहानी क्या है, वैसे तो जेसिका लाल मर्डर केस की दास्तां इस देश के हर नागरिक को पता है। सब जानते हैं कि कैसे शुरूआत में जेसिका के कातिल कानून की नजरों में धोखा देकर छूट गए थे। उसके बाद उसकी बहन सबरीना ने जेसिका को इंसाफ दिलाने के लिए एक लंबी जंग लड़ी। पूरा देश उनकी इस जंग में उनके साथ रहा। दरअसल ‘नो वन किल्ड जेसिका’ ,सबरीना लाल के संघर्ष की कहानी है।</p>
<p style="text-align: justify;">कहानी शुरू होती है कि सबरीना को देर रात पता चलता है कि उनकी बहन का एक रेस्टोरेंट में कत्ल कर दिया गया है, मौके पर पुलिस पहुंचती है। चश्मदीद बयान देते हैं कि उन्होंने कातिल को देखा लेकिन वक्त बीतने के साथ न सिर्फ कातिल छूट जाते हैं बल्कि सबरीना की हिम्मत भी जवाब देने लगती है। इंटरवल तक पूरी फिल्म विद्या बालन के इर्द गिर्द घूमती है। बिना मेकअप विद्या ने सबरीना के किरदार को इतना शानदार तरीके से जिया है लगता है इस दौर में अपनी समकालीन अभिनेत्रियों में उनसे बेहतर कोई नहीं। इंटरवल के बाद फिल्म में एंट्री होती है रानी मुखर्जी की जो इस फिल्म में एक पत्रकार बनी हैं। जब सबरीना हार जाती हैं, टूट जाती हैं तो रानी justice for jessica मुहिम को आगे बढ़ाती हैं। देखते ही देखते पूरा देश इस मुहिम में उनके साथ शामिल हो जाता है और जेसिका को इंसाफ मिलता है। राजकुमार को इस फिल्म को बनाने का आइडिया इस घटना से जुड़ी पत्रकार को देखकर आया। फिल्म की स्क्रिप्ट के लिए उन्होंने सबरीना की मदद भी ली। पहले फिल्म में रानी मुखर्जी वकील की भूमिका करना चाहती थीं, लेकिन बाद में जर्नलिस्ट के रोल के लिए तैयार हो गईं। करीब ग्यारह साल पहले अप्रैल 1999 में मॉडल जेसिका लाल की हत्या का मामला अपराध और राजनीति के मजबूत गलियारों के बीच कहीं न कहीं से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा रहा |</p>
<p style="text-align: justify;">नो वन किल्ड जेसिका’ उन फिल्मों से इसलिए भी अलग है क्योंकि इसमें कोई ऐसा हीरो नहीं है जो कानून हाथ में लेकर अपराधियों को सबक सीखा सके। यहाँ जेसिका के लिए एक टीवी चैनल की पत्रकार देशवासियों को अपने साथ करती है और अपराधी को सजा दिलवाती है। फिल्म की कहानी जहां एक ओर आम हिन्‍दुस्‍तानी की बेबसी और मजबूरियों का आईना बनती है। तो, दूसरी ओर समाज और मीडिया की अहम भूमिका की ओर भी इशारा करती है।</p>
<p style="text-align: justify;">फिल्‍म बताती है कि मीडिया अगर अपनी भूमिका सही तरीके से निभाये, तो वाकई में अपराधियों के खिलाफ एक कारगर और धारदार हथियार बन सकता है आम इंसान को इन्साफ नहीं मिलने की कहानी पर बॉलीवुड में कई फिल्में बन चुकी हैं ,लेकिन &#8220;नो वन किल्ड जेसिका &#8221; इसलिए प्रबावित करती हैं की यह सत्य घटना पर आधारित हैं |</p>
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		<title>&#8220;भगवदज्जुकम&#8221; नाटक का मंचन</title>
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		<pubDate>Mon, 01 Nov 2010 07:53:52 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दीपाली पाण्डेय</dc:creator>
				<category><![CDATA[साहित्य-सिनेमा]]></category>

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		<description><![CDATA[निर्मला और मुआवज़े नाटक की सफलता के बाद अदिति महाविद्यालय प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री राम सेंटर में नाटक प्रस्तुत करने जा रहा है &#124; एक नाटक&#8230;.जहाँ एक और निर्मला प्रेमचंद द्वारा लिखी सामाजिक कुरीतियों पर आधारित ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-9850" href="http://www.janokti.com/art-literature-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%a6%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%ae-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a4%a8/attachment/bali-new/"><img class="alignleft size-medium wp-image-9850" title="bali new" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/bali-new-194x300.jpg" alt="" width="194" height="300" /></a>निर्मला और मुआवज़े नाटक की सफलता के बाद अदिति महाविद्यालय प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री राम सेंटर में नाटक प्रस्तुत करने जा रहा है | एक नाटक&#8230;.जहाँ एक और निर्मला प्रेमचंद द्वारा लिखी सामाजिक कुरीतियों पर आधारित कहानी थी, वहीँ मुआवज़े एक सामाजिक व्यंग्य पर आधारित नाटक था&#8230;और इस बार कुछ अलग करने की चाह लिए अदिति महाविद्यालय ले कर आ रहा है एक संगीतात्मक और नृत्य से सजी क्लासिकल कॉमेडी &#8220;भगवदज्जुकम &#8220;|सातवीं शताब्दी में लिखा गया ये नाटक बोधायन से लिया गया है,जिसमें बोध धर्म का पतन होता दिखाया गया है|  नाटक को अनुदित नैमी चंद जैन द्वारा किया गया है . नाटक की कहानी शुरू होती है एक साधु और वैश्या की आत्मा के बदलने से&#8230;.साधु की आत्मा वैश्या के अंदर और वैश्या की आत्मा साधु के अंदर&#8230;.यहीं से कहानी आगे बड़ती है&#8230;.नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के साथ मिलकर किया जा रहा इस नाटक के निर्देशक श्री रामजी बाली है | राम जी बाली का कहना है की मुझे उम्मीद है की यह नाटक लीगो को बहुत पसंद आएगा | नाटक की एक ख़ास बात ये भी है की नाटक के सभी पात्र अदिति महाविद्यालय की लडकियां ही निभा रही हैं.| &#8220;भगवदज्जुकम &#8221; का मंचन श्री राम सेंटर, मंडी हाउस में 2 नवम्बर को दो बार होगा&#8230;.आम जनता के लिए 6:30 प्रस्तुती होगी&#8230;पहला भाग केवल कॉलेज के छात्राओं व् अध्यापकों के लिए ,प्रवेश निशुल्क है |</p>
<p style="text-align: justify;">
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		<title>क्या है वास्तविक जीवन ?</title>
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		<pubDate>Sun, 17 Oct 2010 10:22:23 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दीपाली पाण्डेय</dc:creator>
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		<description><![CDATA[ब्लॉग हलचल चर्चा की इस कड़ी में दीपाली पाण्डेय का नमस्कार, आज मनुष्य अत्यंत व्यस्त हो चूका है उसके पास अपनों के लिए समय ही नहीं रह गया है या ,यों कहिये की वह अपने लिए भी जीवन जीना भूल ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong><a rel="attachment wp-att-9356" href="http://www.janokti.com/blog-hindiblog%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%97-%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a4%9a%e0%a4%b2/bloghindi-blog-halchal-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8/attachment/444423a-i1-0/"><img class="alignright size-medium wp-image-9356" title="444423a-i1.0" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/444423a-i1.0-300x228.jpg" alt="" width="300" height="228" /></a>ब्लॉग हलचल चर्चा </strong>की इस कड़ी में दीपाली पाण्डेय का नमस्कार, आज मनुष्य अत्यंत व्यस्त हो चूका है उसके पास अपनों के लिए समय ही नहीं रह गया है या ,यों  कहिये की वह अपने लिए भी जीवन जीना भूल गया है | एक वक्त हूआ करता था ,जब परिवार के सब लोग एक साथ बैठकर खाना खाया करते त्यौहार,पिकनिक के लिए जाया करते थे लेकिन जब आज इस बारे में सोचते हैं तो ऐसा लगता है की न जाने हम किस जमाने की बात कर रहे हैं  | आज मनुष्य ने अपने आपको स्वयं आसह्य बन डाला है |ब्लॉग चर्चा की इस कड़ी में जीवन पक्ष से जुडे कुछ पहलूओं की हम चर्चा करने जा रहे है |उम्मीद करती हूँ,आपको यह ब्लॉग चर्चा पसंद आएगी  |</p>
<p style="text-align: justify;">.जीवन एक सफ़र है आइये इसे जानें कैसे ?इस ब्लॉग के माध्यम मृजितमोहन जी ने बड़ी सुन्दर अभिव्यक्ति व् कल्पना प्रस्तुत की है | मोहन जी ने जीवन को एक दिशां के रूप में ढालने की कोशिश की है कैसे ? दिए हूए लिंक पर क्लिक करें &#8211; <a href="http://http://jitmohan.blog.co.in/?p=10 |">http://jitmohan.blog.co.in/?p=10 |</a></p>
<p style="text-align: justify;">.  जीवन के सफ़र के बारे में तो हमने जाना ,लेकिन कहा जाता है की जब इंसान पैदा होता है तो वह कई बन्धनों में बंध जाता है,चाहे वह पारिवारिक बन्धन हो या कुछ और | जब व्यक्ति बंधन में जकड जाता  है,तो उसी पीड़ा होती ,वह चिल्लाता है जैसे किसी पंछी को पिंजरे में बंद कर दिया हो ,इन्ही सब बातों का उल्लेख एक कवि ब्लॉग के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा है <a href="http://vikashkablog.blogspot.com/2007/10/blog-post_30.html |">http://vikashkablog.blogspot.com/2007/10/blog-post_30.html |</a></p>
<p style="text-align: justify;">.इस चर्चा में अब हम जीवन से जुडे हूए नजरिये की बात करेंगें ,जीवन मंथन नामक इस ब्लॉग में शंकर कुमार जी  जीवन की तुलना एक आधा गिलास पानी से की है  | लेखक का तात्पर्य, यह है की  मनुष्य का जीवन सुख -दुःख से परिपूर्ण होता है और यही सुख दुःख हमारे नजरिये पर टिका हूआ है | जीवन किसी के लिए दुखों का अम्बार है तो किसी के लिए खुशियों का खजाना है | आइये जाने कैसे- <a href="http://jiwanmanthan.blogspot.com/2010/07/blog-post.हटमल |">http://jiwanmanthan.blogspot.com/2010/07/blog-post.हटमल  |</a></p>
<p style="text-align: justify;">.एक अंग्रेज पादरी का कथन है &#8220;जीवन एक बाजी के समान है ,सही भी है क्योंकि हार जीत तो हमारे हाथ में नहीं पर बाजी खेलना हमारे हाथ में है ,आइये जाने कैसे<a href="http://jiwanmanthan.blogspot.com/2010/07/blog-post_28.html"> http://jiwanmanthan.blogspot.com/2010/07/blog-post_28.html</a> |</p>
<p style="text-align: justify;">.जब मनुष्य अपनी ज़िन्दगी में अकेला हो जाता है ,तब वह किसी अपने को खोजता है ,ताकि उसके प्यार भरा स्पर्श पाकर वह अपने सारे दुखों को भूल सके ,उसके सामने अपनी सारी बातें कह सके जो सालों से उसने अपने मन में दबा रखी थी | दीपक जी ने अपनी बातों को बडे ही सुन्दर व् सहज ढंग से प्रस्तुत कर रहे है  -&#8221; एक बार जीवन में प्यार कर लो प्रिय &#8221; <a href="http://neelima-apple.blogspot.com/2010/03/blog-post_2183.हटमल">http://neelima-apple.blogspot.com/2010/03/blog-post_2183.हटमल</a></p>
<p style="text-align: justify;">इन पोस्टों को पढिये और अपने जीवन जीने के तरीकों के बारे में सोचिए ,जीवन के उन लम्हों को टटोलिये जिन्हे आज तक आपने दबाया हूआ था | सोचिए और हमे बताइए की क्या है वास्तविक जीवन ?</p>
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
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		<title>अपराधीकरण को रोकने की जुगत में बिहार चुनाव आयोग</title>
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		<pubDate>Tue, 05 Oct 2010 15:33:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दीपाली पाण्डेय</dc:creator>
				<category><![CDATA[यूपी-बिहार]]></category>

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		<description><![CDATA[चुनाव आयोग ने इस बार बिहार विधानसभा चुनाव को बाहुबलियों से दूर रखने की अपील की ,चुनाव आयोग की इस टिपण्णी के बाद स्वयंसेवी संगठनों ने राजनीतिक दलों पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। चुनाव को निष्पक्ष बनाने के ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;"><a rel="attachment wp-att-8406" href="http://www.janokti.com/bihar-election-up-election/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%97/attachment/bihar-legislative-assembly-building/"><img class="alignleft size-medium wp-image-8406" title="Bihar Legislative Assembly Building" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/Bihar-Legislative-Assembly-Building-300x208.jpg" alt="" width="300" height="208" /></a>चुनाव आयोग ने इस बार बिहार विधानसभा चुनाव को बाहुबलियों से दूर रखने की अपील की  ,चुनाव आयोग की इस टिपण्णी के बाद स्वयंसेवी संगठनों ने राजनीतिक दलों पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है।  चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए बिहार विधान सभा चुनाव क्षेत्र में एक  &#8220;संस्था एसोसियशन फॉर डैमोक्रेटिक रिफॉर्म्स एवं नेशनल इलेक्शन वॉच संस्था का गठन किया गया । बिहार विधान  सभा चुनाव में कुल २४३ सीटो पर चुनाव होना है। जिसमें से इस बार बिहार विधानसभा में करीब 80 सदस्य ऐसे हैं जिनके खिलाफ हत्या, अपहरण और जबरन धन वसूली जैसे गंभीर अपराधों के सिलसिले में आपराधिक मामले लंबित हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में अब तक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा 340 प्रत्याशियों की घोषणा की गई है जिनमें 80 ऐसे लोगों को टिकट दिया गया है जो आपराधिक मामले में लिप्त हैं। &#8216;एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म&#8217; (एडीआर) और इलेक्शन वॉच द्वारा जारी किए गए रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अब तक जारी प्रत्याशियों की सूची में 80 प्रत्याशी ऐसे हैं जिनके विरूद्घ मामले लंबित हैं | संस्था ने ऐसे सभी राजनितिक दलों से आपराधिक तत्वों को टिकट न देने की गुजारिश की है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">नायही नहीं, संस्था ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज को उनके बयानों की याद भी दिलाई है, जिसमें उन्होंने इस मसले पर आम सहमति बनाने की बात कही थी। संस्था के सदस्य और उत्तरप्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह का कहना है कि ज्यादातर राजनितिक पार्टियाँ अपराधियों को अपनी ओर खींचने में जुटी हैं। इस विषय में संस्था के सदस्य ने अपने शब्दों में कहा की &#8220;अपराधियों की जगह जेल में होती है, चुनाव मैदान में नहीं,ऐसे लोगों को टिकट देने से सभी दलों को बचना चाहिए&#8221;। स्वच्छ चुनाव के लिय चुनाव आयोग की और से बुलाई  गयी बठक में ज्यादातर दलों का मानना था की अपराधीकरण से लडने के लिए ठोस लेकिन सतर्क दिशानिर्देश हो | बिहार के पिछले विधानसभा चुनाव में पर्यवेक्षक रह चुके केजे राव का कहना है कि राजनीतिक दल यदि आपराधिक लोगों को देश के निति निमार्ण में भागिदार बनायें तो देश के भविष्य की सहज कल्पना की जा सकती है। चौंकाने वाली बात यह है की  कि जैसे-जैसे मतदान का प्रतिशत बढ़ रहा है, वैसे-वैसे &#8220;दागी&#8221; विधायकों की संख्या की संख्या बदती जा रही है |माना जाता है की  हर पांच साल में नियमित रूप से चुनाव होना सफल लोकतंत्र की पहचान है | केकिन सफल लोकतंत्र की पहचान तभी है जब नेता जनप्रतिनिधि के दुःख दर्द समझकर साथ ही समस्याओं को दूर रखने जेसे नीतियों का निर्माण कर चुनाव में अपने कदम रखे  । किसी भी विधानसभा में अगर आधे विधायक &#8220;दागी&#8221; हैं तो उस राज्य की भावी तस्वीर का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है |यदि ऐसे दागी चुनाव जीत कर शासन में अपनी भागीदारी रखते हैं तो ऐसे दागी नेताओं से देश की गरिमा को बदने की आशा पालना व्यर्थ है। ऎसे प्रतिनिधियों से तो शोर-शराबे और हंगामे के अलावा और कुछ उम्मीद भी नहीं की जा सकती। बिहार चुनाव में कई ऐसे अपराधी हैं जो सीधे राजनीति में प्रवेश कर पूरे देश में पैर पसार चके हैं |वाही बैठक में भाजपा की मांग थी की अगर कोई व्यक्ति दो जघन्य मामलों में लिप्त है तो उस पर भी प्रतिबन्ध होना चाहिए | कई ऐसे दागी नेता है जैसे  लल्लन सिंह ,पप्पू यादव  को भी इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में जगह मिली है |बहरहाल अब देखना यह होगा की,इतने प्रयासों के बाद बिहार विधान सभा चुनाव कितने  निष्पक्ष तरीकें से अपने चुनाव करने में चुनाव आयोग द्वारा किये गए प्रयास चुनाव को सफल बते हैं |</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">बिहार दागियों के आंकड़े</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">- पिछली बार चुनाव में उतरे 919 प्रत्याशियों के हलफनामों से साबित हुआ है कि उनमें से 358 (39 फीसदी) के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित थे।</p>
<p style="text-align: justify;">- इनमें से 213 (53 फीसदी) के खिलाफ तो हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, डकैती व फिरौती वसूलने जैसे संगीन मामले दर्ज थे।</p>
<p style="text-align: justify;">- कोई भी दल इन तत्वों को टिकट देने में पीछे नहीं था। ऐसे 30 फीसदी लोगों को सियासी दलों ने टिकट दिए थे।</p>
<p style="text-align: justify;">- इनमें से सर्वाधिक 53 फीसदी प्रत्याशी भाजपा के थे जबकि लोजपा, राजद व जदयू के 44 फीसदी प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मामले थे।</p>
<p style="text-align: justify;">- कांग्रेस के 39 फीसदी प्रत्याशियों के खिलाफ ऐसे मामले लंबित थे</p>
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
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		<title>शिक्षा एक मौलिक आधिकार के रूप में &#8230;&#8230;..</title>
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		<pubDate>Sun, 03 Oct 2010 13:01:05 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दीपाली पाण्डेय</dc:creator>
				<category><![CDATA[विचार -विमर्श]]></category>

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		<description><![CDATA[भारत के प्रत्येक नागरिक को प्राथमिक शिक्षा पाने का अधिकार है। शिक्षा के कारण ही बच्चा परिपक्व ,वैचारिक ,कल्पनाशील ,वैचारिक रूप से स्वंतंत्र बनता है &#124; लेकिन भारत की शिक्षा पद्धति अपने इस उद्देश्य को साकार करने में असफल रही ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-8263" href="http://www.janokti.com/discussion-suggestions-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87/attachment/siksha29jun1277798736_storyimage/"><img class="alignleft size-medium wp-image-8263" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/siksha29Jun1277798736_storyimage-300x214.jpg" alt="" width="300" height="214" /></a>भारत के प्रत्येक नागरिक को प्राथमिक शिक्षा पाने का अधिकार है। शिक्षा के कारण ही बच्चा परिपक्व ,वैचारिक ,कल्पनाशील ,वैचारिक रूप से स्वंतंत्र बनता है | लेकिन भारत की शिक्षा पद्धति अपने इस उद्देश्य को साकार करने में असफल रही |आज भी कई ऐसे बच्चे है जो शिक्षा से वंचित है | शिक्षा को हर जगह उपलब्ध करने के लिए कई प्रावधान होने चाहिये जैसे “प्रारंभिक (प्राथमिक व मध्य स्तर) पर शिक्षा निःशुल्क हो, प्रारंभिक शिक्षा अनिवार्य हो ,तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा को सर्वसुलभ बनाया जाए एवं उच्च शिक्षा सभी की पहुँच के भीतर हो” | शिक्षा का उपयोग मानव व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास, मानवीय अधिकारों और बुनियादी स्वतंत्रता के लिए किया जाना चाहिए। माता-पिता और अभिभावकों को यह पूर्वाधिकार हो कि वे अपने बच्चों को किस तरह की शिक्षा देना चाहते हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हो जाने के बाद भारत उन १३५ देशों की सूची में शामिल हो गया, जो बच्चों को निः शुल्क और आवश्यक शिक्षा उपलब्ध करने की कानूनी गारंटी प्रदान करता है| यूनेस्को की एजुकेशन फॉर आल ग्लोबल मोनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के लगभग १३५ देशों में सबको निशुल्क और भेदभाव रहित शिक्षा प्रदान करने का संवैधनिक प्रवधान है| भारत में ६ से १४ वर्ष के प्रत्येक बच्चे को वर्ष २०१० तक किसी भी दशा में कक्षा ८ तक अनिर्वाय शिक्षा उप्लब्ध कराना सर्व शिक्षा अभियान का लक्ष्य हैं ।</p>
<p style="text-align: justify;">सर्व शिक्षा अभियान</p>
<p style="text-align: justify;">सबके लिए शिक्षा अभियान बच्चों, युवाओं व प्रौढ़ों को गुणवत्तायुक्त बुनियादी शिक्षा प्रदान करने की वैश्विक प्रतिबद्धता है।सर्व शिक्षा अभियान जिला आधारित एक विशिष्ट विकेन्द्रित योजना है। इसके माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण की योजना है। इसके लिए स्कूल प्रणाली को सामुदायिक स्वामित्व में विकसित करने रणनीति अपनाकर कार्य किया जा रहा है। यह योजना पूरे भारत में लागू की गई है और इसमें सभी प्रमुख सरकारी शैक्षिक पहल को शामिल किया गया है। इस अभियान के अंतर्गत राज्यों की भागीदारी से 6-14 आयुवर्ग के सभी बच्चों को 2010 तक प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। | वर्ष 1990 में सभी के लिए शिक्षा के विश्व-सम्मेलन में इस अभियान को प्रारंभ किया गया था।नागरिक साक्षरता दर बदने के लिए कई तरह की योजनायें चल रही है ,भारत में कई ऐसे राज्य हरियाणा ,बुंदेलखंड ,आदि क्षेत्रों में नूतन प्रयोग के बाद शिक्षा के द्वार खुल गए है लेकिन इतने प्रयासों के बाद भी कई देश है जो इस लक्ष्य से काफी पीछे चल रहे हैं ,</p>
<p style="text-align: justify;">सेनेगल के डकार शहर में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने पुनः सम्मेलन में भाग लिया और वर्ष 2015 तक सभी के लिए शिक्षा के लक्ष्य को हासिल करने के प्रति अपनी वचनबद्धता दोहराई। उन्होंने छह मुख्य शिक्षा लक्ष्यों की पहचान की और वर्ष 2015 तक सभी बच्चों, युवाओं और प्रौढ़ वर्ग की शिक्षण आवश्यकताओं की पूर्ति करने की बात कही।एक अग्रणी अभिकरण के रूप में यूनेस्को सभी अन्तरराष्ट्रीय पहल को सबके लिए शिक्षा के लक्ष्य को पाने की ओर प्रवृत एवं एकजुट कर रही है। सरकारें, विकास अभिकरण, नागरिक संस्थाएँ, गैर-सरकारी संस्थाएँ एवं मीडिया कुछ ऐसे सहयोगी हैं जो इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।सबके लिए शिक्षा लक्ष्य को प्राप्त करने का यह अभियान आठ शताब्दी विकास लक्ष्य (मिलेनियम डेवलपमेन्ट गोल, एमडीजी) विशेषकर वर्ष 2015 तक सार्वजनिक प्राथमिक शिक्षा पर एमडीजी -2 और शिक्षा में महिला-पुरुष समानता पर एमडीजी -3 को भी मदद पहुँचा रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">शिक्षा के महत्व पर ग्रामीण लोगों को प्रेरित किये जाने की आवश्यकता है। निम्नलिखित सूचनाएँ लोगों के लिए समाधान प्रदान करेंगी-</p>
<p style="text-align: justify;">1.बालिका शिक्षा</p>
<p style="text-align: justify;">2.बाल-मजदूरों के लिए शिक्षा एवं संयोज़क पाठ्यक्रम</p>
<p style="text-align: justify;">3.अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग व अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा</p>
<p style="text-align: justify;">4.शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग, अपंग एवं विशेष बच्चों के लिए शिक्षा</p>
<p style="text-align: justify;">5.शिक्षा व महिलाएँ</p>
<p style="text-align: justify;">
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		<title>क्या है महिला अधिकार ?</title>
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		<pubDate>Fri, 01 Oct 2010 14:19:29 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दीपाली पाण्डेय</dc:creator>
				<category><![CDATA[नारी]]></category>
		<category><![CDATA[समाज]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[न्याय का अधिकार]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय संविधान]]></category>
		<category><![CDATA[महिला अधिकार]]></category>
		<category><![CDATA[महिला सशक्तिकरण]]></category>
		<category><![CDATA[महिला-पुरुष]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतान्त्रिक भारत]]></category>
		<category><![CDATA[समानता]]></category>
		<category><![CDATA[स्वतन्त्रता]]></category>

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		<description><![CDATA[देश भर में नारी उत्थान (महिला अधिकार) की बात बड़े ही जोर-शोर से उठाई जा रही है लेकिन देश की अधिकाँश महिलाओं को सही मायनों में उनके मौलिक अधिकारों अथवा संवैधानिक अधिकारों की जानकारी ना के बराबर है &#124; आइये ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<blockquote>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="color: #0000ff;">देश भर में नारी उत्थान (<a href="http://www.janokti.com/?s=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE+%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0&amp;x=-184&amp;y=1">महिला अधिकार</a>) की बात बड़े ही जोर-शोर से उठाई जा रही है लेकिन देश की <a href="http://www.janokti.com/discussion-suggestions-campaign-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%a6/">अधिकाँश महिलाओं </a>को सही मायनों में उनके मौलिक अधिकारों अथवा संवैधानिक अधिकारों की जानकारी ना के बराबर है | आइये जानते है कि भारतीय संविधान के अनुसार भारतीय महिलाओं को क्या-क्या हक़ प्रदान किये गये हैं </span></strong>|</p>
</blockquote>
<p style="text-align: justify;"><strong><a rel="attachment wp-att-8088" href="http://www.janokti.com/discussion-suggestions-campaign-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/society-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/attachment/indianwomen-300x225/"><img class="alignright size-full wp-image-8088" title="indianwomen-300x225" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/indianwomen-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" /></a><a href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%85/">भारतीय संविधान</a> </strong>के अनुच्छेद 14,15 और 16 में देश के प्रत्येक <strong>नागरिक को समानता का अधिकार</strong> दिया गया  है। समानता का मतलब &#8216;समानता &#8216; , इसमें किसी प्रकार का लिंग भेद नहीं है । <strong><a href="http://www.indg.in/social-sector/social-awareness/all-are-equal/93893e92e93e91c93f915-93892e93e92892493e">समानता</a> , स्वतन्त्रता और न्याय का अधिकार </strong>महिला-पुरुष दोनों को समान रूप से दिया गया है। शारीरिक और मानसिक तौर पर नर-नारी में किसी प्रकार का  भेदभाव असंवैधानिक माना  गया है ।  हालाँकि आवश्यकता महसूस होने पर <strong><a href="http://www.indg.in/social-sector/social-awareness/all-are-equal/93893e92e93e91c93f915-93892e93e92892493e">महिलाओं और पुरुषों</a> </strong>का वर्गीकरण किया जा सकता है। अनुच्छेद-15 में यह प्रावधान किया गया है कि  <strong><a href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%85/">स्वतंत्रता -समानता और न्याय </a></strong>के साथ -साथ के महिलाओं /लड़कियों की <strong>सुरक्षा और  संरक्षण</strong> का काम भी <strong>सरकार का कर्तव्य </strong>है।  जैसे <strong>बिहार </strong>में लड़कियों के लिए <strong>साइकिल और पोषक की योजना</strong> , <strong>मध्यप्रदेश</strong> में लड़कियों के लिए &#8216; <strong>लाड़ली लक्ष्मी&#8217; योजना</strong> , दिल्ली में मेट्रो में महिलाओं के लिए <strong>रिजर्व कोच की व्यवस्था </strong>आदि ।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong><a href="http://www.janokti.com/discussion-suggestions-campaign-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/women-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b/">स्वतंत्रता और समानता का अधिकार</a> :- </strong>अनुच्छेद-19 में महिलाओं को यह अधिकार दिया गया है कि वह देश के किसी भी हिस्से में नागरिक की हैसियत से स्वतन्त्रता के साथ आ-जा सकती है, रह सकती है। व्यवसाय का चुनाव भी स्वतन्त्र रूप से कर सकती है। महिला होने के कारण किसी भी कार्य के लिए उनको मना करना उनके मौलिक अधिकार का हनन होगा और ऐसा होने पर वे कानून की मदद ले सकती है।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong><a href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%8c%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be/">नारी की गरिमा का अधिकार : &#8211; </a></strong>अनुच्छेद-23 नारी की गरिमा की रक्षा करते हुए उनको शोषण मुक्त जीवन जीने का अधिकार देता है। महिलाओं की खरीद-बिक्री , वेश्यावृत्ति के धंधे में जबरदस्ती लाना , भीख मांगने पर मजबूर करना आदि दण्डनीय अपराध है। ऐसा कराने वालों के लिए भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत सजा का प्रावधान है। संसद ने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम,1956 पारित किया है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा-361, 363, 366, 367, 370, 372, 373 के अनुसार ऐसे अपराधी को सात साल से लेकर 10 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा भुगतनी पड़ सकती है। अनुच्छेद-24 के अनुसार 14 साल से कम उम्र के लड़के या लड़कियों से काम करवाना बाल-अपराध है।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>घरेलु हिंसा का कानून :- </strong>घरेलु हिंसा अधिनियम , 2005 जिसके तहत वे सभी महिलाये जिनके साथ किसी भी तरह  घरेलु हिंसा की जाती है, उनको प्रताड़ित किया जाता है , वे सभी पुलिस थाने जाकर F।I.R दर्ज करा सकती है , तथा पुलिसकर्मी बिना समय गवाएँ प्रतिक्रिया करेंगे |</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दहेज़ निवारक कानून :</strong>- दहेज़ लेना ही नहीं देना भी अपराध हैं । अगर वधु पक्ष के लोग दहेज़ लेनी के आरोप मे वर पक्ष को कानून सजा दिलवा सकते हैं तो वर पक्ष भी इस कानून के ही तहत वधु पक्ष को दहेज़ देने के जुर्म मे सजा करवा सकता हैं ।  1961 से लागू  इस कानून के तहत बधू को दहेज़ के नाम पर प्रताड़ित करना भी संगीन जुर्म है |</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नौकरी / स्वव्यवसाय करने का अधिकार : -</strong> संविधान के अनुच्छेद 16 में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि हर वयस्क लड़की व हर महिला को कामकाज के बदले वेतन प्राप्त करने का अधिकार पुरुषों के बराबर है। केवल महिला होने के नाते रोजगार से वंचित करना, किसी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित करना लैंगिग भेदभाव माना जाएगा।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार: -</strong> अनुच्छेद-21 एवं 22 दैहिक स्वाधीनता का अधिकार प्रदान करता है। हर व्यक्ति को इज्जत के साथ जीने का मौलिक अधिकार संविधान द्वारा प्रदान किया गया है। अपनी देह व प्राण की सुरक्षा करना हरेक का मौलिक अधिकार है।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>राजनीतिक  अधिकार:-</strong> प्रत्येक महिला व वयस्क लड़की को चुनाव की प्रक्रिया में स्वतन्त्र रूप से भागीदारी करने और स्व विवेक के आधार पर वोट देने का अधिकार प्राप्त है। कोई भी संविधान सम्मत योगता रखने पर किसी भी तरह के चुनाव में उम्मीदवारी कर सकती है |</p>
]]></content:encoded>
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