Articles By: नितिन देसाई

घोटाला वर्णमाला

घोटाला वर्णमाला

2 2011/02/02 10:57 am

क्यों ? घुटलू …  ए, बी, सी, डी..याद है ? हाँ… मास्साब… अरे…! तुझ जैसे गधे… को ए, बी,सी, डी…याद कैसे  हो गई? अरे… मास्साब… अब तो  किसी को भी याद  हो सकती है ! क्यों ? ……मास्साब… देश में रोज एक घोटाला होता है!.. है

घुनानंद की औषधि !

0 2010/10/14 12:56 am

मुझे, विगत वर्ष पितृपक्ष में बरसी कार्यक्रम हेतु जाना था. मै तैयार होकर रेलवे स्टेशन पहुँचा  स्टेशन पर गाड़ी की प्रतीक्षा कर ही रहा था कि एकाएक मेरे दो पर्यावरण मित्र श्री विजय शर्मा और श्री सुनील यादव जी दिखाई

हिंदी को ह्रदय से स्वीकारें  |

हिंदी को ह्रदय से स्वीकारें |

0 2010/09/16 5:01 pm

बगीचों में अलग-अलग रंग के फूल और उनका सुवास चारों ओर के वातावरण  को  स्फूर्ति दायक  बना देता है. बच्चे,बूढ़े,जवान सभी का मन करता है कि बगीचे के आनंद का लाभ लिया जाय. उसी प्रकार भारत वर्ष एक सुन्दर  बगीचा

शिक्षकों का कैसा सम्मान ?

शिक्षकों का कैसा सम्मान ?

0 2010/09/12 8:55 pm

पांच सितम्बर को शिक्षक दिवस था. हम सभी जानते है कि भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जन्मदिवस को हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते है.उस दिन मै सुबह -सुबह समाचार पत्र पढ़ रहा था. समाचार

रंग-बिरंगा आतंकवाद !

रंग-बिरंगा आतंकवाद !

0 2010/08/30 11:55 pm

वास्तव में आतंकवाद बद-रंग है और दूसरों के इन्द्रधनूशी रंगों को छीन लेता है, फिर भी हम इसे काले रंग के रूप में लेते है, क्योंकि उनका उसूल है अँधेरा कायम रहे. भगवा आतंकवाद कहना ही गलत है क्योंकि आतंकवादी

राखी का अनुपम उपहार

राखी का अनुपम उपहार

1 2010/08/24 12:23 am

बचपन की बात है, अक्सर मै अपने दादाजी से कहानियां सुनाने को कहा करता था.वर्षा रितु, सावन का महिना था. चारों ओर हरियाली,पानी की फुहार गर्मी की तपिश को कम कर रही थी.वैसे भी श्रावण मास का भारतीय संस्कृति में

क्या सोचेंगे तिलक जी

क्या सोचेंगे तिलक जी

0 2010/08/08 4:35 pm

“स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्धअधिकारहै.”उक्तवाक्यांश लोकमान्यबाल गंगाधर तिलक जी द्वारा कहे गए थे.अगस्त की पहली तारीख को उनकी नब्बेवी पुण्यतिथि थी. जिनका स्मरण विभिन्न समाचार पत्रों द्वाराकिया गया है,परन्तु मुझे ऐसा लगता है की वो भी शायद मित्रता दिवस की आंधी में उड़ गया. तिलक जी को स्वर्ग में बैठे- बैठे आत्मग्लानी हो रही होगी जब उन्होंने देखा होगा की उनके वाक्यांशों का आज अक्षरशः पालन किया जा रहा है, वो भी उनकी कर्मभूमि पुणे नगरी में जहाँ लगभग साढ़े तीनसो युवक युवतियों, जो की एक दूसरे को अपना मित्र कहते है, “फ्रेंडशिप डे”

माखनलाल की सलाह !

माखनलाल की सलाह !

0 2010/07/29 8:20 pm

अरी… सोनू की मम्मी, सुनती हो… क्या है ? अरे अपने कंप्यूटर में कीड़ो, वर्म आ गया है.आप भी.. सोनू के पापा..वर्म तो पेट में होते है और कीड़े तो दांत में लगते है,तो फिर अपने कंप्यूटर में कैसे लग