वाद की राजनीति करना देशहित में नहीं
2आज तक भारत केवल आतंकवाद, उग्रवाद और संप्रदायवाद जैसी समस्याओं से जूझता रहा। इससे निजात पाने की जुगत में लगा रहा। इससे निजात अभी मिली भी नहीं कि क्षेत्रावाद की आग ने देश को फिर से झुलसाना शुरू कर दिया।
आज तक भारत केवल आतंकवाद, उग्रवाद और संप्रदायवाद जैसी समस्याओं से जूझता रहा। इससे निजात पाने की जुगत में लगा रहा। इससे निजात अभी मिली भी नहीं कि क्षेत्रावाद की आग ने देश को फिर से झुलसाना शुरू कर दिया।
चंद वर्षो पहले इंग्लैंड के छोटे परदे पर दिखाए गए रियलिटी शो बिग ब्रदर में भारतीय अभनेत्री शिल्पा शेट्टी के साथ हुए नस्लभेदी बर्ताव ने जहँ देश के आत्म सम्मान को ठेस पहुचाया। वही सभ्य समाज का चोल ओढे इंग्लैंड
जब लहरों से टकराये पत्थरवो पत्थर भी पल में बिखर जाता हैरेत बनके वो कण-कण से पत्थरसमन्दर में जाके वो मिल जाता हैजब लहरों से टकराये पत्थरखेवईयां चलाए बस्तियों कोबस्तियों से मिलाए बस्तियों कोजब समन्दर की लहरें बदल जाती हैंउजाड़
बचपन से ही शर्मीला किस्म का इंसान। लड़कियां तो दूर लड़कियों के शब्द से भी सिरहन सी होने लगती। दोस्त कई सारे हुए मगर सभी समान लिंग वाले। इसका कदापि मतलब नहीं की उसमें ‘दोस्ताना’ वाले लक्षण शामिल थे, बल्कि
" वर्जिन की तलाश " यह किसी मोबाईल का एड नहीं है बल्कि जीवन की एक कड़वी सच्चाई है। आज की इस दौड़ती भागती जिंदगी और पर्यावरण में घुलते रासायनिक जहर ने लोगों में स्वच्छता को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी
१५ वीं लोकसभा का चुनाव के नतीजों से यह आभाष हो चुका है कि युग परिवर्तन के साथ-साथ लोकतंत्र में भी बदलाव होने की पूरी-पूरी संभावना है। ६२ वर्ष पूर्व भारत के चंद महानायको अर्थात नेताओं ने भारतवासियों के सहयोग
एक मच्छर और एक आतंकवादीदोनो की बढ़ रही है आबादीदोनो का नाता बस खून से हैएक इंसान का खून पीता हैतो दूजा खून बहाता है।इसलिए पीने वाला मच्छरऔर बहाने वाला आतंकवादी कहलाता हैदोनों में कई समानताएं और विषमताए हैंसमानताए हैं