Articles By: नवीन देवांगन

मेरी प्यारी हिन्दी,मुझे माफ करना

मेरी प्यारी हिन्दी,मुझे माफ करना

0 2010/09/13 8:40 pm

“चल रे मटकी टम्मक टू ….” को  “जॉनी जॉनी यस पापा…..” के सामने न जाने कितनी दफा शर्मिंदा होना पड़ा , अ-अनार के सामने ए-ऐपल्ल का, हमेशा से ही भारी पड़ा , पर राष्ट्रभक्त और हिन्दी प्रेम मे मदहोश मेरे

कुछ करो पवार साहब !

कुछ करो पवार साहब !

1 2010/07/18 3:18 pm

हिंदुस्तान को किसी ज़माने में सोने की चिड़िया कहा जाता था ऐसा अक्सर हम बचपन से सुनते आए है और किताबों में भी पढ़ते आए है पर आज के हिंदुस्तान का असली चेहरा पूरे विश्व के सामने है दो जून

इट्ज ओनली हेप्पन इन इंडिया

इट्ज ओनली हेप्पन इन इंडिया

1 2010/07/03 5:13 pm

लो एक और इंसान का जीते जी एक और मंदिर बन कर तैयार है हमारी भावी पीढ़ी नारियल-फूल- माला ले कर इस मंदिर के घंटा बजाकर न जाने कौन-कौन सा वरदान मांगे ? धन्य है भारतनगरी ! और धन्य है

कभी तो सुधरे हम ?

कभी तो सुधरे हम ?

0 2010/06/10 2:23 pm

हम विकसित होने के चाहे लाख दावें कर लें लेकिन आज भी समाज के अंदर वो कुरितियां भरी पड़ी हैं, जो सभ्य समाज के नाम पर कलंक हैं और कही न कही हमे विश्वमंच पर अपनी छबि सुधारने के दुरास्वप्न से

पत्ते मत छाटों पेड़ की जड़ काँटों

पत्ते मत छाटों पेड़ की जड़ काँटों

0 2010/06/10 2:02 pm

आज़ादी के 62 साल बाद भी समाजिक, आर्थिक नीतियों के चलते हिन्दुस्तान का एक बहुत बड़ा हिस्सा लगभग 70 प्रतिशत लोग आज भी हाशिए पर जीने को मज़बुर है जिनके सरोकारो की चिंता न सरकारो को रही न ही नीतियों