Articles By: लीना लीना

मीडिया किसी जग्गू या बुधनी का नहीं , बल्कि ऐश्वर्या-युवराज का ही है !

मीडिया किसी जग्गू या बुधनी का नहीं , बल्कि ऐश्वर्या-युवराज का ही है !

1 2012/04/11 10:10 pm

घर लौटा युवराज, कैंसर बाउंड्री पार !- जैसी शीर्षकों से आज का मीडिया अटा पड़ा है। खुशी की बात है। हो भी क्यों नहीं एक व्यक्ति स्वस्थ होकर आया है। फिर खेलेगा भारत की और से। मीडिया ने पलक फांवड़े

विज्ञापन में रंगभेद क्यों ?

1 2012/03/30 4:20 pm

‘अब व्हाइट जीतेगा’ चेस खेलने वाली एक गोरी महिला दावे के साथ कहती है। ब्लैक आउट व्हाइट इन- बड़े गर्व के साथ कहा जाता है। सिर्फ यही नहीं आप अच्छा गाती हैं लेकिन यदि काले या सांवले भी हैं तो गा

“दबे पांव आपके घर में घुसा पोर्न”

“दबे पांव आपके घर में घुसा पोर्न”

2 2012/02/25 8:45 pm

‘‘दबे पांव आपके घर में घुसा पोर्न’’ आवरण कथा और तस्वीर छापकर ( इंडिया टुडे, 23-29 फरवरी 2012) पत्रिका ने यह साबित कर दिया है कि इसका मकसद सिर्फ और सिर्फ अश्लीलता परोसकर बाजार में अपने को कायम रखना भर

नीतीश सरकार ‘हिन्दुस्तान’ पटना पर मेहरबान क्यों  ?

नीतीश सरकार ‘हिन्दुस्तान’ पटना पर मेहरबान क्यों ?

0 2011/08/23 10:40 pm

पटना / बिहार की मीडिया पर आरोप लगता रहा है कि वह नीतीश सरकार के सुशासन में घटने वाली घटनाओं को उस तेवर के साथ नहीं उठाती जिस तेवर से उठाना चाहिए। इन सबके पीछे नीतीश सरकार का मीडिया मैनेजमेंट

क्या अन्ना (सिविल सोसाइटी) का लोकपाल जादू की छड़ी होगी ?

क्या अन्ना (सिविल सोसाइटी) का लोकपाल जादू की छड़ी होगी ?

0 2011/08/19 5:50 pm

अन्ना के साथ आज पूरा देश खड़ा है। यह हूजूम पूरे जोश में है। धूप में, पानी में भींगते, सोशल नेटवर्किंग साइटों पर, नेट पर, देश भर के मीडिया में लबालब- ठसाठस भरे। इससे यह तो जरूर उजागर होता है कि अवाम भ्रष्टाचार से

बच्चों को अपराध की ओर धकेलते विज्ञापनों पर मीडिया बेबस

बच्चों को अपराध की ओर धकेलते विज्ञापनों पर मीडिया बेबस

2 2011/02/23 8:35 pm

बैंकिंग तो झमेला है और बैंकिंग अब चुटकी में यार! दो शिशु, जो खुद बोल भी नहीं सकते, आपको भरोसा दिला रहे हैं! नीचे छोटे अक्षरों में लिखा है- बच्चे इसकी नकल न करें। तो उपर विज्ञापन में दो नन्हे

मुद्दे और भी हैं ! जाति क्या है

मुद्दे और भी हैं ! जाति क्या है

1 2010/07/23 2:42 pm

जातिगत जनगणना के बहाने इन दिनों जाति पर ही बहस छिड़ी है। अच्छी बात है। पर विरोध हो रहा है सिर्फ जातिगत जनगणना को लेकर। धरना प्रदर्शन हो रहे हैं, उपवास भी रखा जा रहा है। विभिन्न मीडिया पर भी

मीडिया और नक्सलवाद

मीडिया और नक्सलवाद

0 2010/05/30 10:19 pm

आपरेशन ग्रीन हंट और किशनजी द्वारा वार्ता करो, नहीं तो शहरों पर धावा करेंगे जैसी खबरें मीडिया में भी छायी रही हैं। पहले भी नक्सली वारदातों या सशस्त्र बलों द्वारा उनके खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को मीडिया अच्छी तरजीह

नकारात्मक सोच का नतीजा है गर्ल्स ट्रैफिकिंग

नकारात्मक सोच का नतीजा है गर्ल्स ट्रैफिकिंग

0 2010/05/11 5:18 pm

बेटियां यानी जननी प्रकृति की, सृष्टि को चलाने वाली, बढ़ाने वाली। सदियों से हमारे समाज में देवियो की तरह पूजी भी जाती रही हैं। पर दूसरी ओर समाज में उन्हें दोयम दर्जें का इंसान भी समझा जाता रहा है। आज

बालश्रमिक सुविधाभोगी समाज की देन

बालश्रमिक सुविधाभोगी समाज की देन

3 2010/04/28 4:52 am

देश में अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून लागू हो चुका है। 6 से 14 उम्र तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रावधान किया गया है। यों पहले से भी बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए कई