हाय ! ऐसी मोहब्बत
2इस भरी दोपहरी में, क्यूँ शमा जलाए बैठी हो | किसका इंतजार है , जो द्वार खोले बैठी हो|| ये कैसी तलब है, जो पलके बिछाए बैठी हो| ये कैसी तन्हाई है, जो बेचैन हुए बैठी हो|| निकला पतझड सावन,
इस भरी दोपहरी में, क्यूँ शमा जलाए बैठी हो | किसका इंतजार है , जो द्वार खोले बैठी हो|| ये कैसी तलब है, जो पलके बिछाए बैठी हो| ये कैसी तन्हाई है, जो बेचैन हुए बैठी हो|| निकला पतझड सावन,