40 करोड़ खर्चने के बाद भी इंतज़ार
2घटना एक और शहर एक। घटना एक और अंजाम देने वाले दस। घटना एक और हताहत सैकड़ों। घटना एक और प्रभावित हजारों। घटना एक और देखने वाले लाखों। अब घटना के बाद की स्थिति— आये दस और शामिल दस। आये
घटना एक और शहर एक। घटना एक और अंजाम देने वाले दस। घटना एक और हताहत सैकड़ों। घटना एक और प्रभावित हजारों। घटना एक और देखने वाले लाखों। अब घटना के बाद की स्थिति— आये दस और शामिल दस। आये
देश की जनता में एकदम से बाघों को बचाने की होड़ शुरू हो गई है। लिख-लिख कर कागज काले कर डाले (वैसे अब कागज काले करने की जरूरत नहीं ब्लाग जो है) टी-शर्ट पहन डाली और भी जो तमाशा हो
उत्तर प्रदेश विधान परिषद् के स्थानीय निकाय के लिए चुनावी प्रक्रिया चल रही है। प्रत्याशियों का चयन हो चुका है, नामांकन प्रक्रिया हो चुकी है अब बस मतदान का इंतजार है। इसी इन्तजार के बीच मतदाताओं के खरीद-फरोख्त की
26/11 की बरसी की तैयारियाँ शुरू हो चुकीं हैं। मुम्बई में फिल्मी सितारों से लेकर दूसर अन्य स्टार इसके लिए तैयार हैं। समाचार-पत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ कि कार्यक्रम में विशेष रूप से कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर
देश का नेता कैसा हो? फलां फलां जैसा हो। इस तरह के नारे चुनाव के समय बहुतायत रूप में सुनाई देते हैं। तब लगता है कि जिस नेता को हम अपने देश की सत्ता देने जा रहे हैं वह हमारे लिए कुछ विशेष करेगा। चुनाव के बाद एकाएक तस्वीर बदल जाती है। सत्तासीन होने के बाद सत्ता से दूर नेता और उसके दल का एक सूत्रीय कार्यक्रम होता है सत्ताधारी दल को सत्ता से हटाना।
आदिमानव से महामानव बनने तक की दौड़ के बाद हम मानव का दानवी रूप देख रहे हैं। स्वार्थ के वशीभूत होकर वह लगातार इस तरह के क्रियाकलाप करता रहा है कि कभी कभी मानव के वर्तमान स्वरूप पर ही
‘यौन शिक्षा’, यदि इसके आगे कुछ भी न कहा जाये तो भी लगता है कि किसी प्रकार का विस्फोट होने वाला है। हमारे समाज में ‘सेक्स’ अथवा ‘यौन’ को एक ऐसे विषय के रूप में सहज स्वीकार्यता प्राप्त है जो पर्दे के पीछे छिपाकर रखने वाला है; कहीं सागर की गहराई में दबाकर रखने वाला विषय है।
सच की कीमत क्या है? सच बोलने की कीमत क्या है? सच साबित करने की कीमत क्या है? ये सवाल अपने आपमें महत्वपूर्ण हो सकते हैं पर कितने? इस सच को कौन देखेगा? चलिए सच बोलना मना है तो
अभी हाल ही में टीवी पर एक कार्यक्रम शुरू हुआ ‘सच का सामना’। पहले लग रहा था कि कार्यक्रम में कुछ विशेष होगा किन्तु जब आये दिन इसके ट्रेलर दिखाये गये और बाद में इसकी पहली ही कड़ी के
आज हमारी इस ब्लाग पर यह पहली पोस्ट है। चूँकि सच बोलना मना है (शायद इस कारण कि कड़वा होता है या फिर इस कारण कि इसे सुनना कोई पसंद नहीं करता) चलिए कुछ लिखने के पहले शपथ कि जो