Articles By: के .पी. त्रिपाठी

चिरस्थाई अस्थिरता के लिए आर्थिक विकास जरूरी

चिरस्थाई अस्थिरता के लिए आर्थिक विकास जरूरी

0 2011/01/31 9:35 pm

घाटी में चल रही हिंसा रूकने का नाम नहीं ले रही। पत्थर बरसाने वालों की तादात में इजाफा होता जा रहा है और सरकार वोट बैंक के लालच में पत्थरबाजों पर लगाम लगाने से कतरा रही है। हालात बेकाबू हो

मिशन 2012, उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव

मिशन 2012, उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव

3 2011/01/14 3:13 pm

चुनौतियों के आर-पार, कहां हैं हम उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी पूरा-पूरा एक साल शेष है। देश की राजनीति की दशा तय करने वाला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कई मामले में अहम है। उत्तर प्रदेश की सियासी गर्मी की तपिस

सूखती स्याही और कुन्द होती खबरों की धार

सूखती स्याही और कुन्द होती खबरों की धार

0 2010/09/10 10:46 pm

“मत कहो, आकाश में कुहरा घना है, यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है ” दुष्यंत कुमार की यह पंक्ति वर्तमान मीडिया परिवेश में अक्षरतः सटीक बैठती हैं। कलम की स्याही सूख रही है। खबरों की धार कुंद होती जा रही है। रिर्पोटर

कौन भरेगा भूख से तड़पते देश का पेट ?

कौन भरेगा भूख से तड़पते देश का पेट ?

0 2010/08/12 6:04 pm

बुंदेलखंड की मऊ तहसील के एक गांव में किसान घोटवा ने अपने तीन बच्चों को जहर के चावल खिलाकर मौत की नींद सुला दिया। ग्रामीण बताते हैं कि वह एक सप्ताह से महुआ की कोपले खिलाकर अपने बच्चों का पेट

कटटरपंथियों की बौखलाहट का नतीजा घाटी हिंसा

कटटरपंथियों की बौखलाहट का नतीजा घाटी हिंसा

0 2010/08/07 10:52 pm

घाटी सुलग रही है।प्रदर्शनकारियों , मौत,, पिछले एक महीने से यही नियति है कष्मीर घाटी की । स्कूल बंद हैं। बाजार बंद हैं। घायल और बीमार अस्पताल नहीं पहुँच पा रहे हैं। धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला राज्य प्रदषनकरियों

सियासी दलो में अल्पसंख्यक मतदाताओं को लुभाने की होड़

सियासी दलो में अल्पसंख्यक मतदाताओं को लुभाने की होड़

0 2010/06/18 3:42 pm

इसे आने वाले विधान सभा चुनाव की तैयारी कहें या फिर कुछ माह बाद होने वाले पंचायती चुनाव का खाका। सभी सियासी दलों में मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की होड़ मची हुई है। वैसे जिस तरह से मुस्लिम मतदाताओं में भ्रम

अगला शिकार कौन?

अगला शिकार कौन?

0 2010/06/02 12:38 pm

कभी बेंगलुरु, तो कभी दिल्ली। कभी हवाई जहाज, तो कभी बस या कभी रेल। वही दहशत, वही दरिंदगी, वही हैवनियत, वही बेगुनाहों की लाशें, वही मौत का नंगा नाच और फिर वही आंकड़ों का जमा खाता। घटना के बाद फिर

मिस काल से शुरू हुआ प्यार कहीं भारी न पड़ जाए

मिस काल से शुरू हुआ प्यार कहीं भारी न पड़ जाए

3 2010/05/09 2:03 pm

तेज बारिश, रात का घना अंधेरा, अंजान शहर और उस शहर की तमाम सड़कों पर भरा पानी, ऐसे में एक जवान खूबसूरत लड़की उस अजनबी शहर में अपने एक ऐसे प्रेमी से मिलने आती है जिसे उसने कभी नहीं देखा।

कलयुगी चमत्कारी बाबा

कलयुगी चमत्कारी बाबा

2 2010/05/06 6:25 pm

गरीबी और अमीरी दोनों ही मनुष्य को अंधविश्वास की तरफ धकेलते हैं। गरीब अपनी गरीबी से कैसे निजात पाए और अमीर सब ऐशो-आराम के बाद भी सकून की नींद कैसे पाए? इसका उत्तर ढूंढने बाबाओं की शरण में आते हैं।

क्या बापू अर्ध-दमित सेक्स मैनियॉक थे ?

क्या बापू अर्ध-दमित सेक्स मैनियॉक थे ?

16 2010/05/03 6:58 pm

क्या राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचंद गांधी असामान्य सेक्स व्यवहार वाले अर्द्ध.दमित सेक्स मैनियॉक थे ? जी हां, महात्मा गांधी के सेक्स.जीवन को केंद्र बनाकर लिखी गई किताब “ Gandhi : Naked Ambition ” में एक ब्रिटिश प्रधानमंत्री के हवाले से ऐसा