एक और गणतंत्र दिवस
0एक और गणतंत्र दिवस मनाने का दिन आ गया ! वो गणतंत्र जो हमें देश के लाखों वीरों की कुर्बानी देकर आज़ादी हासिल होने के बाद मिला ! आज़ादी के बाद देश को सुचारु रुप से चलाने के लिए हमने
एक और गणतंत्र दिवस मनाने का दिन आ गया ! वो गणतंत्र जो हमें देश के लाखों वीरों की कुर्बानी देकर आज़ादी हासिल होने के बाद मिला ! आज़ादी के बाद देश को सुचारु रुप से चलाने के लिए हमने
सभी पूछते हैं आप का हाल कैसा है, यदि आपके पास पैसा है ! आज के आर्थिक युग में प्रत्येक व्यक्ति पैसे के पीछे भाग रहा है ! पैसे के बिंना इस संसार में कुछ भी नहीं है ! बाप
ट्रेन मानो पंख लगाकर उडी जा रही थी ! पेड, खम्भे, मकान, दुकान, पहाड सभी पीछे छूटे जा रहे थे ! जिस स्थान से रेलगाडी गुजरती थी वहां की धरती कुछ देर के लिए कांप सी जाती थी रेल की
पता नहीं आजकल के छोकरों को क्या हो गया है ? बूढों को कुछ समझते ही नहीं ! एक जमाना था कि लोग बुजुर्गों को ढोल में बन्द करके साथ ले जाते थे ! पहले लोग कहा करते थे कि
एक चोर था ! बडा शातिर ! सभी जानते थे कि वह चोर है ! उस गांव के तथा आस-पास के गांवों में जितनी भी चोरियां होती थीं सबके लिए वही जिम्मेदार था ! परंतु वह इतनी सफाई से चोरी
कोई गारंटी नहीं सफलता किस्मत से मिलती है ! हार को आप रोक नहीं सकते ! आप पूरी मेहनत करते हैं, सचाई और इमानदारी से, पूरी लग्न से जान लडा कर, काम करते हैं, फिर भी आज की तरीख में
बात पुरानी है ! राजा-महाराजाओं का जमाना था ! एक बलोच (ऊंट पालने वाले को बलोच कहते हैं) की एक ऊंटनी गुम हो गई ! काफी खोज-बीन के बाद उस ऊंटनी का सुराग लगा ! ऊंटनी एक सेठ के घर
मई 1924 की बात है ! उस समय मेरे पिता जी साउथ इन्डिया कम्पनी में सर्वेयर के रुप में कार्यरत था ! यह कहानी उनकी जबानी ही सुनिए ! मैं रेलवे लाईन के साथ साथ सर्वे कर रहा था !
परमपिता को प्रणाम एक राजा था ! उसके राज्य में सब प्रकार से सुख शांति थी ! किसी प्रकार का कोई वैर-विरोध नहीं था ! जनता हर प्रकार से सुखी थी ! परंतु राजा को एक बहुत बडा दुख था कि