Articles By: R K KHURANA

एक और गणतंत्र दिवस

एक और गणतंत्र दिवस

0 2011/01/27 2:47 pm

एक और गणतंत्र दिवस मनाने का दिन आ गया ! वो गणतंत्र जो हमें देश के लाखों वीरों की कुर्बानी देकर आज़ादी हासिल होने के बाद मिला ! आज़ादी के बाद देश को सुचारु रुप से चलाने के लिए हमने

अमीर बनने के अचूक नुस्खे

अमीर बनने के अचूक नुस्खे

5 2011/01/19 10:41 am

सभी पूछते हैं आप का हाल कैसा है, यदि आपके पास पैसा है ! आज के आर्थिक युग में प्रत्येक व्यक्ति पैसे के पीछे भाग रहा है ! पैसे के बिंना इस संसार में कुछ भी नहीं है ! बाप

हुआ कुछ भी नहीं

हुआ कुछ भी नहीं

2 2011/01/10 9:39 pm

ट्रेन मानो पंख लगाकर उडी जा रही थी ! पेड, खम्भे, मकान, दुकान, पहाड सभी पीछे छूटे जा रहे थे ! जिस स्थान से रेलगाडी गुजरती थी वहां की धरती कुछ देर के लिए कांप सी जाती थी  रेल की

अभी तो मैं जवान हूं !

अभी तो मैं जवान हूं !

0 2010/12/23 11:25 am

पता नहीं आजकल के छोकरों को क्या हो गया है ?  बूढों को कुछ समझते ही नहीं !  एक जमाना था कि लोग बुजुर्गों को ढोल में बन्द करके साथ ले जाते थे !  पहले लोग कहा करते थे कि

प्रभु का सिमरण सबसे ऊंचा

प्रभु का सिमरण सबसे ऊंचा

6 2010/12/18 7:52 pm

एक चोर था ! बडा शातिर ! सभी जानते थे कि वह चोर है ! उस गांव के तथा आस-पास के गांवों में जितनी भी चोरियां होती थीं सबके लिए वही जिम्मेदार था ! परंतु वह इतनी सफाई से चोरी

कोई गारंटी नहीं

कोई गारंटी नहीं

2 2010/12/12 11:47 am

कोई गारंटी नहीं सफलता किस्मत से मिलती है ! हार को आप रोक नहीं सकते ! आप पूरी मेहनत करते हैं, सचाई और इमानदारी से, पूरी लग्न से जान लडा कर, काम करते हैं, फिर भी आज की तरीख में

मां का दिल

मां का दिल

6 2010/12/08 1:46 pm

बात पुरानी है !  राजा-महाराजाओं का जमाना था !  एक बलोच (ऊंट पालने वाले को बलोच कहते हैं) की एक ऊंटनी गुम हो गई !  काफी खोज-बीन के बाद उस ऊंटनी का सुराग लगा ! ऊंटनी एक सेठ के घर

जानवर भी सोचते हैं …

जानवर भी सोचते हैं …

4 2010/12/01 1:01 pm

मई 1924 की बात है ! उस समय मेरे पिता जी साउथ इन्डिया कम्पनी में सर्वेयर के रुप में कार्यरत था ! यह कहानी उनकी जबानी ही सुनिए ! मैं रेलवे लाईन के साथ साथ सर्वे कर रहा था !

परमपिता को प्रणाम

परमपिता को प्रणाम

0 2010/11/24 8:22 pm

परमपिता  को प्रणाम एक राजा था ! उसके राज्य में सब प्रकार से सुख शांति थी ! किसी प्रकार का कोई वैर-विरोध नहीं था ! जनता हर प्रकार से सुखी थी ! परंतु राजा को एक बहुत बडा दुख था कि

हिस्सेदार

हिस्सेदार

0 2010/11/18 6:17 pm

फर्स्ट एंड फाईनल बिल था ! पास होने के लिए एक्स ई एन साहब के पास पहुंचा ! साहब ने बिल का विषय पढ़ा – “शिवाजी पार्क की 500 मीटर लम्बी बाउंड्री वाल का बिल !” “शिवाजी… पार्क…. की… 500