प्रधानमंत्री जी क्या आम युवा बेकार हैं?
1मनमोहन जी ने बहुत दिनों के बाद देश के युवाओं से कुछ अपील की है. उन्होंने युवाओं को देश की राजनीति से जुड़ने को कहा है. बकौल मनमोहन जी युवा ही राजनीति की दशा और दिशा बदल सकते हैं .
मनमोहन जी ने बहुत दिनों के बाद देश के युवाओं से कुछ अपील की है. उन्होंने युवाओं को देश की राजनीति से जुड़ने को कहा है. बकौल मनमोहन जी युवा ही राजनीति की दशा और दिशा बदल सकते हैं .
कभी – कभी मैं सोचता हूँ कि आखिर हमारा समाज आज किस ओर जा रहा है. आजकल एक चीज़ का समाज के साथ बड़ा घनिष्ट सम्बन्ध हो चुका है और इसकी घनिष्टता बढ़ती ही जा रही है. मैं बात कर
भारत में चुनाव से बड़ा पर्व शायद ही कोई हो, और हर आम को इसका इन्तजार रहता है. और अभी तो देश के पांच राज्यों में चुनाव की घंटी बज गयी है तो लाजिमी है की मेले की तैयारी भी
बूढ़ी हड्डी में आई नई जवानी है अडवाणी ने फिर एक जिद ठानी है, निकल पड़ें हैं रथ लेकर जनता को जगाने भ्रष्टाचार, महंगाई को देश से भगाने घूम रहे हैं शहर-शहर कर रहे हैं लोगों की जय-जय कार प्रधानमंत्री बनने
आज बहुत दिनों बाद कुछ लिखने बैठा हूँ. बहुत दिनों से लेखनी खामोश थी कुछ कारण थे साथ ही कुछ मजबूरी भी थी. खैर जो भी हो अगर इन्सान की जिंदगी में मजबूरी न हो तो फिर जीवन ही क्या?
आज देश के सामने एक विकट समस्या आन खड़ी हुई है| दिन पर दिन नए-नए घोटालों की खबर उजागर हो रही है, कभी यह घोटाला तो कभी वह| कभी देश के राजा को कभी मंत्री| लेकिन इन सब का खामियाजा जिसे
बयान और भारतीय राजनीति दोनों का चोली-दामन का साथ है| समय-समय पर राजनेता बयान देते रहते हैं, कभी उनका बयान सुर्ख़ियों में आ जाता है तो कभी गुमनामी के अँधेरे में गायब हो जाता है| वैसे भी अगर राजनीतिज्ञ बयान
बहुत दिनों से सोच रहा था की बिहार चुनाव पर कुछ लिखूं| चलिए आज अपना इन्तजार ख़त्म करता हूँ और कुछ लिखता हूँ| इस बार चुनाव हर बार की तरह अलग है, हार दल परेशान है| चाहे वह सत्ता पक्ष
आखिर राहुल- महिमामंडन में कांग्रेस पार्टी इस प्रकार क्यूँ जुटी है ? क्या कांग्रेस को यह डर हो गया है कि राहुल कि लोकप्रियता में जबरदस्त कमी आयी है | मिशन 2014 कि तैयारी को लेकर कांग्रेस के लिए इसे एक गहरा झटका माना जा सकता है|
राहुल गाँधी आजकल युवाओं को राजनीती में आने की सलाह देते फिर रहे हैं| वैसे भी जब आदमी को बिना मेहनत का मुकाम हासिल हो जाते हैं तो उसके पास एक ही कम बचता है प्रवचन देना | खैर जो