काश कि होता सब वैसा !
0काश कि होता सब वैसा काश कि वो दिन कभी लौट कर आते बहाने से सही उनका साथ तो हम पा पाते उनको हमारा और हमें उनका ख्याल तो होता काश कि वो वक़्त रुक जाता वहीं उनकीं बातें लगी,
काश कि होता सब वैसा काश कि वो दिन कभी लौट कर आते बहाने से सही उनका साथ तो हम पा पाते उनको हमारा और हमें उनका ख्याल तो होता काश कि वो वक़्त रुक जाता वहीं उनकीं बातें लगी,
जुदाई में तेरी मत पूछ -“क्या हुआ मेरा हाल” जुदा होकर तुमसे कैसे कहूं -”क्या दिन थे वो” वो दिन, दिन नही, मेरे लिए तो रात थे, हर पल तुम्हे याद करती , वो पल भी क्या पल थे- “जब साथ हम हुआ करते थे”
शिक्षक तेरा धन्यवाद, दिया है तुमने हमे वरदान , हूँ जहाँ भी आज मै उसमे, तेरा बड़ा है योगदान, नही है शब्द करूं मै कैसे तेरा धन्यवाद, बस चाहिए तेरा आशीर्वाद, शिक्षक की महिमा होगी ना कभी कम, भले कर ले कितनी ही उन्नति हम, शिक्षक
वो कहते है वो कहते है कि “भूल जाऊ में उन्हें ”, पर कोई बताये तोह हमे कि भला ये कैसे मुमकिन है? जबकि बसा हो कोई हर सांस में तोह भला में सांस लेना छोड़ू तो कैसे उनसे दूर
चल रहे थे जब हम अनजान राहों पर, मिला था हमे कोई उन्ही राहों पर भटक रहे थे जब हम उन राहों पर मिला था वोह तभी हमे उन राहों पर खुश हुए थे हम बहुत यु उसे मिलकर , वोह