Articles By: जयदीप शेखर

अंग्रेजी पट्टे का निशान है क्रिकेट

अंग्रेजी पट्टे का निशान है क्रिकेट

0 2012/02/06 10:41 am

बँगला के क्रान्तिकारी कवि सुकान्तो भट्टाचार्य अपनी एक कविता में आशा व्यक्त करते हैं कि गुलामी का पट्टा खुलने के बाद हमारी गर्दन पर बब्बर शेर की तरह ‘अयाल’ उग आयें, जिसके नीचे पट्टे के निशान छुप जाये, ढक जाये।

नेताओं को चाहिए   ‘अशिक्षित’ मतदाता

नेताओं को चाहिए ‘अशिक्षित’ मतदाता

1 2012/02/05 12:53 pm

हमें पढ़ाया जाता था कि ‘साहित्य, समाज का दर्पण है।’ इसी तर्ज पर आज कहा जा सकता है कि ‘इण्टरनेट, शिक्षित समाज का दर्पण है।’ देश के शिक्षित समाज का बड़ा हिस्सा क्या सोचता है, समकालीन राजनीति के प्रति उसका

मनमोहन जी की अन्तरात्मा जागती क्यों नहीं?

मनमोहन जी की अन्तरात्मा जागती क्यों नहीं?

3 2012/02/04 1:31 pm

कुछ बातें कभी बोली नहीं जाती, लिखी नहीं जाती, मगर समझ ली जाती हैं। सोनिया जी ने कभी कहा तो नहीं (लिखना तो खैर, दूर की बात है), मगर लोगों ने यह समझ लिया था कि वे मनमोहन जी को

फिर भी यह सरकार शासन कर रही है !

फिर भी यह सरकार शासन कर रही है !

0 2012/02/03 1:44 pm

2G फैसले पर मेरी प्रतिक्रिया हालाँकि अखबार में जिक्र नहीं है, पर कल टी.वी. पर एक विचारक कल के फैसले से एक विन्दु को उद्धृत करते हुए बता रहे थे कि सर्वोच्च न्यायालय यह मानता है इस देश में पिछले 15-20

सेना प्रमुख बनाम सरकार, क्या होगा कोर्ट में ?

सेना प्रमुख बनाम सरकार, क्या होगा कोर्ट में ?

1 2012/01/31 9:22 pm

पता चला कि सरकार ने सेना की एडजुटैण्ट-जेनरल शाखा को सेनाध्यक्ष का जन्मवर्ष “1950″ करने को कहा है, ताकि सेनाध्यक्ष को इसी साल मई में अवकाश पर भेजा जा सके। यह भी पता चला कि आगामी 3 फरवरी को सर्वोच्च न्यायालय

“बनफूल” की कहानियाँ / 3. अपना-पराया

“बनफूल” की कहानियाँ / 3. अपना-पराया

0 2012/01/31 9:17 pm

अपना-पराया सारे सुबह की मेहनत के बाद दोपहर दक्षिण तरफ के बरामदे पर एक बिस्तर बिछाकर जरा लेटा था। नीन्द अभी आयी ही थी कि चेहरे पर थप्-से क्या एक चीज आकर गिरी। हड़बड़ाकर उठकर देखा, एक बेडौल कुत्सित घरेलू-मैने का

गणतंत्र के 2 सवाल ?

गणतंत्र के 2 सवाल ?

1 2012/01/24 6:06 pm

किसी भी और देशभक्त की तरह मैं भी गणतंत्र दिवस पूरी श्रद्धा के साथ मनाता हूँ- क्योंकि यह हमारा “राष्ट्रीय” त्यौहार है। पर जैसा कि गौतम बुद्ध या अन्यान्य मनीषियों ने कहा है, हमें शंका जाहिर करनी चाहिए, सवाल पूछने

परमाणु विद्युत संयंत्र बनाम छोटे विद्युत संयंत्र

परमाणु विद्युत संयंत्र बनाम छोटे विद्युत संयंत्र

1 2012/01/11 6:30 pm

जहाँ तक मेरी जानकारी है- परमाणु बिजली संयंत्रों में ‘परमाणु ऊर्जा’ को ‘विद्युत ऊर्जा’ में नहीं बदला जाता; बल्कि ‘परमाणु ऊर्जा’ का उपयोग पानी को उबालने में किया जाता है, ताकि इससे पैदा होने वाली भाप से ‘टर्बाईन’ को घुमाया

“बनफूल” की कहानियाँ / 2. पारूल प्रसंग

“बनफूल” की कहानियाँ / 2. पारूल प्रसंग

0 2012/01/07 10:35 am

पारूल प्रसंग ‘‘वह क्या तुम्हारी तरह कमा कर खाएगी?’’ ‘‘कमाकर न खाए- मतलब, मछली-दूध चोरी कर के खाना-’’ ‘‘अपने हिस्से की मछली-दूध मै उसे खिलाऊँगी।’’ ‘‘सो तो तुम खिलाती ही हो- इसके अलावे जो वह चोरी करती है। इस तरह रोज-रोज-’’

प्राचीन भारत का इतिहास: एक मन्थन

प्राचीन भारत का इतिहास: एक मन्थन

1 2011/12/31 2:28 pm

दो बहुत ही मामूली सवाल- 1. ग्रामीण सभ्यता विकसित होते हुए शहरी सभ्यता बनती है, या शहरी सभ्यता विकसित होते हुए ग्रामीण सभ्यता बनती है? 2. पहले भाषा बनती है फिर उसके लिए लिपि बनती है, या पहले लिपि का