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	<title>JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज &#187; जयराम &#8220;विप्लव&#8221;</title>
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	<description>Daily news analysis , Hindi samachar ,Hindi magazine,Hindi website,a6V3sbK3z0d4m7JTOT6OQOVo1jQ</description>
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		<title>काले धन पर बाबा रामदेव,सुब्रमण्यम स्वामी,गोविन्दाचार्य और गुरुमूर्ति एक साथ</title>
		<link>http://www.janokti.com/featured/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a7%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b5/</link>
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		<pubDate>Sat, 04 Feb 2012 15:15:39 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[एस. गुरुमूर्ति]]></category>
		<category><![CDATA[काले धन पर बाबा रामदेव]]></category>
		<category><![CDATA[गोविन्दाचार्य]]></category>
		<category><![CDATA[सुब्रमण्यम स्वामी]]></category>

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		<description><![CDATA[मावलंकर सभागार में आज बाबा रामदेव , सुब्रमण्यम स्वामी , गोविन्दाचार्य ,एस गुरुमूर्ति , अजीत डोभाल सहित कई बड़े दिग्गज &#8216;काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ &#8216; एक साथ नजर आये &#124; सभागार के बाहर -भीतर तक़रीबन ढाई हजार कार्यकर्ताओं ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Action-Committee-Against-Corruption-in-India.jpg"><img class="aligncenter size-large wp-image-26197" title="Action Committee Against Corruption in India" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Action-Committee-Against-Corruption-in-India-500x243.jpg" alt="काले धन पर बाबा रामदेव"width="550" height="343" /></a>मावलंकर सभागार में आज <strong>बाबा रामदेव , सुब्रमण्यम स्वामी , गोविन्दाचार्य ,एस गुरुमूर्ति , अजीत डोभाल</strong> सहित कई बड़े दिग्गज &#8216;<strong>काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ &#8216;</strong> एक साथ नजर आये |  सभागार के बाहर -भीतर तक़रीबन ढाई हजार कार्यकर्ताओं की संख्या मौजूद थी |</p>
<p style="text-align: justify;">गौरतलब है कि<strong> 2G </strong>मामले में आज ही निचली अदालत ने <strong>सुब्रमण्यम स्वामी </strong>की याचिका को ख़ारिज कर दिया था | कोर्ट के उस फैसले से ही अपनी बात शरू करते हुए <strong>सुब्रमण्यम स्वामी</strong> ने कहा कि <strong>122 कंपनियों को आवंटित लाइसेंस रद्द </strong>करने का मामला भी हाईकोर्ट ने ठुकरा दिया था लेकिन जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो माननीय न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला दिया और न्याय की जीत हुई |</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्वामी</strong> ने भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही लड़ाई को <strong>धर्म युद्ध </strong>बताते हुए कहा कि हमें ऐसा समाज बनाना है <strong>जहाँ  राजा गलती करें </strong>तो जनता उसके कान पकड़ कर गद्दी से उतार सके |</p>
<p style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/baba-ramdev-and-subramanyam-swamy.jpg"><img class="alignleft size-medium wp-image-26210" title="baba ramdev and subramanyam swamy" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/baba-ramdev-and-subramanyam-swamy-300x165.jpg" alt="काले धन पर बाबा रामदेव"width="300" height="165" /></a>सभा को संबोधित करते हुए <strong>बाबा रामदेव </strong>ने कि आज यहाँ उपस्थित नागरिकों को हमने आमंत्रण भेजकर या व्यक्तिगत सूचना देकर नहीं बुलाया है बल्कि स्वर्णिम व सशक्त भारत के निर्माण में स्वतःस्फूर्त यहाँ पहुंचे हैं | इस पूरी जंग में सरकार की नियत और उसकी नीतियों के ऊपर देश के सर्वोच्च न्यायालय ने जो टिप्पणियाँ की है वो इस बात का प्रमाण है कि <strong>1 लाख  76  हजार करोड का घोटाला हुआ था</strong> | अदालत ने 122  कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने का आदेश देकर यह बता दिया है कि यह सरकार <strong>सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार </strong>खो चुकी है |</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बाबा ने कहा </strong>कि सरकार में बैठे लोग कहते हैं स्पेक्ट्रम बाँटने की कानून कायदे पिछली सरकार ने बनाये थे | अगर पिछली सरकार ने कुछ गलत नियम बनाये थे तो आपने उसे बदला क्यों नहीं ?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong> </strong></p>
<p><strong> </strong></p>
<p><strong> </strong></p>
<p><strong> </strong></p>
<p><strong> </strong></p>
<p><strong> </strong></p>
<p><strong> </strong></p>
<p><strong> </strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बाबा रामदेव</strong> ने <strong>कांग्रेस  और सरकार </strong>दोनों पर हल्ला बोलते हुए कहा कि जब सारी सरकार ही कटघड़े में खड़ी हो तब एक -दो मंत्रियों की बात नहीं यहाँ तो पूरा रास्ता ही साफ़ होना चाहिए |  लोकतंत्र और लोकतान्त्रिक संस्थाओं को एक राजनीतिक पार्टी ने बंदी बना कर रख दिया है | लाखों बलिदान के बाद मिली आज़ादी को बर्बादी बना कर रख दिया है | इस <strong>लोकतंत्र की हत्या </strong>करने वाले और जनता का पैसा लूटने वाली सरकार को हम बर्दाश्त करने वाले नहीं है |</p>
<p style="text-align: justify;">कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने सम्बंधित अदालती फैसले पर टिप्पणी करते हुए बाबा ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के उन न्यायाधीशों का पूरे राष्ट्र की और से कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं कि उन्होंने यह साहसपूर्ण निर्णय लिया |</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<div id="attachment_26209" class="wp-caption aligncenter" style="width: 560px"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Action-Committee-Against-Corruption-by-baba-ramdev1.jpg"><img class="size-large wp-image-26209" title="Action Committee Against Corruption by baba ramdev" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Action-Committee-Against-Corruption-by-baba-ramdev1-500x266.jpg" alt="काले धन पर बाबा रामदेव"width="550" height="266" /></a><p class="wp-caption-text">एक्शन कमिटी के सदस्य </p></div>
<p style="text-align: justify;">कार्यक्रम के दौरान मंच पर <strong>सुब्रमण्यम स्वामी </strong>के साथ <strong>गोविन्दाचार्य</strong> भी मौजूद थे और बाद में दर्शकों के बहुत आग्रह करने पर दो मिनट का वक्तव्य गोविन्दाचार्य ने भी रखा | कार्यक्रम के दौरान काले धन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक कमिटी &#8221; <strong>ACACI ( Action commitee against corruption in India </strong>&#8221;  की घोषणा भी की गयी जिसके अध्यक्ष <strong>सुब्रमण्यम स्वामी</strong> और सदस्यों में <strong>के .एन .गोविन्दाचार्य , एस.गुरुमूर्ति , अजीत डोभाल ,ए .सूर्यप्रकाश ,वी.सुन्दरम ,सरयू राय , जे.गोपीकृष्ण</strong> आदि कई प्रमुख व्यक्तियों को शामिल किया गया है |</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
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		<title>क्यूँ फ्लॉप हो रही है टीम अन्ना : एक विश्लेषण</title>
		<link>http://www.janokti.com/editorial-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%95-%e0%a4%89%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9a/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%aa-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%85/</link>
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		<pubDate>Fri, 27 Jan 2012 09:10:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादक उवाच]]></category>

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		<description><![CDATA[टीम अन्ना के गैरजरुरी बयानों और कार्यशैली ने जनता को निराश किया है &#124; पिछले साल भ्रष्टाचारियों की लंका में अंगद की तरह लोकपाल आंदोलन का पैर जमाने वाली टीम अन्ना साल खत्म होते–होते अचानक हवा में क्यों उड़ गयी ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h3 style="text-align: justify;"><span style="text-decoration: underline; color: #000080;"> टीम अन्ना के गैरजरुरी बयानों और कार्यशैली ने जनता को निराश किया है |</span></h3>
<h3 style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/01/IN09_ANNA_888279f.jpg"><img class="aligncenter size-large wp-image-25885" title="IN09_ANNA_888279f" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/01/IN09_ANNA_888279f-500x348.jpg" alt="" width="500" height="248" /></a>पिछले साल भ्रष्टाचारियों की लंका में अंगद की तरह लोकपाल आंदोलन का पैर जमाने वाली टीम अन्ना साल खत्म होते–होते अचानक हवा में क्यों उड़ गयी ? आखिर ऐसा क्या हुआ क्यूँ टीम अन्ना की &#8216; <span style="color: #000080;">मॉस अपील</span> &#8216; ख़ारिज होने के करीब पहुँच गयी है ? ऐसे अनेकों सवाल अन्ना से आस लगाने वालों के मन में  उठ रहा है |</h3>
<h3 style="text-align: justify;">अनुमान और संभावनाओं पर आधारित हजारों जबाव हो सकते हैं लेकिन तर्क की कसौटी पर कसा जाने लायक उत्तर तो टीम अन्ना के बयानों और उनकी कार्यशैली को आधार बना कर ही ढूंढा जा सकता है |</h3>
<h3 style="text-align: justify;">कभी अन्ना शराबियों को सुधारने के लिए कोड़े मारने की बात करते हैं तो कभी भ्रष्टाचारियों को थप्पड़ लगाने की जरूरत बताते हैं | ध्यान रहे , ये वही अन्ना हजारे हैं जिनको साल २०११ के अप्रैल से अगस्त की छोटी सी अवधि में मीडिया और कुछ बुद्धिजीवियों द्वारा भारत का नया गाँधी बताया जा रहा था | अन्ना की लोकप्रियता के पीछे गांधी जी से मिलती जुलती कद काठी , छवि और मीडिया का तथाकथित भ्रामक प्रचार एक बड़ा कारण था | लेकिन गाँधी के सिद्धांतों का अन्ना की कथनी और करनी से मेल नहीं खाना , धीरे &#8211; धीरे भारतीय जनमानस से अन्ना को दूर कर रहा है साथ ही साथ टीम अन्ना के सदस्यों का फूहड़ , आत्माभिमानी , गैरलोकतांत्रिक और कई दफे राष्ट्रीय हित के विरुद्ध दिए गए बयानों ने पूरी टीम की साख को अल्प समय में धूमिल किया है | फिर चाहे वो कुमार विश्वास द्वारा बाबा रामदेव और भगवान  शिव के विषय में किया गया परिहास हो या फिर प्रशांत भूषण द्वारा कश्मीर संबंधी बयान |</h3>
<h3 style="text-align: justify;">टीम अन्ना की विश्वसनीयता को सबसे बड़ा नुकसान तब हुआ जब चुनावी राज्यों में प्रचार के पूर्व घोषित एजेंडे से पलटते हुए टीम अन्ना ने कांग्रेस के खिलाफ प्रचार नहीं करने का निर्णय लिया , अब तो कई आलोचक खुलकर कहने लगे हैं कि &#8221; टीम अन्ना काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ बढते जनाक्रोश का  हवा निकालने की  कांग्रेसी रणनीति का ही एक हिस्सा है |&#8221; आलोचकों की माने तो &#8220;केंद्र में बैठे मनमोहन सिंह सरकार और आंदोलन दोनों चला रहे हैं |&#8221;</h3>
<h3 style="text-align: justify;">अन्ना के ऊपर काफी पहले से उत्तर भारतीयों के खिलाफ जहर उगलने वाले राज ठाकरे को शह देने का आरोप लगता रहा है , अब जब कि अन्ना उनकी टीम देश की हर छोटी &#8211; बड़ी घटना और नेताओं के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देने से नहीं चुकती तो फिर राज ठाकरे के देशद्रोही और विभाजनकारी वक्तव्यों पर खामोश क्यों है ? २६ जनवरी को टीम अन्ना द्वारा आयोजित सेमिनार ‘गणतंत्र का पुनर्गठन’ में लीलाधर भट नामक एक व्यक्ति ने अन्ना को संबोधित करते हुए पूछा कि मुम्बई में उत्तर भारतीयों को आतंकवादी बताने वाले राज ठाकरे के खिलाफ उन्होंने कोई बयान क्यों नहीं दिया  |  इस सवाल का जवाब देने के बजाय टीम अन्ना के एक सदस्य गोपाल राय ने उल्टा उस व्यक्ति को ही विभाजनकारी करार दे दिया |</h3>
<h3 style="text-align: justify;">कुल मिलाकर टीम अन्ना ना केवल असली मुद्दे से खुद भटक चुकी है बल्कि देश की जनता को भी निराशा और अंधेरगर्दी में डाल रही है | आज कल अन्ना की टीम जितना समय न्यूज चैनलों के स्टूडियो में बिता रही है उतना समय अगर आम आदमी के सवालों , आगामी रणनीति तैयार करने और टीम के प्रबंधन में लगाये तो शायद उनके लिए और इस आंदोलन के हित में होगा |</h3>
]]></content:encoded>
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		<title>सरकारी &#8216;आकाश&#8217; और &#8216;आधार&#8217; दोनों हुए फेल</title>
		<link>http://www.janokti.com/government-failure-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%8b/</link>
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		<pubDate>Fri, 20 Jan 2012 03:26:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
				<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>

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		<description><![CDATA[कुछ महीने पहले कपिल सिब्बल ने बड़े जोर शोर से आकाश टैबलेट लाँच किया था &#124;कपिल सिब्बल के द्वारा खूब बड़ी बड़ी बाते की गयी. कांग्रेस के दूसरे नेता भी जिनको शायद ये भी पता ना हों कि टेबलेट पीसी ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h3 style="text-align: justify;">
<div id="attachment_25711" class="wp-caption alignright" style="width: 330px"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/01/aakash-tablet_AKASH-TAB.jpg"><img class="size-full wp-image-25711" title="aakash tablet_AKASH TAB" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/01/aakash-tablet_AKASH-TAB.jpg" alt="" width="320" height="170" /></a><p class="wp-caption-text">आकाश टैब जारी करते हुए सिब्बल </p></div>
<p>कुछ महीने पहले कपिल सिब्बल ने बड़े जोर शोर से आकाश टैबलेट लाँच किया था |कपिल सिब्बल के द्वारा खूब बड़ी बड़ी बाते की गयी. कांग्रेस के दूसरे नेता भी जिनको शायद ये भी पता ना हों कि टेबलेट पीसी क्या होता है वो भी बोलने लगे कि ये &#8220;टेबलेट&#8221; युवाओ को कई बीमारीयों से बचायेगा |</h3>
<h3 style="text-align: justify;">मुझे याद है जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधनमंत्री थे तब उन्होंने मंत्रियो को मुफ्त मे लैपटॉप देने का एलान किया था | इसको जब विपक्ष फिजूलखर्ची बताने लगा तब कांग्रेसी नेता राम नरेश यादव ने कहा विपक्ष बेकार मे इस योजना का विरोध कर रहा है|इससे देश मे बड़ी बड़ी लैब लगेंगी और हजारों लोगो को रोजगार मिलेगा |फिर जब उनके पास खड़े एक आदमी ने उनके कान मे कहा कि लैपटॉप एक कंप्यूटर होता है .लैब नहीं ..तब उनका चेहरा देखने जैसा हों गया !</h3>
<h3 style="text-align: justify;">यह आकाश पहले से ही घटिया था, एक 366 MHz के प्रोसेसर और256MB रैम के कम्प्यूटर को ऐसे प्रचारित किया गया मानो एक बहुत बडा तीर चला दिया हो | यदि आप अपने पुराने कम्प्यूटर जो कि 1GHz के प्रोसेसर और 512 MB रैम का हो वो भी पूरा सीपीयू 1500 से 2000 का मिल जायेगा| इनपुट आउटपुट युनिट का जो फर्क है, (टच स्क्रीन) और साइज, उसका अनुभव अपने आप ही बेकार हो जायेगा जब आप प्रोसेसर की स्पीड को देखेंगे| लेकिन इसका प्रचार ठीक वैसे ही किया गया जैसे कि कांग्रेस एक परिवार के बलिदानो का करती है| सत्य कुछ और प्रचार कुछ!</h3>
<h3 style="text-align: justify;">फिर अभी दो दिन पहले मीडिया में ख़बरें आयी कि सरकार ने करीब एक करोड आकाश टेबलेट का डिलीवरी लेने से मना कर दिया जबकि उसका भुगतान पहले ही किया जा चुका है ,लेकिन सरकार और आकाश बनाने वाली कम्पनी दोनों कह रहे है कि दो करोड टैबलेट बन चुके है | अब इतनी जल्दी इनती ज्यादा संख्या मे पीसी बन कर कैसे तैयार हों सकते है ?</h3>
<h3 style="text-align: justify;">फिर जब सरकार और कम्पनी के बीच का एग्रीमेंट सामने आया तो उसमें कहीं नहीं  लिखा था कि सरकार को कम्पनी पैसा रिफंड करेगी |मतलब साफ़ है कि एक और घोटले का सामना करने के लिए जनता तैयार रहे |</h3>
<h3 style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/01/aadhar-card-_uid-card.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-25712" title="aadhar card _uid card" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/01/aadhar-card-_uid-card-185x130.jpg" alt="" width="185" height="130" /></a>बिना जांच पड़ताल के केन्द्र सरकार की योजनाओं में रेवडियाँ किस तरह बांटी जा रही है ,&#8221;आकाश &#8221; इसका अकेला उदाहरण नहीं है ! हाल ही में &#8221; यूआईडी &#8220;(आधार कार्ड ) परियोजना का हश्र भी हम सबके सामने आ चुका है | किस तरह संसद की स्थाई समिति की सिफारिशें आने के पहले ही सरकार इस परियोजना पर 556 करोड़ रूपया खर्च कर 57 लाख से अधिक यूआईडी कार्ड जारी कर चुकी थी | और स्थाई समिति की रिपोर्ट ने इस योजना को निराधार बताते हुए रद्द करने की सिफारिश कर दी | &#8221; आकाश टैब &#8221; की कहानी भी वही है |</h3>
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		<title>टीम अन्ना का संगठन शास्त्र  (व्यंग्य)</title>
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		<pubDate>Thu, 19 Jan 2012 06:34:09 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्यंग]]></category>

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		<description><![CDATA[अन्ना इन दिनों बीमार हैं। यद्यपि उनका उत्साह कम नहीं हुआ; पर क्या करें, शरीर साथ नहीं दे रहा। उनके साथियों को भी समझ नहीं आ रहा कि इस सरदी के मौसम में अब आगे क्या रास्ता पकड़ें कि आंदोलन ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/01/08th_cartoon_colour_524025f.jpg"><img class="alignright size-thumbnail wp-image-25704" title="08th_cartoon_colour_524025f" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/01/08th_cartoon_colour_524025f-185x130.jpg" alt="" width="185" height="130" /></a>अन्ना इन दिनों बीमार हैं। यद्यपि उनका उत्साह कम नहीं हुआ; पर क्या करें, शरीर साथ नहीं दे रहा। उनके साथियों को भी समझ नहीं आ रहा कि इस सरदी के मौसम में अब आगे क्या रास्ता पकड़ें कि आंदोलन में फिर से गरमी आ सके।</p>
<p style="text-align: justify;">अन्ना अपने गांव रालेगढ़ सिद्धि के शांत वातावरण में रहने के आदी हैं, तो उनके साथी दिल्ली की चकाचैंध में। अन्ना को मोबाइल, इंटरनेट, फेसबुक और ट्विटर की बात समझ नहीं आती, तो उनके साथी इसके बिना एक दिन भी नहीं रह सकते। फिर भी भ्रष्टाचार विरोध और जन लोकपाल की गोंद ने उन्हें जोड़ रखा था। यह देखकर कांग्रेस ने सरकारी लोकपाल को बाजार में उतार दिया। यह गोंद उतनी अच्छी तो नहीं थी; पर ग्राहक तो भ्रमित हो ही गये।</p>
<p style="text-align: justify;">अन्ना की अनुपस्थिति में दिल्ली के एक वातानुकूलित भवन में उनके नये-पुराने सब साथी सिर जोड़कर बैठे। समस्या गहरी थी और ठंड भयंकर; इसलिए चाय-काॅफी और स्नैक्स के कई दौर चले। शर्मा जी की अध्यक्षता में कई घंटे के विचार-विमर्श के बाद निष्कर्ष यह निकला कि अन्ना और मौसम, दोनों के ठीक होने की प्रतीक्षा की जाए। उसके बाद ही आंदोलन के नये दौर के बारे में सोचेंगे।</p>
<p style="text-align: justify;">- पर तब तक लोग क्या करेंगे ?</p>
<p style="text-align: justify;">- लोगों को अपने घर के काम नहीं हैं क्या ? पांच राज्यों में चुनाव हैं। छात्रों को परीक्षाएं देनी हैं। फिर कुछ दिन बाद शादी-ब्याह का सीजन आ जाएगा। सब उसमें व्यस्त हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align: justify;">- पर तब तक लोगों को कुछ संदेश तो देना ही होगा। वरना लोग कहेंगे कि अन्ना के बिना टीम ठंडी पड़ गयी।</p>
<p style="text-align: justify;">- सच तो यही है। उनके बिना तो हम बिन दूल्हे की बारात की तरह हैं; पर फिर भी कुछ तो करना ही होगा। करें भले ही नहीं; पर कुछ कहना तो होगा ही। ये तो अच्छा है कि मीडिया वाले इस समय चुनाव में व्यस्त हैं, वरना वे हमारी बखिया उधेड़ देते।</p>
<p style="text-align: justify;">- तो मीडिया को क्या कहें, वे बाहर हमारी प्रतीक्षा कर रहे हैं ?</p>
<p style="text-align: justify;">- उन्हें कहो कि अब हम देश के हर गांव और शहर के हर वार्ड में संगठन खड़ा करेंगे। अगला आंदोलन संगठन के बल पर होगा, मीडिया, मोबाइल या इंटरनेट के बल पर नहीं।</p>
<p style="text-align: justify;">- पर संगठन तो हमने आज तक किया नहीं। इसके विशेषज्ञ तो संघ वाले हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">- तो हम संघ की तरह का ही संगठन बनायेंगे।</p>
<p style="text-align: justify;">- इसके लिए हमें संघ का कोई आदमी अपने साथ जोड़ना होेगा। इससे तो दिग्विजय सिंह का आरोप सिद्ध हो जाएगा।</p>
<p style="text-align: justify;">- फिर.. ?</p>
<p style="text-align: justify;">- यदि हम सब कुछ दिन संघ की शाखा में जाएं, तो हो सकता है हमें उनके काम की विधि समझ में आ जाए।</p>
<p style="text-align: justify;">- पर उनकी शाखा तो सुबह खुले मैदानों में लगती हैं। क्या हम इतनी जल्दी उठ सकेंगे ?</p>
<p style="text-align: justify;">- मेरे बस की बात तो नहीं है। मैं तो सुबह सात बजे से पहले बिस्तर नहीं छोड़ता। उठते ही मुझे दो कप चाय और तीन अखबार चाहिए। इसके बिना मेरा पेट जाम हो जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">- वहां लोग खाकी निकर पहन कर आते हैं और व्यायाम के बाद जमीन पर ही बैठकर कुछ बातचीत करते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">- अच्छा ..? हमें तो कुर्सी पर बैठने की आदत है। नीचे बैठे तो कई साल हो गये।</p>
<p style="text-align: justify;">- तो क्या करें&#8230;?</p>
<p style="text-align: justify;">- क्यों न वर्मा जी को यह काम दे दें। वे नौकरी से अवकाश प्राप्त हैं और उन्हें सुबह टहलने की आदत भी है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस बात पर सब सहमत हो गये। वर्मा जी को भी कोई आपत्ति नहीं थी। बैठक के एजेंडे में कई विषय और भी थे; पर सबकी अपनी व्यस्तताएं थीं। एक को कवि सम्मेलन में जाना था, तो दूसरे को एक सम्मान कार्यक्रम में। तीसरे ने बच्चों के साथ फिल्म का कार्यक्रम बना रखा था, तो चैथे को एक दुकान का उद्घाटन करना था। अतः अगली तारीख तय कर सभा विसर्जित कर दी गयी।</p>
<p style="text-align: justify;">अगली बार वे मिले, तो ध्यान में आया कि वर्मा जी नहीं आये हैं। उन्हें ही तो संघ वालों से संगठन की तकनीक सीखनी थी। सब सोच रहे थे कि वे कुछ नयी बात बताएंगे; पर वे तो&#8230;।</p>
<p style="text-align: justify;">फोन मिलाया, तो पता लगा कि वे संघ की साप्ताहिक बैठक में गये हैं। दूसरी मीटिंग में भी वे नहीं आये। उन दिनों वे शीत-शिविर में व्यस्त थे। तीसरी बार सहभोज, चैथी बार वन-विहार, पांचवी बैठक के समय सेवा बस्ती में कंबल वितरण, तो छठी बार वे पड़ोस के गांव में शाखा विस्तार के लिए गये हुए थे।</p>
<p style="text-align: justify;">अन्ना के साथी परेशान हो गये। वर्मा जी सेवाभावी व्यक्ति थे। श्रद्धा से वे अन्ना हजारे और इस आंदोलन के साथ जुड़े थे। उन्हें जो काम दिया जाता, उसे वे पूरी निष्ठा और समर्पण भाव से करते थे; पर अब तो वे संघ वाले ही होकर रह गये।</p>
<p style="text-align: justify;">कई दिन बाद शर्मा जी को रेलवे स्टेशन पर वर्मा जी मिल गये। हाथ में लाठी, सिर पर काली टोपी। चेहरे पर खिली चमक से वे अपनी उम्र से दस साल कम के लग रहे थे। साथ में उनका बिस्तर और एक बक्से में कुछ सामान भी था।</p>
<p style="text-align: justify;">- वर्मा जी, आप बहुत दिन से बैठक में नहीं आये।</p>
<p style="text-align: justify;">- जी, मैं आजकल संघ की बैठकों में व्यस्त रहता हूं।</p>
<p style="text-align: justify;">- पर आपको तो संघ वालों से संगठन की तकनीक सीखने के लिए भेजा था।</p>
<p style="text-align: justify;">- वही सीखने के लिए बीस दिन के संघ शिक्षा वर्ग में जा रहा हूं।</p>
<p style="text-align: justify;">- तो आपने आज तक क्या सीखा ?</p>
<p style="text-align: justify;">- सीखा तो कुछ अधिक नहीं; पर इतना जरूर समझ गया हूं कि संगठन का कोई शाॅर्टकट नहीं होता। मोबाइल, इंटरनेट या मीडिया के बल पर चलने वाले आंदोलन से कुछ दिन शोर भले ही हो जाए; पर देश की व्यवस्था नहीं बदल सकती। इसके लिए तो युवा पीढ़ी में देशभक्ति, अनुशासन, चरित्र और टीम भावना चाहिए। वह संघ की शाखा से ही मिलती है। यहां जाति, प्रांत, भाषा और काम के आधार पर ऊंच-नीच नहीं मानी जाती। मेरी मानो, तो आप भी अपने साथियों के साथ संघ की शाखा में आयें। यहां आपको अच्छे लोग मिलेंगे, जिनके बल पर फिर आंदोलन भी ठीक से चल सकेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">शर्मा जी ने अपना माथा पकड़ लिया।</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
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		<title>ऐसे थे लोकबन्धु राजनारायण</title>
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		<pubDate>Mon, 09 Jan 2012 10:27:34 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
				<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[Lokbandhu Rajnarayan]]></category>
		<category><![CDATA[Lokbandhu Rajnarayan Smriti Samaroh]]></category>
		<category><![CDATA[ऐसे थे लोकबन्धु राजनारायण]]></category>

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		<description><![CDATA[Lokbandhu Rajnarayan Smriti Samaroh / New delhi वर्षों बाद दिल्ली ने याद किया राजनारायण को &#124; 8 जनवरी को दिल्ली के constitution club में सालों बाद बिखरे हुए समाजवादियों समेत विभिन्न विचारधारा के राजनितिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं के द्वारा लोकबन्धु राजनारायण की ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="text-decoration: underline; color: #993300;"><strong>Lokbandhu Rajnarayan Smriti Samaroh / New delhi </strong></span></p>
<p style="text-align: justify;">
<div id="attachment_25446" class="wp-caption alignright" style="width: 230px"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/01/220px-Lok-bandhu_raj_narain.jpg"><img class="size-full wp-image-25446" title="220px-Lok-bandhu_raj_narain" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/01/220px-Lok-bandhu_raj_narain.jpg" alt="ऐसे थे लोकबन्धु राजनारायण"width="220" height="307" /></a><p class="wp-caption-text">Lokbandhu Rajnarain/Rajnarayan </p></div>
<p>वर्षों बाद दिल्ली ने याद किया <strong>राजनारायण</strong> को | 8 जनवरी को दिल्ली के constitution club में सालों बाद बिखरे हुए समाजवादियों समेत विभिन्न विचारधारा के राजनितिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं के द्वारा <strong>लोकबन्धु राजनारायण </strong>की स्मृति में कोई सभा /संगोष्ठी का आयोजन किया गया | संयोगवश इसी तिथि को प्रखर नेता <strong>मधु लिमये </strong>की पुण्यतिथि भी थी | स्मृति सभा की दो बातें विशेष उल्लेखनीय थी , <strong>मंच पर किसी नेता का ना होना और सभागार में तीन पीढ़ियों की एक साथ उपस्थिति </strong>| इतिहास में राजनारायण का उल्लेख प्रमुखता से नहीं हुआ है जितना होना चाहिए | ऐसे में नई पीढ़ी के लिए यह एक अवसर था जिसके माध्यम से हमें राजनारायण जैसे व्यक्तित्व का परिचय उनके साथियों की स्मृति को सुनकर मिला | स्मृति सभा में उद्धृत लोकबन्धु से जुडी प्रमुख बातों का उल्लेख नीचे कर रहा हूँ |</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत </strong>लोकतंत्र के इतिहास में लोकबन्धु राजनारायण एक मात्र ऐसे नेता हैं जिन्होंने प्रधानमन्त्री की कुर्सी पर बैठी नेता को हराया और संसद का रास्ता तय किया | संसदीय राजनीति में राजनारायण की जीवटता का दूजा उदाहरण अब तक सामने नहीं आ पाया है | शून्यता से सत्ता और फिर शून्यता लेकिन संघर्ष से पीछे नहीं हटने की जिद को राजनारायण ने अपनी मृत्यु के तीन दिन पहले तक निभाया |</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लोकबन्धु</strong> के सानिध्य में अपना बचपन गुजारने वाले वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली पुरानी यादों को कुरेदते हुए बताते हैं कि नेताजी मरने से ठीक चार दिन पहले अस्पताल में भर्ती थे | मै उनसे मिलने गया था | मुझ पर नजर पड़ते ही बोले ; आजकल कुछ लिखते नहीं हो हमारे बारे में ,आंदोलन के बारे में ! एक साक्षात्कार करो | मैंने कहा ; आप पहले ठीक हो जाइए |</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>60 </strong>के दशक से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में निरंतर जाने वाले भाजपा सांसद हुकुमदेव नारायण यादव भी राजनारायण के विचारों को पसंद करते हैं | कॉलेज के दिनों में राजनारायण से जुड़े हुकुमदेव नारायण कहते हैं कि उन दिनों नेता जी युवाओं के प्रेरणा केंद्र थे |</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>राजनारायण</strong> जी के सहयोगी रमाशंकर सिंह बताते हैं कि उनके साथ रहते –रहते ना तो कोई प्रधानमंत्री दिखता था ना ही पुलिस की लाठी से डर लगता था | एक दफा नेताजी दिल्ली में अपनी गाड़ी से जा रहे थे तभी अचानक ट्रेफिक रोक दिया गया क्योंकि उस रास्ते से प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी गुजरने वाली थी | राजनारायण जी गाड़ी से उतर गए और ट्रेफिक वालों से भीड़ गए | कहा –सुनी होने पर भी जब उनकी गाड़ी को नहीं जाने दिया तो खुद सड़क पर ही धरने के लिए बैठ गए | अंत में इंदिरा जी खुद अपनि गाड़ी से उतर कर आई और उनको पहले जाने दिया |</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नेताजी </strong>की  ईमानदारी और पारदर्शिता तो राजनैतिक चंदों के लेन-देन तक में दिखती थी | मुझे याद है १९७१ में बंगलादेश के समर्थन में जुलुस निकलने की तैयारी चल रही थी | बंगलादेश के झंडे बनवाने के लिए ९०० रुपयों की जरुरत थी | विचार चल रहा था पैसे कहाँ से आयेंगे ? इतने में संयोगवश  एक पूंजीपति पहुंचा | और नेताजी ने सबके सामने उससे ९०० रूपये लिए |</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>राजनारायण</strong> जी के अनेक संस्मरण है &#8230;  राजनारायण जी के कमरे में पूंजीवाद के खिलाफ एक नारा लिखा था और उसके लेखक प्रूधो थे , एक बार एक पूंजीपति उनसे मिलने आया तो बाहर उनका सचिव कह रहा था कि अंदर प्रूधो की हत्या हो रही है और ऐसा साहस तो राजनारायण जी का सचिव ही कर सकता है |</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इसी</strong> तरह एक बार पूर्व योजना के आधार पर वो सभा करने मुरादावाद जा पहुंचे | परन्तु वहां सभा का आयोजक मौजूद था ही नहीं और पता चला कि यहाँ किसी भी तरह का सभा नहीं होने वाला है | पर राजनारायण तो  राजनारायण थे ! उन्होंने चौक पर बमुश्किल दर्जन भर लोगों के बीच छोटे-मोटे इंतजाम में ही भाषण देना शुरू करते हुए कहा कि “ मुझे मालूम है प्यारे भाईयों आप घर बैठे मेरी बात ध्यान से सुन रहे होंगे |”  <strong>ऐसे &#8216;मर्दे मुजाहिद&#8217; थे राजनारायण </strong>,<strong> उनके लिए भीड़ का होना या ना होना कोई मायने नहीं रखता था |</strong></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
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		<title>नई पीढ़ी को बहकाने में जुटा बाजार</title>
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		<pubDate>Mon, 12 Dec 2011 19:41:44 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
				<category><![CDATA[युवा]]></category>
		<category><![CDATA[समाज]]></category>
		<category><![CDATA[नई पीढ़ी को बहकाने में जुटा बाजार]]></category>
		<category><![CDATA[भूमंडलीकरण और आधुनिकता]]></category>

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		<description><![CDATA[बढते भूमंडलीकरण और आधुनिकता का प्रभाव आज देश के छोटे शहरों में पल रहे युवक-युवतियों के बीच सर चढ कर बोल रहा है &#124; बिहार की राजधानी पटना में भी कुछ सालों में पार्लरों ,रेस्तुरेंतों और सायबर कैफे आदि अवैध ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h3 style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/12/180159_142347549159389_137185966342214_259480_610497_n.jpg"><img class="aligncenter size-large wp-image-25133" title="180159_142347549159389_137185966342214_259480_610497_n" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/12/180159_142347549159389_137185966342214_259480_610497_n-500x413.jpg" alt="नई पीढ़ी को बहकाने में जुटा बाजार"width="500" height="413" /></a>बढते भूमंडलीकरण और आधुनिकता का प्रभाव आज देश के छोटे शहरों में पल रहे युवक-युवतियों के बीच सर चढ कर बोल रहा है | बिहार की राजधानी पटना में भी कुछ सालों में पार्लरों ,रेस्तुरेंतों और सायबर कैफे आदि अवैध धंधों के ठिकाने कुकुरमुत्ते की भांति बढ़ गए हैं | आधुनिकता के इन नए ठिकानों में सेक्स रेकेट से लेकर नासमझ किशोरों को बिगाड़ने के हर साधन मुहैया कराए जाते हैं | अधिक से अधिक मुनाफा कमाने की अंधी दौड में नई पीढ़ी की बर्बादी का रास्ता पार्लरों ,रेस्टूरेंटों और कैफे जैसे जगहों से होकर गुजरता है | दरअसल , इन छोटे शहरों में किशोरों को प्राइवेसी की तलाश ऐसे जगहों पर ले आती है |</h3>
<h3 style="text-align: justify;">पटना प्रवास के दौरान हमने देखा कि यहाँ के अधिकांश रेस्टुरेंट ऊपर के फ्लोर पर प्राइवेट केबिन बनाकर रखते हैं जहाँ बैठने के लिए प्रति घंटे 300-500 रूपये तक किराया वसूला जाता है | खाने –पिने की जगहों पर ऐसी व्यवस्था का राज आप समझ गए होंगे !  जरा सोचिये , इस आधुनिक चलन का हमारे युवा वर्ग और समाज पर क्या असर पड़ता है ?</h3>
<h3 style="text-align: justify;">नैतिकता के साथ-साथ यह आर्थिक मसला भी है | छोटे शहरों में जहाँ आमदनी कम हो वहां प्रति घंटे 300-500 रूपये देकर प्राइवेसी का आनंद युवाओं को किस ओर ले जा रहा है ? संभव है कि ऐसे ही युवाओं में से कुछ जिनकी आर्थिक हालत ऐसे खर्चों को वहन करने की नहीं है , वो अपने शौक पूरे करने के लिए आपराधिक कामों की ओर प्रवृत हो सकते हैं | आम तौर पर पटना जैसे शहर में अधिकांश युवा दूर-दराज से पढ़ाई के लिए आते हैं | बढती आधुनिकता के लटके-झटकों के लिए पढाई के मद में घर से मिल रहे पैसों का ना केवल दुरूपयोग होता है बल्कि ऐसे बहकावे में आकार उनका करियर भी बर्बाद हो जाता है |</h3>
<h3 style="text-align: justify;">पटना तो बस एक उदाहरण है | ऐसी परिस्थितियां तो देश के तमाम छोटे शहरों में उत्पन्न हो गयी है | संचार माध्यमों ने युवा मन के भीतर ऐसी रंगीनियों को जन्म दिया है जो उन्हें सामाजिक –पारिवारिक और खुद अपनी जिम्मेदारियों से दूर भोगवाद के अंधे कुएं में धकेल रही है | उपभोग के नित नए-नए साधनों के प्रवेश ने तो बस हमें उपभोक्ता बना कर छोड़ दिया | अपने भविष्य से कोसों दूर वर्तमान को अधिक से अधिक भोग लेने की लालसा से कई प्रकार की कुंठाएं युवाओं के मन में घर कर रही है जो कभी आर्थिक अपराधों की ओर तो कभी यौन अपराधों की ओर  ले जाती है | यही कारण है कि आज अपराधियों में पढ़े-लिखे युवाओं की संख्या पहले की अपेक्षा बढ़ी है |</h3>
<h3 style="text-align: justify;">रसरंजन में रमा युवा मन अगर यूँ ही अपनी जिम्मेदारियों को नजरअंदाज करता रहा तो युवाओं का बहुसंख्यक होना वरदान ना होकर अभिशाप बन जायेगा |</h3>
<h3 style="text-align: justify;"></h3>
]]></content:encoded>
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		<title>क्या राष्ट्रवाद सत्ता सापेक्ष है ?</title>
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		<pubDate>Wed, 07 Dec 2011 18:46:10 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अरुंधती]]></category>
		<category><![CDATA[क्या राष्ट्रवाद सत्ता सापेक्ष है ?]]></category>
		<category><![CDATA[देशभक्ति]]></category>
		<category><![CDATA[प्रशांत भूषण]]></category>
		<category><![CDATA[सैयद अली शाह गिलानी]]></category>

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		<description><![CDATA[देश में एक बार फिर से आतंरिक कलह का वातावरण तैयार किया जा रहा है &#124; कश्मीर से लेकर मुंबई तक क्षेत्रवादी – अलगाववादी ताकतें पुनः सर उठा रही है &#124; एक तरफ सैयद अली शाह गिलानी , अरुंधती ,प्रशांत ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h3 style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/12/india-nationalism.jpg"><img class="alignright size-full wp-image-25049" title="india nationalism" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/12/india-nationalism.jpg" alt="क्या राष्ट्रवाद  सत्ता सापेक्ष है ?"width="310" height="342" /></a>देश में एक बार फिर से आतंरिक कलह का वातावरण तैयार किया जा रहा है | कश्मीर से लेकर मुंबई तक क्षेत्रवादी – अलगाववादी ताकतें पुनः सर उठा रही है | एक तरफ सैयद अली शाह गिलानी , अरुंधती ,प्रशांत भूषण जैसे स्वयम्भू लोग कश्मीर को अलग करने की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर अतिवादी राज ठाकरे मुंबई में उत्तर भारतीयों की सरेआम पिटाई करता है | एक ओर तमिलनाडु विधानसभा राजीव गाँधी के हत्यारों की फांसी रोकने के लिए प्रस्ताव पारित करती है तो दूसरी ओर खालिस्तानी आतंकी भुल्लर के पक्ष में पंजाब के कुछ फिरकापरस्त लोग खड़े होने का दुस्साहस कर रहे हैं |</h3>
<h3 style="text-align: justify;">उधर पूर्वोत्तर भारत के प्रति केंद्र की उदासीनता से स्थानीय नागरिकों में “ In INDIA we r not Indians .”  की भावना बढती जा रही है | मणिपुर में पिछले तीन महीने से रोड ब्लोकेज की वजह से आपातकाल जैसे हालात रहे हैं | वहां 300 रूपये लीटर पेट्रोल और ५०० रूपये किलो नमक मिलने की खबरे आ रही है ,दुकानों में खाद्य सामग्री और दवाइयों की घोर किल्लत आ गयी है |</h3>
<h3 style="text-align: justify;">और हम हैं कि शुतुरमुर्ग की भांति इन समस्याओं से मुंह छिपाए बैठे हैं | बढते अलगाववाद /क्षेत्रवाद के कारण जो परिस्थितियां उत्पन्न हो रही हैं और आगे होने वाली हैं उसका परिणाम बहुत ही घातक है |</h3>
<h3 style="text-align: justify;">ऐसे संक्रमणकाल में जब क्षेत्रवाद चरम पर हो , हमें खुद को राष्ट्रवादी /देशभक्त कहने से पहले वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रवाद की पुन: व्याख्या करने की आवश्यकता है | क्या आतंकियों के समर्थन में पारित तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव का विरोध नहीं करना राष्ट्रवाद है ? क्या राज ठाकरे द्वारा उत्तर भारतीयों की बार-बार पिटाई और महाराष्ट्र छोड़ने की धमकी का विरोध ना करना , राष्ट्रवाद है ? क्या खालिस्तानी आतंकी भुल्लर के पक्ष में खड़े होना राष्ट्रवाद है ?</h3>
<h3 style="text-align: justify;">कुल मिलकर सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि क्या राष्ट्रवाद / देशभक्ति सत्ता सापेक्ष है ? सत्ता प्राप्ति के लिए वोट बैंक का जोड़-तोड़ क्या देश से बड़ा हो गया है ?</h3>
<h3 style="text-align: justify;"><span style="color: #000080;"> आप अपने विचार नीचे &#8216; प्रतिक्रिया बक्से &#8216; में लिखें |</span></h3>
]]></content:encoded>
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		<title>यूथ अगेंस्ट करप्शन का राष्ट्रव्यापी महाधरना</title>
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		<pubDate>Sat, 03 Dec 2011 08:10:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>

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		<description><![CDATA[&#8220;यूथ अगेंस्ट करप्शन&#8221; (YAC) के बैनर तले 72 घंटे के राष्ट्रव्यापी धरने के अंतिम दिन देश भर के सभी प्रदेशों में हजारों छात्रों ने हिस्सा लिया &#124; भ्रष्टाचार व काले धन के मुद्दे को लेकर इस राष्ट्रव्यापी धरने में 25 ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&#8220;यूथ अगेंस्ट करप्शन&#8221; (YAC) के बैनर तले 72 घंटे के राष्ट्रव्यापी धरने के अंतिम दिन देश भर के सभी प्रदेशों में हजारों छात्रों ने हिस्सा लिया | भ्रष्टाचार व काले धन के मुद्दे को लेकर इस राष्ट्रव्यापी धरने में 25 स्थानों पर एक लाख से ज्यादा छात्र-युवा और लोगों ने भाग लिया | इसमें कई सामाजिक, युवा, राजनैतिक संगठनों के अनेकों कार्यकर्ताओं ने YAC के समर्थन में उतरकर इस धरने को और प्रखर व प्रभावी बनाया |</p>
<p style="text-align: justify;">
<div id="attachment_24927" class="wp-caption aligncenter" style="width: 510px"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/12/Bhopal-MP.jpg"><img class="size-large wp-image-24927" title="Bhopal (MP)" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/12/Bhopal-MP-500x312.jpg" alt="" width="500" height="312" /></a><p class="wp-caption-text">भोपाल के महाधरने में शामिल युवा </p></div>
<p>देश भर के कई गैर राजनैतिक संगठनों ने इस महाधरने का समर्थन किया व अपने समर्थन पत्र YAC को दिए | इन 72 घंटों के महाधरनों में YAC ने कई मुद्दों को उठाया | वर्त्तमान संसद सत्र में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए एक ठोस कानून और विदेशी बैंकों में पड़े  काले धन को वापस लाकर राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने की मांग भी इसमें की गयी | YAC के राष्ट्रीय सह-संयोजक विष्णुदत्त शर्मा ने रायपुर, दूसरे सह-संयोजक रविकुमार ने हैदराबाद, एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री उमेश दत्त ने दिल्ली, एबीवीपी के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री रघुनन्दन ने भुवनेश्वर, YAC राष्ट्रीय समिति सदस्य मंत्री श्रीनिवास ने बेंगलुरु में इन महाधरनों का नेतृत्त्व किया |</p>
<p style="text-align: justify;">
<div id="attachment_24928" class="wp-caption aligncenter" style="width: 510px"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/12/hyderabad-youth-against-corruption.jpg"><img class="size-large wp-image-24928" title="hyderabad youth against corruption" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/12/hyderabad-youth-against-corruption-500x375.jpg" alt="" width="500" height="375" /></a><p class="wp-caption-text">हैदराबाद में हजारों युवा शामिल </p></div>
<p>उत्तराखंड के हल्द्वानी में इन्ही मुद्दों को लेकर रैली का आयोजन किया गया जिसमे 5000 से अधिक छात्र-युवाओं ने सहभागिता देकर इस भ्रष्टाचार व व्यवस्था के विरूद्ध अपना आक्रोश प्रकट किया | इस रैली को संबोधित करते हुए एबीवीपी के राष्ट्रीय संगठनमंत्री सुनील आम्बेकर ने वर्त्तमान भ्रष्टाचार को केंद्र सरकार को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराते हुए UPA सरकार की नाकामिया गिनाई | भ्रष्टाचार तथा भ्रष्ट लोगों का बचाने वाली तथा उनका पोषण करने वाली केंद्र सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प भी हजारों की संख्या में सम्मिलित लोगों ने किया | दिल्ली में जंतर-मंतर पर किये गए धरने में उमेश दत्त ने बताया कि भ्रष्टाचार से लोगों का ध्यान हटाने के लिए UPA सरकार ने FDI के विषय को लाया है | लेकिन लोग बेवकूफ नहीं है, हम इन दोनों मुद्दों के विरोध में प्रखरता से लड़ेंगे और सरकार को सबक सिखायेंगे |</p>
<p style="text-align: justify;">
<div id="attachment_24930" class="wp-caption aligncenter" style="width: 510px"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/12/Jabalpur-youth-against-corruption.jpg"><img class="size-large wp-image-24930" title="Jabalpur youth against corruption" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/12/Jabalpur-youth-against-corruption-500x342.jpg" alt="" width="500" height="342" /></a><p class="wp-caption-text">जबलपुर में आयोजित महाधरना </p></div>
<p>महाधरनों में समग्र व्यवस्था परिवर्तन की मांग भी उठाई गयी | YAC के राष्ट्री संयोजक सुनील बंसल ने बताया कि जल्द ही YAC चुनाव, प्रशासन, पुलिस, शिक्षा और न्यायिक व्यवस्था के बारे में व्यापक सुधार के बारे में विचार-विमर्श करके एक ठोस प्रारूप लेकर सामने आएगी |</p>
<p style="text-align: justify;">YAC ने निचे दिए गए मुद्दों लेकर तीन दिवसीय महाधरने का आयोजन किया था |</p>
<p style="text-align: justify;">
<div>1. भ्रष्ट प्रधानमंत्री इस्तीफा दे</div>
<div>2. विदेशी बैंको में पड़े काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करो व ऐसे लोगो के खिलाफ बेनामी प्रवाही ( floating) वारंट जारी हो</div>
<div>3. निजी  व एनजीओ (NGO) क्षेत्र के भ्रष्टाचार को रोकने हेतु नया कानून लाओ</div>
<div>4. राईट टु एलेक्ट (Right to elect) लागू करो – अनिवार्य मतदान</div>
<div>5. आगामी  चुनाव  के  पहले  चुनाव  सुधार  करो</div>
<div>6. सक्षम लोकपाल,  सिटिजन चार्टर और कई कड़े कानून लागू करो</div>
<div>7. पुलिस, न्याय, शिक्षा, प्रशासन आदि व्यवस्थाओ में सुधार (reforms) करो</div></p>
]]></content:encoded>
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		<title>पाकिस्तान नहीं करना चाहता सच से सामना</title>
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		<pubDate>Thu, 01 Dec 2011 16:43:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
				<category><![CDATA[मीडिया-संसार]]></category>

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		<description><![CDATA[पाकिस्तानी केबल ऑपरेटरों ने लगाया बीबीसी पर प्रतिबन्ध पाकिस्तान में मीडिया सेंसरशिप का मामला एक बार फिर सामने आया है &#124; पाकिस्तान के केबल टेलीविजन संचालकों ने ‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज’ पर ‘‘पाकिस्तान विरोधी’’ कार्यक्रम प्रसारित करने का आरोप लगा कर ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h3 style="text-align: justify;"><span style="text-decoration: underline; color: #008000;">पाकिस्तानी केबल ऑपरेटरों ने लगाया बीबीसी पर प्रतिबन्ध</span></h3>
<h3 style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/12/bbc-logo.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-25078" title="bbc-logo" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/12/bbc-logo-185x130.jpg" alt="" width="185" height="130" /></a>पाकिस्तान में मीडिया सेंसरशिप का मामला एक बार फिर सामने आया है | पाकिस्तान के केबल टेलीविजन संचालकों ने  ‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज’ पर ‘‘पाकिस्तान विरोधी’’ कार्यक्रम प्रसारित करने का आरोप लगा कर इसके प्रसारण पर रोक लगा दी है।</h3>
<h3 style="text-align: justify;">ऐसा लगता है जैसे एशियाई देशों में अभिव्यक्ति के ऊपर प्रहार का प्रचलन हो चला है | कहीं सरकारें तो कहीं केबल ऑपरेटरों की मनमानी जारी है | साल भर पहले की बात है जब चीन ने गूगल पर इसलिए पाबन्दी लगाया था कि चीनी नागरिक सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ ब्लॉग ,वेबसाइट्स और सोशल नेटवर्किंग साइट्स के माध्यम से अपने विचारों को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे थे | हाल ही में भारत सरकार के मंत्री कपिल सिब्बल के पहल पर भारत में लोकप्रिय सोशल नेटवर्क फेसबुक ने भी आपत्तिजनक कंटेंट के नाम पर कई बड़े कम्युनिटी पेज को हटा दिया है |</h3>
<h3 style="text-align: justify;">&#8216;भाषा&#8217; की खबर के अनुसार पाकिस्तानी केबल संचालकों ने कहा है कि बीबीसी में दिखाए जाने वाले ‘‘सीक्रेट पाकिस्तान’’ नाम के वृत्तचित्र के कारण प्रसारण रोका गया है। इस वृत्तचित्र में आईएसआई और तालिबानी लडाकों के बीच संबंधों को दिखाया गया है। इस वृत्तचित्र को काफी पहले से विश्व के अन्य भागों में प्रसारित किया जा चुका है, लेकिन पाकिस्तान में इसे पिछले हफ्ते ही प्रसारित किया गया।</h3>
<h3 style="text-align: justify;">पाकिस्तानी केबल ऑपरेटरों के इस कदम से जाहिर है कि वहां के हुक्मरान अपनी करतूतों का आयना नहीं देखना चाहते | खैर , उनके इस कदम से कोई खास अंतर नहीं पड़ने वाला है क्योंकि बीबीसी के दर्शक दुनिया भर में हैं जो पकिस्तान के आतंकी मंसूबों को समझने लगे हैं | पाकिस्तान की छवि दुनिया भर में आतंक के नए सूत्रधार के रूप में सामने आ रहा है और साथ ही पाकिस्तान को मिल रहे अमेरिकी संरक्षण पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं | मुंबई हमलों में डेविड हेडली के बयानों से और ओसामा के पाकिस्तान की जमीन पर मारे जाने की घटना ने आईएसआई सहित पाकिस्तानी सेना की आतंकी संलिप्तता जगजाहिर कर दी है |</h3>
<h3 style="text-align: justify;"></h3>
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		<title>राज्य बनाने से बेहतर है एक नया अर्थशास्त्र बनाओ</title>
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		<pubDate>Tue, 22 Nov 2011 06:16:56 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादक उवाच]]></category>
		<category><![CDATA[एक नया अर्थशास्त्र बनाओ]]></category>
		<category><![CDATA[तेलंगाना और विदर्भ]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य बनाने से बेहतर है एक नया अर्थशास्त्र बनाओ]]></category>

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		<description><![CDATA[देश के विभिन्न भागों में छोटे राज्यों के गठन को लेकर सियासी माहौल गरमाने की कोशिशें तेज हो गयी है &#124; तेलंगाना और विदर्भ जैसे पिछड़े क्षेत्रों में अलग राज्य की मांग पहले से की जाती रही है &#124; अब ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: justify;"><span style="color: #0000ff;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/11/proposed-division-of-uttar-pradesh1.jpg"><img class="alignright size-large wp-image-24682" title="proposed division of uttar pradesh" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/11/proposed-division-of-uttar-pradesh1-493x500.jpg" alt="राज्य बनाने से बेहतर है एक नया अर्थशास्त्र बनाओ"width="293" height="400" /></a>देश के विभिन्न भागों में छोटे राज्यों के गठन को लेकर सियासी माहौल गरमाने की कोशिशें तेज हो गयी है | तेलंगाना और विदर्भ जैसे पिछड़े क्षेत्रों में अलग राज्य की मांग पहले से की जाती रही है | अब मायावती ने उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों(पूर्वाचल प्रदेश, अवध प्रदेश, पश्चिम प्रदेश और बुंदेलखण्ड) में विभाजित करने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित करवा कर राज्यों के विखंडन को विकास के नाम की हवा दी है | यूपी का असर दिल्ली में बैठे कुछ बिहार के नेताओं में भी होने लगा है जो नीतीश के एक बयान को जिसमें छोटे राज्यों के गठन से विकास होने की बात कही थी , आधार बना कर मिथिला,वज्जिकांचल,भोजपुर आदि नए राज्य गठन करवाने का सपना देखने लगे है | दरअसल, इन छोटे-छोटे राज्यों के गठन की मांग एक “ बोली “,एक संस्कृति की विशिष्टता पर आधारित है जिसे राज्यों के भीतर विकास कार्यों में भेदभाव से उपजे पिछडेपन के तर्क की आड़ में सही साबित करने का प्रयास किया जाता है |</span></h4>
<h4 style="text-align: justify;"><span style="color: #0000ff;">यह बात काफी हद तक सही है कि सरकारी विकास कार्यक्रमों में राज्य के भीतर भी क्षेत्रीय भेदभाव होता रहा है | विकास का विकेन्द्रीकरण आवश्यक है | लेकिन क्या यह विकास राज्य के स्तर पर टुकड़ों में बाँट कर ही पाया जा सकता है ? </span></h4>
<h4 style="text-align: justify;"><span style="color: #0000ff;">और जरा इस सवाल को भी सोचना चाहिए कि क्या जिन क्षेत्रों में विकास समान रूप से नहीं हुआ या भेदभाव बरता गया है , उन क्षेत्रों से जनप्रतिनिधि चुनकर विधानसभा नहीं पहुँचते ?क्या उन क्षेत्रों के विधायक मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होते ? आखिर क्यों जनता के चुने हुए प्रतिनिधि अपने क्षेत्र की जनता के प्रति ,विकास के प्रति जबावदेह नहीं हैं ? अगर आज यूपी -बिहार बीमारू राज्यों की श्रेणी में खड़ा है तो क्या इसके लिए हमारे नेता जो कल तक केंद्र की सत्ता में सबसे बड़ी भागीदारी रखते आये हैं वो जिम्मेदार नहीं है ? </span></h4>
<h4 style="text-align: justify;"><span style="color: #0000ff;">नए राज्य बनेंगे तो क्या होगा यह हम सभी जानते हैं | फिर वही खिचड़ी बंटेगी और विकास के नाम पर केन्द्र के पैसों का और राज्य के संसाधनों की खुली लूट ,राजनितिक अस्थिरता ,क्षेत्रीय दलों का दल-दल | विकास हो पायेगा या बचे-खुचे प्राकृतिक संसाधनों का दस-बीस सालों में सफाया ?</span></h4>
<h4 style="text-align: justify;"><span style="color: #0000ff;">ऐसी मान्यता के आधार पर कि छोटे राज्यों में अधिक विकास होगा, एक दशक पहले उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ नए राज्य बने थे। उन तीनों की प्रति व्यक्ति आय आज उन राज्यों से ज्यादा है, जिनसे अलग कर उनका निर्माण हुआ था। यह सिर्फ एक मिसाल है विकास की |</span></h4>
<h4 style="text-align: justify;"><span style="color: #0000ff;">लेकिन सवाल तो &#8220;विकास &#8221; ऊपर ही खड़ा हो रहा है कि कैसा विकास ? झारखण्ड ,उत्तराखंड ,छतीसगढ़ सब जगह हुआ विकास , किन्तु क्या अमेरिकी नक़ल वाले मनमोहनी अर्थशास्त्र पर आधारित यह विकास स्थाई है ?</span></h4>
<p style="text-align: justify;"><span style="color: #0000ff; font-weight: bold;">संपूर्ण भारत में आज वही मनमोहनी अर्थशास्त्र चल रहा है चाहे भाजपा की सरकार हो या कांग्रेस की | ये वही अर्थशास्त्र है भविष्य की संपत्ति खनिज को विदेशों में बेचकर विकास दर बनाये रखता है &#8230;.. जल-जमीन-जंगल पर निजी कंपनियों /विदेशी कंपनियों को सौंपकर विकास के सपने देखते हैं &#8230;&#8230;. पूंजी वालों और गरीबों के बीच की खाई बढती जा रही है | महज बीस प्रतिशत लोग ही उस विकास दर में शामिल हैं जिनके हवाले से समृद्धि का झूठा स्वांग रचाया जा रहा है |</span></p>
<h4 style="text-align: justify;">राज्य बनाने से बेहतर है एक नया अर्थशास्त्र बनाओ जो भारतीयों को कम से कम रोटी-कपड़ा-मकान -शिक्षा -रोजगार देकर एक स्थाई विकास का उदाहरण बन सके |</h4>
<h4 style="text-align: justify;"><span style="color: #0000ff;">अभी मात्र 28 राज्य हैं तो मणिपुर जैसे राज्यों की ये हालात है | सौ दिन से अधिक हो गया रोड ब्लोकेज को , सरकार सो रही है | आने वाले महीनो में दर्जन भर और राज्यों की मांग हो रही है &#8230;.क्या संभल पायेगा केंद्र से राज्य ? क्या रह पायेगा शक्ति और शांति का संतुलन ?</span></h4>
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