Articles By: फ़िरदौस ख़ान फ़िरदौस ख़ान

मर्ज़ बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की

मर्ज़ बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की

2 2010/07/13 12:47 pm

भौतिकवादी संस्कृति ने जहां जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है, वहीं मनुष्य का स्वास्थ्य भी इससे न अछूता रहा हो तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है। दौलत कमाने की चाह ने इंसान को बहुत ज़्यादा व्यस्त

आत्महंता मत बनिए

आत्महंता मत बनिए

0 2010/05/23 2:22 pm

यह एक विडंबना ही है कि ‘जीवेम शरदः शतम्’ यानी हम सौ साल जिएं, इसकी कामना करने वाले समाज में मृत्यु को अंगीकार करने की आत्महंता प्रवृत्ति बढ़ रही है। आत्महत्या करने या सामूहिक आत्महत्या करने की दिल दहला देने

फ़तवों की बिसात पर मुसलमान

फ़तवों की बिसात पर मुसलमान

1 2010/05/13 3:53 pm

भारत में मुसलमान वर्ग अन्य समुदायों के मुक़ाबले बहुत ज़्यादा पिछड़ा है. इसकी एक अहम वजह यह है कि वे अपनी पुरातनपंथी मानसिकता के दायरे से बाहर आने की कोशिश नहीं करते. अगर कुछ लोग वक्त के साथ चलकर दूसरी