आरक्षण समाप्त करना है तो………
1आरक्षित वर्ग के वर्गद्रोही अफसर तत्काल बर्खास्त किये जायें! भारत के संविधान के बारे में जानकारी रखने वाले सभी विद्वान जानते हैं कि हमारे संविधान के भाग तीन अनुच्छेद-14, 15 एवं 16 में जो कुछ कहा गया है, उसका साफ
आरक्षित वर्ग के वर्गद्रोही अफसर तत्काल बर्खास्त किये जायें! भारत के संविधान के बारे में जानकारी रखने वाले सभी विद्वान जानते हैं कि हमारे संविधान के भाग तीन अनुच्छेद-14, 15 एवं 16 में जो कुछ कहा गया है, उसका साफ
राजस्थान की राजधानी जयपुर में ‘जयपुर फेस्टीवल’ में शीर्ष साहित्यकारों को आमन्त्रित किया गया था, जिनमें भारत मूल के ब्रिटिश नागरिक सलमान रुश्दी को भी बुलावा भेजा गया| सलामन रुश्दी की भारत यात्रा के विरोध में अनेक मुस्लिम संगठन आगे आये
भारत की आजादी के बाद जम्मू और कश्मीर पर पाकिस्तान की सेना ने कबायलियों के बेश में आक्रमण किया था, जिससे बचाव के लिये वहॉं के तत्कालीन शासक राजा हरिसिंह ने भारत से मदद मांगी| मदद के बदले में भारत
प्रारम्भ में जब सूचना अधिकार कानून की लड़ाई लड़ी जा रही थी तो आम लोगों को इस कानून से भारी उम्मीद थी| लेकिन जैसे ही इस कानून से सच्चाई बाहर आत दिखी तो अफसरशाही ने इस कानून की धार को
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि इस देश की रग-रग में भ्रष्टाचार समाया हुआ है और भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिये अन्य अनेक बातों के साथ-साथ सख्त कानून की दरकार है, जिसके लिये प्रस्तावित लोकपाल कानून को
भारत में विदेशी वस्तुओं और तकनीक को अपनाने वालों की अच्छी खासी तादाद है| विदेशी सामग्री को अपनाने के प्रति हर आम-ओ-खास में शर्म नहीं, बल्कि गर्व का भाव है| इस प्रकार से आजादी के समय में विदेशी कपड़ों की
सुखराम बनाम ए. राजा : 4 अनुपात 96 बनाम 96 अनुपात 4 केवल वर्तमान में ही नहीं, बल्कि हमेशा से सही और सत्य बोलने वालों को सूली पर चढाया जाता रहा है| ऐसे लोगों का तिरस्कार किया जाता रहा है|
आजादी के तत्काल बाद संविधान में सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक रूप से सर्वाधिक कमजोर जिन दो वर्गों या समूहों को चिह्नत किया गया था, उनमें एक आदिवासी वर्ग है, जिसे संविधान में ‘अनुसूचित जनजाति’ कहा गया था, संविधान में उसे
सूचना अधिकार कानून के तहत हुआ खुलासा सुप्रीम कोर्ट में दो करोड़ 39 लाख मेडीकल खर्च का रिकॉर्ड ही नहीं? सुप्रीम कोर्ट के मामले में सीआईसी की बोलती बन्द क्यों हो जाती है? जनता की गा़ढ़ी कमाई से टैक्स
भारत में अपना संविधान लागू होने के उपरान्त भी पिछले छह दशक से भी अधिक समय से सभी सिविल मामलों में देश के लोगों को इंसाफ के नाम पर नीम-हकीमी निर्णय प्राप्त हो रहे हैं| जिनमें न्याय कम, अन्याय अधिक