Articles By: डॉ. वेद व्यथित

लोक पाल बिल

0 2011/04/28 10:43 pm

लोक पाल के बनने से ऐसा हजूर डर क्या है काले धन को खोने का ऐसा हजूर डर क्या हैं जेल वेल की नौबत ही कब आ  पायेगी इस से बनने कब दोगे तुम इस को फिर हजूर डर क्या

लोक पाल बिल

0 2011/04/26 10:37 pm

लोक पाल के बनने से ऐसा हजूर डर क्या है काले धन को खोने का ऐसा हजूर डर क्या हैं जेल वेल की नौबत ही कब आ  पायेगी इस से बनने कब दोगे तुम इस को फिर हजूर डर क्या है ||

बेमौसम बरसात और किसान

0 2011/04/18 9:16 pm

राजा ये प्रताप तुम्हारा आंधी बादल आयें हैं फसल पड़ी  है बीच खेत के क्यों ये कहर बरपाए हैं इंतजार था फसल पकेगी कर्ज सभी चुक जायेंगे पर सब आशा धरी रह गई क्यों ओले बरसायें हैं तुम तो फाटक बंद बंद  कर चाय 

पद ,गोपनीयता और शपथ

0 2011/04/13 11:00 am

पद ,गोपनीयता और शपथ हमारे देश कीआबादी एक अरब से तो काफी ज्यादा हो चुकी है यह बात तो दूसरे के घरों में ताकझाँक कर के मालूम की गई बातों की तरह ही सब को मालूम है ही क्योंकि यह

भगवान श्री राम

1 2011/04/12 9:30 am

भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर आप सब को हार्दिक शुभकामनायें मैं इस अवसर पर प्रार्थना करता हूँ कि देश से दुष्टों का विनाश हो सब सुखी व सम्पन्न हूँ राम राज्य की स्थापना हो उस के लिए हम सब

एक हजारे क्या

2 2011/04/09 1:42 pm

सम्वेदन शून्य हो गया मनुज अब क्या होगा शासन का डर रह नही गया क्या होगा पुलिस खड़ी है मूक बनी पिटने के डर से गुंडे बदमाश घुमते खुले आम अब क्या होगा पुलिस किसी को कहती है कि रुक

क्रिकेट

क्रिकेट

0 2011/03/29 8:46 pm

क्रिकेट २ शोर मच रहा किरकेट क्या भगवान हो गया देश निठल्ला  करने का ही ये सारा सामान हो गया छोड़ काम बाक़ी के सारे बस किरकेट की पूजा कर लो जैस किरकेट किरकेट न हो असन,वसन आवास हो गया

अपनी औकात

0 2011/03/27 2:05 pm

नही जरूरत रिश्वत है खोरी की जाँच करने की वो तो बात पुरानी है सत्ता उस से कब्जाने की नया घोटाले ही क्या कम हैं इन पर हल्ला कम है क्या तुम को छूट मिली है कितनी इन पर शोर

महान काम

0 2011/03/19 5:26 pm

हुआ खुलासा रिश्वत से सरकार बचाई जाती है हथियारों के सौदे में भी रिश्वत खाई जाती है बिन रिश्वत के सरकारी दफ्तर में काम करा देखो रिश्वत पहले ली जाती फ़ाइल  तब सरकाई जाती है || जब इतना आवश्यक है

लूट तन्त्र

लूट तन्त्र

0 2011/03/18 2:36 pm

लोक लाज सब धरी ताक पर देश को जी भर लूटेंगे इन की करनी से भारत के भाग तो निश्चित फूटेंगे पर कहने की हिम्मत किस में किस की ये सुन सकते हैं एक मात्र उद्देश्य हैं इन का दोनों