आरक्षण प्राप्त और वंचित कितने ?
0संविधान निर्माता बाबा भीमराव अम्बेडकर ने सपने में भी कभी नहीं सोचा होगा जिस दलित पिछडे, दबे-कुचलों के लिए जीवन भर संघर्ष कर संविधान में विशेष प्रावधानों का उपयोग कर इन्हें मुख्यधारा में लाने का जो संकल्प किया था आज
संविधान निर्माता बाबा भीमराव अम्बेडकर ने सपने में भी कभी नहीं सोचा होगा जिस दलित पिछडे, दबे-कुचलों के लिए जीवन भर संघर्ष कर संविधान में विशेष प्रावधानों का उपयोग कर इन्हें मुख्यधारा में लाने का जो संकल्प किया था आज
” अपने लिए जिये तो क्या जिये, तू जी ए दिल जमाने के लिए ’’ साठ के दशक का मन्ना डे द्वारा गाया ये गाना आज भी दार्शनिक तौर पर उतना ही खरा है जितनी की इसकी भावना। लेकिन, जैसे-जैसे
भारत संस्कृति और परंपराओं का देश है। किसी भी कार्य के संपादन के लिये ऊर्जा एवं शक्ति की आवश्यकता होती है। मातृ शक्ति एवं भक्ति के बिना दुनिया का संचालन असंभव है। कर्म से शक्ति को आ सकती है लेकिन
भारत का संविधान अपने आप में अनोखा है, लेकिन निहितार्थ की राजनीति के चलते सभी राजनीतिक दल संविधान पर लगातार प्रहार कर अपने मनमाफिक इसमें संशोधन करने में जुटे हुए है। आज संवैधानिक पद भी राजनीति से अछूती नहीं है। आज राजनीति
हिन्दुस्तान में कभी महाभारत हुआ और खत्म हो गया ऐसा नहीं है बल्कि आज भी मानव के दिमाग की रणभूमि में अंधेरे एवं उजाले, सत्य एवं असत्य की विशाल सेनाएं तैनात है अंतर सिर्फ इतना है कि महाभारत के युद्ध
भारत ’’सर्वे भवन्तु सुखनः एवं वसुधैव कुटुंबकम’’ की भावना को लेकर चलता है। लेकिन देश में शैतानी शक्तियों का बढ़ता दायरा केंसर की तरह सम्प्रदायवाद, जातिवाद एवं आतंकवाद के रूप में द्रुत गति से बढ़ रहा है। अब वक्त आ
भारत प्रारंभ से ही साधु-संत फकीर, ऋषि मुनियों की भूमि रहा है! आध्यात्म-ज्ञान के क्षेत्र में भारत का पूरे विश्व में एक अलग ही स्थान है, फिर बात चाहे भगवान राम,कृष्ण महावीर ही क्यो न हो, पूरे विश्व में हर
जल, जंगल और ज़मीन आदि अनादि काल से ही मानव को आर्किर्षत करते आए हैं और करे भी क्यों न आखिर इनसे मानव का जीवन जो जुड़ा है, इतना ही नहीं प्रकृति की ये तीनों चीजें मानव स्वास्थ्य के लिये
कहते हैं कि 12 साल में घूरे के भी दिन फिर जाते हैं लेकिन उत्तरप्रदेश में तो दूने वर्ष बीतने पर भी कांग्रेस पार्टी की ढ़ाक के तीन पात की ही स्थिति है। अभी तक कांग्रेस का कोई भी राजनीतिक
इस लेख को लिखने का आशय किसी का अपमान या छवि धूमिल करना नहीं है, बल्कि उनकी सोयी आत्मा को जगाना है। इतिहास गवाह है कि चरित्रहीन व्यक्ति या समूह को न पहले कभी सराहा गया था और न आज