प्रसन्नता ही हमारी संजीवनी है .
2मेरी एक अन्तरंग सहेली जो अत्यंत दुखी ,निराश, अनिंद्रा और अपच का शिकार थी उसने निश्चय किया की वह अब मेरी तरह ही हँसेगी,हर हाल में खुश रहेगी . दिन में हर -पल बस वही बातें सोचेगी जिससे हसीं आये.
मेरी एक अन्तरंग सहेली जो अत्यंत दुखी ,निराश, अनिंद्रा और अपच का शिकार थी उसने निश्चय किया की वह अब मेरी तरह ही हँसेगी,हर हाल में खुश रहेगी . दिन में हर -पल बस वही बातें सोचेगी जिससे हसीं आये.
कोकिल जितना घायल होता उतनी मधुर कुहुक देता है जितना धुंधवाता है चंदन उतनी अधिक महक देता है मैने खुद को ना जाना था,ना पहचाना था, कौन हूँ ,क्या हूँ कैसी हूँ ,कहाँ हूँ ……… प़र तेरे प्रेम ने बताया
हाँ ! गर्व है मुझे भारतीय होने प़र मुझे गर्व है अपनी हिंदी प़र, अपने माथे की बिंदिया प़र, हाथों की मेहँदी प़र, खनखनाती चूड़ियों प़र, अपने भारतीय आचार-विचार और परम्परा प़र धर्म-संस्कृति,भाषा-साहित्य और सभ्यता प़र , जो बीज बोये
मेरे अपने, ‘कुछ गुमसुम से, कुछ चुप-चुप से, निर्निमेष शून्य में तकते है! अपने इसी व्यक्तित्व से क्षण भर में ही मोह लेते है
मैं ही सर्वशक्तिमान हूँ अरे ! क्या हुआ निराश होकर क्यों बैठे हो ? क्या अपने ऊपर संदेह हो रहा है ? जब मानव सर्व -शक्तिमान है तो उसे संदेह क्यों होता है ॥ अपने ऊपर विश्वास न होना ही
नमस्ते भारतवर्ष , सफल व्यक्तियों से इर्ष्या मत करो ,उनसे कुछ सीखो कोई सफल व्यक्ति आपका शत्रु हो या मित्र ,उससे इर्ष्या न करके ये जानने का प्रयत्न करो कि उसकी सफलता का रहस्य क्या है। उसकी कामयाबी देख कर,एशो
कुछ शब्द मेरे अपने (स्व:) कौशार्य की विस्मृत कोमलता लौट आने को है, बचपन के उमंग , उल्लास ,स्वच्छंदता ,गीत-नाद , उत्सव—— सब कुछ लुप्त हुए थे कभी , प़र साजन के प्रेम में भीगी , चपल खंजन-सी ,फुदकती,चहकती ,
नमस्ते भारतवर्ष ! चलिए मैं आपको बतातीं हूँ . हमें अपने जीवन से क्या चाहिए …….? शक्ति एवं बुद्धि , शौर्य, तेज, ओज, शांति, धन-संपत्ति , उत्तम स्वास्थ्य, दाम्पत्य जीवन में मधुरता , सभी दिलों में प्यार का प्रसार, कार्य-क्षमता
अनेकों बार मन को समझातीं हूँ , किंचित! अब प्रभात है, मेरे जीवन का , कितने मन-मयूर ,कोकिला मेरे अंगना नाचने को आशान्वित हैं! रचूँगी दिवास्वप्न , गढ़ूंगी आकृतियाँ बावरा मन नित नए स्वप्न बुनता है मेरे मीत निहारते मेरा