मानस जलधि रहे चिर चुम्बित मेरे क्षितिज उदार बनो
2मुस्लिम विचारकों की आपत्ति वन्दे -मातरम के अर्थ को लेकर है – ख़ास कर वन्दे . ताज्जुब है कि भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग होते हुए भी ,वे इस सोच ,मानसिकता से अभी तक नहीं उबरे कि उनकी
मुस्लिम विचारकों की आपत्ति वन्दे -मातरम के अर्थ को लेकर है – ख़ास कर वन्दे . ताज्जुब है कि भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग होते हुए भी ,वे इस सोच ,मानसिकता से अभी तक नहीं उबरे कि उनकी
नक्सल आतंकवाद ,माओवादी हिंसा की घटनाएँ जो कभी छिट-पुट रूप में दिखाई देती थी आज तकरीबन देश के बीस राज्यों में पैर पसारे दिख रही है .राजनीतिक गलियारों में भले हीं इसे किसी आतंकवाद के सदृश घोषित कर दिया हो पर आम जनता इस सत्य को जान चुकी है कि वास्तव में ऐसी घटनाएँ सरकारी तंत्र की विफलता ,अव्यवस्था , भ्रष्टाचार ,सरकारी धन के दुरूपयोग , नीतियों के सही क्रियान्वयन ना होने से उत्पन्न आक्रोश ,असंतोष की ही परिचायक है जिसे हम सब जज्ब किये बैठे हैं . उनके हिंसक प्रदर्शनों ,हमलों पर रोक -थाम के लिए आवश्यक है कि सरकार अपनी कथनी और करनी के अंतर की समीक्षा करे .नक्सल प्रभावित संवेदनशील इलाकों में अंतर्विरोधों को समाप्त करने की पहल करें . रोटी ,कपडा ,मकान ,रोजगार समंधी ठोस कदम उठाये ना कि बल पूर्वक नाक्साली आन्दोलन को कुचलते हुए उन्हें अधिक उग्र बनने पर विवश करे